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Tag Archives: छत्तीसगढ़ी संस्कृति

दक्षिण कोसल के रामायण कालीन ऋषि मुनि एवं उनके आश्रम : वेबीनार रिपोर्ट

दक्षिण कोसल के रामायण कालीन ऋषि मुनि एवं उनके आश्रम विषय पर ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश और सेंटर फॉर स्टडी एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार श्रृंखला की 9 वीं कड़ी का आयोजन दिनाँक 9/8/ 2020, रविवार, शाम 7:00 से 8:30 के मध्य किया गया। इस वेबीनार …

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विष्णु के आठवें अवतार : योगेश्वर श्री कृष्ण

भगवान कृष्ण का जन्मदिन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, जुलाई या अगस्त के महीने में पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें हिंदू लोग श्रीकृष्ण के जन्म को विष्णु के आठवें अवतार के रूप में …

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लोक आस्था का दर्पण : आठे कन्हैया

लोक की यह खासियत होती है कि उसमें किसी भी प्रकार की कोई कृत्रिमता या दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं होता। वह सीधे-सीधे अपनी अभिव्यक्ति को सहज सरल ढ़ंग से शब्दों रंगो व अन्य कला माध्यमों से अभिव्यक्त करता है। तीज-त्यौहारों की परम्परा तो शिष्ट में भी है और …

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छत्तीसगढ़ी संस्कृति में मितान परम्परा

“जाति और वर्ग भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित करने वाली परम्परा” जग में ऊंची प्रेम सगाई, दुर्योधन के मेवा त्यागे, साग बिदूर घर खाई, जग में ऊंची प्रेम सगाई। जीवन में प्रेम का महत्व इतना होता है कि वह मनुष्य की जीवन लता को सींचता है और पुष्ट कर …

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दक्षिण कोसल की जनजाति संस्कृति एवं धार्मिक विश्वास : वेबीनार रिपोर्ट

दक्षिण कोसल की जनजाति संस्कृति एवं धार्मिक विश्वास विषय पर दिनाँक 2 अगस्त 2020 को सेंटर फॉर स्टडी एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ और ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में इंटरनेशनल वेबीनार की आठवीं कड़ी संपन्न हुई। इसमें उद्घाटन उद्बोधन श्री विवेक सक्सेना, सचिव सी एस एच …

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दक्षिण कोसल में रामायण से संबंधित पुरातात्विक साक्ष्य विषय पर संगोष्ठी सम्पन्न : वेबीनार रिपोर्ट

‘दक्षिण कोसल में रामायण से संबंधित पुरातात्विक साक्ष्य’ विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर स्टडी एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ तथा ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में दिनाँक 26 साथ 2020 को शाम 7:00 से 8:30 के मध्य सम्पन्न हुआ। वेब संगोष्ठी …

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दक्षिण कोसल की रामलीला एवं उसका सामाजिक प्रभाव : वेबीनार रिपोर्ट

दक्षिण कोसल की रामलीला एवं उसका सामाजिक प्रभाव विषय पर एक दिवसीय वेब संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर स्टडी ऑन होलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ तथा ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 19 जुलाई 2020 को हुआ। वेब संगोष्ठी में स्वागत उद्बोधन अयोध्या शोध संस्थान उत्तर प्रदेश …

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सरगुजा के जनजातीय समाज पर रामायण का प्रभाव : वेबीनार रिपोर्ट

सरगुजा के जनजातीय समाज पर रामायण का प्रभाव विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश एवं सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑन होलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में 12 जुलाई 2020 रविवार को सायं 6:30 से 8:30 बजे तक किया गया। इस वेबीनार का उद्घाटन उद्बोधन अयोध्या …

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दक्षिण कोसल की संस्कृति में पैली-काठा का महत्व

दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) प्रांत प्राचीनकाल से दो बातों के लिए प्रसिद्ध है, पहला धान की खेती और दूसरा माता कौसल्या की जन्मभूमि याने भगवान राम की ननिहाल। यहाँ का कृषक धान एवं राम, दोनों से जुड़ा हुआ है। यहाँ धान की खेती प्रचूर मात्रा में होती है, इसके साथ ही …

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छत्तीसगढ़ी संस्कृति में रामकथा की व्याप्ति : वेबीनार रिपोर्ट

रामायण के इनसायक्लोपीडिया निर्माण को लेकर दिनांक 21/6 /2020 को शाम 5:00 से 6:30 तक “छत्तीसगढ़ी संस्कृति में रामकथा की व्याप्ति” नामक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन में देश-विदेश से लगभग 109 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी वेबीनार का आयोजन सेंटर फॉर स्टडी हॉलिस्टिक …

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