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Monthly Archives: January 2020

बरन-बरन तरु फुले उपवन वन : वसंतोत्सव विशेष

भारतवर्ष मे ऋतु परिवर्तन के साथ त्यौहार मनाने की परंम्परा है। ऋतुओं के विभाजन में बसंत ऋतु का विशेष महत्व है क्योंकि इस ॠतु का सौंदर्य अनुपम एवं छटा निराली होती है। शीत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ॠतु की आहट की धमक के बीच का काल वसंत काल होता …

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महा मानव महात्मा गाँधी और छत्तीसगढ़ : पुण्यतिथि विशेष

महात्मा गांधी विश्व के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने देश के ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम को सामाजिक जागरण के अपने रचनात्मक अभियान से भी जोड़ा, जिसमें शराबबन्दी ,अस्पृश्यता निवारण, सर्व धर्म समभाव, सार्वजनिक और व्यक्तिगत स्वच्छता, खादी और ग्रामोद्योग, ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन, पंचायती राज और बुनियादी शिक्षा जैसे कई …

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सखि वसन्त आया

वसंतोन्माद में कोई वासंती गीत गा उठता है तो नगाड़ो की थाप के साथ अनहद बाजे बजने लगते हैं। जिस तरह विजयादशमी का त्यौहार सैनिकों के लिए उत्साह लेकर आता है और वे अपने आयुधों की पूजा करते हैं उसी तरह वसंत पंचमी का यह दिन विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों एवं व्यास पूर्णिमा का दिन होता है।

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ग़ुलामी के बन्धनों में जीना याने स्वयं की ज़िन्दगी को तबाह करना: लाला लाजपत राय

लाला लाजपत राय जयंती विशेष आलेख उन्होंने कहा था -ग़ुलामी के बन्धनों में जीना याने स्वयं की ज़िन्दगी को तबाह करना है। लेकिन यह भी सच है कि आज़ादी भले ही हमें प्यारी हो, पर उसे पाने का रास्ता हमेशा कठिन चुनौतियों से भरा होता है। – अपने इन्हीं विचारों …

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जानिए गुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों मनाई जाती है।

शक्ति की उपासना प्राचीन काल से ही होते रही है। इसके प्रमाण हमें दक्षिण कोसल में मिलते है, यहाँ शाक्त सम्प्रदाय का भी खासा प्रभाव रहा है। सिरपुर से उत्खनन में प्राप्त चामुंडा की प्रतिमा इसका प्रमाण है। दक्षिण कोसल के अन्य स्थानों पर देवी पूजा के प्रमाण प्राचीन काल …

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’तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा, नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस

(23 जनवरी, जयन्ती पर विशेष) स्वर्गीय श्री कपिल दा कहते थे, “मेरी दृष्टि में स्वामी विवेकानन्द के सन्देश के प्राण स्वर को समझकर कार्यान्वित करनेवाले तीन व्यक्तित्व हुए। उनमें से प्रथम हैं – भगिनी निवेदिता, दूसरे हैं महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस और तीसरे हैं कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द शिला …

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बुद्ध प्रतिमाओं की मुद्राएं

भारत में एक दौर ऐसा आया कि भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं बहुतायत में निर्मित होने लगी। स्थानक बुद्ध से लेकर ध्यानस्थ बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित होने लगी। ज्ञात हो कि भारतीय शिल्पकला में हिन्दू एवं बौद्ध प्रतिमाओं में प्रमुखता से आसन एवं हस्त मुद्राएं अंकित की जाती है। हमें प्राचीन …

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लोक संबंधों की आत्मा: झेंझरी

मानव जगत में मानवीय संबंधों के जुड़ाव से परिवार और समाज की रचना होती है। आदिम काल से लेकर निरन्तर यह जुड़ाव गतिशील रहा है। मनुष्य के इसी जुड़ाव और संबंध से परिवार और समाज की रचना हुई है। मनुष्य के इसी जुड़ाव और संबंध से मानवीय रिश्तों की बुनियाद …

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स्वामी विवेकानन्द का जीवन और जगत को उनकी देन

(12 जनवरी, स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर विशेष) स्वामी विवेकानन्द भारत ही नहीं अपितु विश्व के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से हैं। वे आध्यात्मिक चिंतक होने के साथ ही बहु आयामी विचारक, प्रभावशाली वक्ता, संवेदनशील समाज सुधारक, समाजसेवी और उत्कट राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने भारतीय अध्यात्म से ऊर्जित गुरु रामकृष्ण के चिंतन …

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चंद्र कलाओं पर आधारित हिन्दू त्यौहार : छेरछेरा पुन्नी विशेष

सूर्य और ग्रह मंडल से मिलकर सौरमण्डल बना है। जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य को ‘सर्वति साक्षी भूतम’ (सब कुछ देखने वाला) कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य भगवान हर क्रियाकलाप के साक्षी हैं। भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह हैं- सूर्य, चंद्र, बुद्ध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, …

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