कल्प वृक्ष सल्फी से जुड़े बस्तर के वनवासी आर्थिक – सामाजिक सरोकार

बस्तर के ग्रामीण परिवेश में सल्फी का अत्यधिक महत्व है। यह वृक्ष जिस घर में होता है, उस घर का कुछ वर्षो में आर्थिक रूप से  काया कल्प हो जाता है। प्रकृति के साथ सन्तुलन बनाते हुये बस्तर का ग्रामीण इसे सहेजने की कला स्वमेव सीख गया है। इसलिये अपने …

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इन पुतरन के सीस पर वार दिए सुत चार : गुरु गोविन्द सिंह जी

गुरु गोविंद सिंह जी के 354 वें प्रकाश पर्व पर विशेष आलेख हिन्दू जाग्रत है तो भारत सुरक्षित है। भारत का धर्म और संस्कृति सुरक्षित है। किन्तु जब भारत की रक्षा करनेवाले ही हताश, निराश और ध्येय विहीन रहेंगे तो भला राष्ट्र कैसे सुरक्षित रह सकता है। इसलिए प्रत्येक भारतवासी …

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गोंड़ शासकों की नगरी धमधागढ़ एवं दशावतार शिल्पांकन

धमधा दुर्ग जिले के अन्तर्गत दुर्ग से बेमेतरा रोड पर मुख्य सड़क पर स्थित है। यहां पर प्राचीन बस्ती में तालाब के किनारे महामाया मंदिर स्थित हैं। मंदिर के उत्तर में प्राचीन प्रस्तरों से निर्मित एक मोटी दीवार है जिसमें कलचुरि कालीन देवी देवताओं की प्रतिमायें जड़ी हैं। इसी मंदिर …

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प्राचीन इतिहास की साक्षी घटियारी

छत्तीसगढ़ की धरती पुरातात्विक धरोहरों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पुरातात्विक महत्व के अनेक केन्द्र हैं। जिन पुरातात्विक स्थानों पर पुरातत्ववेत्ताओं का ध्यान अधिक आकृष्ट हुआ, जिनको ज्यादा प्रचार-प्रसार मिला वे स्थान लोगों की नजरों में आये और गौरव के केन्द्र बने। जिन पर लोगों का ध्यान नहीं …

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प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि का पर्व : मकर संक्रांति

संक्रांति का तात्पर्य संक्रमण से है, सूर्य का एक राशि से अगली राशि में जाना संक्रमण कहलाता है। वैसे तो वर्ष में 12 संक्रांतियाँ होती हैं, परन्तु मकर, मेष, धनु, कर्क आदि चार संक्रांतियाँ देश के विभिन्न भू-भागों पर मनाई जाती हैं। इसमें अधिक महत्व मकर संक्रांति को दिया जाता …

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स्वामी विवेकानंद एवं उनका भारत प्रेम : विशेष आलेख

भारत ही स्वामीजी का महानतम भाव था। …भारत ही उनके हृदय में धड़कता था, भारत ही उनकी धमनियों में प्रवाहित होता था, भारत ही उनका दिवा-स्वप्न था और भारत ही उनकी सनक थी। इतना ही नहीं, वे स्वयं भारत बन गए थे। वे भारत की सजीव प्रतिमूर्ति थे। वे स्वयं …

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भारतवर्ष का शाश्वत प्रतीक – स्वामी विवेकानन्द

“मेरा विश्वास आधुनिक पीढ़ी में है, युवा पीढ़ी में है, इन्हीं में से मेरे कार्यकर्ता निकलेंगे जो सिंह की तरह हर समस्या का समाधान कर देंगे।” – स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द ‘आयु में कम, किन्तु ज्ञान में असीम थे’। मात्र 39 वर्ष के अपने जीवन काल में स्वामीजी ने विश्वभर …

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छत्तीसगढ़ी लोक में गणित

गणित से मानव का अत्यन्त निकट संबंध है। वह गणित के बिना एक पग भी चल नहीं सकता। पल-पल में उसे गणित का सहारा लेना पड़ता है। साँसों का चलना, हृदय का धड़कना, नाड़ी की गति, ये सब नियत हैं और इसमें गणित भी है। यदि मानव की शारीरिक क्रियाओं …

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महानदी उद्गम एवं कर्णेश्वर महादेव मंदिर

पुरातात्विक खजाने से समृद्ध छत्तीसगढ में हम जिस स्थान पर जाते हैं, वहां कुछ न कुछ पुरातात्विक सामग्री प्राप्त होती है तथा प्राचीन विरासत के एक नए अध्याय से परिचय होता है। रायपुर से धमतरी होते हुए 140 किलो मीटर पर नगरी-सिहावा है, यहां रामायण कालीन सप्त ॠषियों के प्रसिद्ध …

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लखनपुर में लाख पोखरा : तालाबों की नगरी

आदि मानव के बसेरे हमको नदी-नालों के किनारे ही प्राप्त होते हैं, जिन्हें नदी घाटी सभ्यता का नाम दिया गया है। नदी नालों के समीप बसेरा होने का एकमात्र कारण जल की उपलब्धता है, किसी भी प्राणी के प्राणों के संचालन के लिए जल अत्यावश्यक तत्व है। सभ्यता के विकास …

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