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Monthly Archives: September 2020

दक्षिण कोसल के शिल्प एवं शिल्पकार : विश्वकर्मा पूजा विशेष

शिल्पकारों ने कलचुरियों के यहाँ भी निर्माण कार्य किया, उनकी उपस्थिति तत्कालीन अभिलेखों में दिखाई देती है। द्वितीय पृथ्वीदेव के रतनपुर में प्राप्त शिलालेख संवत 915 में उत्कीर्ण है ” यह मनोज्ञा और खूब रस वाली प्रशस्ति रुचिर अक्षरों में धनपति नामक कृती और शिल्पज्ञ ईश्वर ने उत्कीर्ण की। उपरोक्त …

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सरगुजा अंचल में भगवान श्री राम का धनुष बाण

सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखण्ड के अन्तर्गत हरिहरपुर ग्राम पंचायत का आश्रित ग्राम रामेश्वरनगर है। ग्रामीणों की मान्यतानुसार इस गांव की पहाड़ी पर राम मंदिर में रखा तीर-धनुष भगवान श्री राम का है। बताया जाता है कि यही धनुष परशुराम ने भगवान श्री राम को दिया था। भारत के ह्दय …

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हिन्दी है जन-मन की भाषा

(14 सितम्बर, हिन्दी दिवस पर विशेष) प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हम “हिन्दी दिवस” मनाते हैं, भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राष्ट्रभाषा होगी। हालांकि इसे 1950 को देश के संविधान द्वारा …

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वेब संगोष्ठी के अंतिम दिवस की रिपोर्ट

षष्टम सत्र : जनजाति कला एवं संस्कृति में राम कथा तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के अंतिम दिवस दिनाँक 31 /8/ 2020 दिन सोमवार को सुबह 10:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक तीसरे दिन के पहले सत्र और कुल वेबीनार छठवें अकादमिक सत्र का प्रारंभ हुआ। इस सत्र का …

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वेब संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के सभी सत्रों की रिपोर्ट

दिनांक 30 अगस्त 2020 तृतीय से पंचम सत्र तृतीय सत्र : लोक परंपरा एवं लोक साहित्य में राम कथा अंतर्रष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन “लोक परंपरा एवं लोक साहित्य में राम कथा” पर दिनाँक 30/8/2020 को सुबह 11:00 से 12:30 के मध्य तृतीय अकादमिक सत्र का प्रारंभ किया गया। जिस …

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तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम एवं द्वितीय सत्र की रिपोर्टिंग

प्रथम अकादमिक सत्र : राम वनगमन मार्ग का भौगौलिक क्षेत्र तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनाँक 29-31 अगस्त, 2020के मध्य हुआ। इस वेबीनार का विषय छत्तीसगढ़ में (दक्षिण कोसल में) रामकथा की व्याप्ति एवं प्रभाव रहा है। लोक साहित्य में छत्तीसगढ़ की संस्कृति राम की भूमि के रूप में …

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बस्तर के जनजातीय समाज में पितृ पूजन

बस्तर संभाग में जनजाति बाहुल्य गांव में और मिश्रित जनजाति के गांव में दो धाराएं स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। एक धारा देव संस्कृति को मानने वाली होती है और दूसरी धारा देव संस्कृति के साथ वैदिक संस्कृति को भी अपने कार्य व्यवहार में समाहित कर लेती है। …

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पितर पूजन का पर्व : पितृ पक्ष

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की कोई तिथि। अभी सूर्योदय में कुछ पल शेष है। छत्तीसगढ़ के एक गाँव का घर। गृहलक्ष्मी रसोईघर के सामने के स्थल को गोबर से लीपती है। उस पर चावल के आटे से चौक पूरती है, पुष्पों का आसन बिछाती है। पुत्र बाल-सुलभ जिज्ञासा से …

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दक्षिण कोसल में रामकथा की व्याप्ति एवं प्रभाव : उद्घाटन सत्र रिपोर्ट

ग्लोबल इनसायक्लोपीडिया ऑफ़ रामायण को तैयार करने के दृष्टिकोण से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेब शोध संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 29 अगस्त से 31 अगस्त 2020 तक किया गया। जिसका आयोजन गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़, अयोध्या शोध संस्थान अयोध्या उत्तर प्रदेश एवं सेंटर फॉर स्टडीज एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट रायपुर …

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