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ॠषि परम्परा

चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर : कबीर जयंती विशेष

कबीर पंथ के चौदहवे आचार्य पंथश्री गृन्धमुनिनाम साहब ने अपने ग्रंथ ‘सद्गुरु कबीर ज्ञान पयोनिधि’ की प्रस्तावना में लिखा है,- “संसार के लोग राख के ढेर पर ही पैर रखकर चलते हैं- जलती आग पर नहीं। किन्तु जो इसके ठीक विपरीत होते हैं, आग पर चलकर अग्नि परीक्षा देते हैं …

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प्राचीन भारतीय योग विज्ञान सर्वकाल में उपयोगी

युञ्ज्यते असौ योग:, योग शब्द संस्कृत के युञ्ज धातु से बना है। जिसका अर्थ है जुड़ना, मिलना या एकजुट होना। योग, विश्व को प्राचीन भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अनुपम देन है। योग द्वारा मनुष्य अपने शरीर एवं मन-मस्तिष्क को आत्मबल प्रदान कर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाता है। योग …

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कहत कबीर सुनो भाई साधो…

कबीर पंथ के चौदहवे आचार्य पंथश्री गृन्धमुनिनाम साहब ने अपने ग्रंथ ‘सद्गुरु कबीर ज्ञान पयोनिधि’ की प्रस्तावना में लिखा है,- “संसार के लोग राख के ढेर पर ही पैर रखकर चलते हैं- जलती आग पर नहीं। किन्तु जो इसके ठीक विपरीत होते हैं, आग पर चलकर अग्नि परीक्षा देते हैं– …

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हिंदू धर्म उद्धारक शाक्यवंशी गौतम बुद्ध

भारतीय धर्म दर्शन तो सनातन है, अगर ऋग्वेद को भारतीय सभ्यता और धर्म का आधार मानें तो कम से कम 10,000 वर्ष से देश के सामाजिक, सांस्कृतिक तत्वों की निरंतरता बनी हुई है। किसी देश में रहने वाले लोगों की पहचान का आधार उनकी भाषा है जैसे फ्रांस के लोग …

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छत्तीसगढ़ के लोकगीतों का सामाजिक संदर्भ

लोक गीत लोक जीवन के अन्तर्मन की अतल गहराइयों से उपजी भावानुभूति है। इसलिए लोकगीतों में लोक समाज का क्रिया-व्यापार, जय-पराजय, हर्ष-विषाद उत्थान-पतन, सुख-दुख सब समाहित रहता है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है कि “ये गीत प्रकृति के उद्गम और आर्येत्तर के वेद है।” उक्त कथन लोक गीत की …

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छेरिक छेरा छेर बरकतीन छेरछेरा : लोक पर्व छेरछेरा पुन्नी

जीवन में दान का बड़ा महत्व है। चाहे विद्या दान हो या अन्न दान, धनराशि दान हो या पशु दान स्वर्ण या रजत दान। चारों युगों में दान की महिमा का गान हुआ है। दान दाता की शक्ति पर यह निर्भर करता है। दान के संबंध में ये उक्तियाँ लोक …

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वाल्मीकि आश्रम तुरतुरिया की मान्यता एवं प्रतिमाएं

प्राचीन दंडकवन ॠषि मुनियों की तप स्थली रहा है, रामायण में दण्डकारण्य के बहुत सारे ॠषि मुनियों का जिक्र आता है। दंडकारण्य की तत्कालीन भौगौलिक स्थिति के विषय में विद्वानों की भिन्न भिन्न राय है, परन्तु यह तो तय है कि प्राचीन दक्षिण कोसल दंडकारण्य का ही हिस्सा रहा है। …

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हे भारत ! क्या तुम्हें याद है ?

स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रध्यान 25, 26 तथा 27 दिसंबर, 1892 आज 25 दिसंबर को दुनियाभर में “क्रिसमस” पर्व की धूम है। भारत में भी जगह-जगह क्रिसमस की शुभकामनाओंवाले पोस्टर्स, बैनर, ग्रीटिंग्स का माहौल है। पर 25 दिसंबर, हम भारतीयों के लिए क्या महत्व रखता है? इस बात को समझना होगा। …

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नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार : गुरु नानक जयंती विशेष

गुरु नानक देव जी का जन्मदिन प्रति वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। गुरु नानक देव सिख धर्म के प्रथम गुरु हैं। सिख धर्म की स्थापना गुरु नानक देव ने ही की थी। गुरु नानक देव ने अपने पारिवारिक जीवन के सुख का ध्यान न करते …

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हरिहर मिलन का पर्व : बैकुंठ चतुर्दशी

सनातन धर्म मे बारह महीनों का अपना अलग अलग महत्त्व है लेकिन समस्त मासों में कार्तिक मास को अत्यधिक पुण्यप्रद माना गया है। इस माह मे स्नान, दान व दीपदान के अलावा समस्त प्रमुख तीज त्योहार होते है। इस कार्तिक मास में बैकुंठ चतुर्दशी का विशेष महत्व है। इस दिन …

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