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Tag Archives: लोक देवियाँ

जटियाई माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ़ अंचल में अनेक ग्राम्य देवी-देवताओं की उपासना की जाती है, इसके साथ ही यहाँ शाक्त उपासना की सुदृढ़ परम्परा दिखाई देती है। मातृशक्ति के उपासक धान की कोठी छत्तीसगढ़ का एक छोटा सा विकास खंड मुख्यालय है छुरा, जो गरियाबंद जिले में अवस्थित है। छुरा से लगभग 9 किमी …

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चम्पई माता एवं कलचुरीकालीन मोंहदीगढ़

इस प्रदेश के छत्तीसगढ़ नामकरण के पीछे कई मत हैं, कुछ विद्वान चेदी शासकों पर चेदिसगढ़ का अपभ्रंश बताते हैं तो कई विद्वानों का मत है कि मध्यकाल में कलचुरीकालीन छत्तीस गढ़ों को लेकर छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ। ये गढ़ कलचुरी शासन काल में प्रशासन की महत्वपूर्ण इकाई थे। कालांतर …

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घटवारिन दाई अंगार मोती : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

जनश्रुतियाँ भी इतिहास एवं संस्कृति जानने का सशक्त माध्यम हैं, ऐसी ही एक जनश्रुति लगभग चार सौ वर्ष पुरानी हैं। माता अंगार मोती बड़ी फुरमानुख देवी है। न जानें दिव्य देवी शक्तियाँ कब किस पर अपार स्नेह की बारिश कर दे, रोग, शोक, भय रहित कर दे, सुख शांति और …

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बिलाई माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

बिलाई माता के नाम से सुविख्यात विन्ध्यवासिनी देवी अर्थात महिषासुर मर्दिनी ही धरमतराई (धमतरी) की उपास्य देवी है प्रस्तर प्रतिमा के रूप में जिसका प्रादुर्भाव हैहयवंशी राज्य के अधीनस्थ किसी गांगवंशीय मांडलिक के शासनकाल का बतलाया जाता है। तब से आज तक यह मंदिर इस क्षेत्र की जनता के लिए …

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निरई माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ़ के वनांचल में शैव, वैष्णव, शाक्त पंथों के पूजा स्थल प्रत्येक गांव डोंगर में मिल जाएंगे, परन्तु शाक्त परम्परा से नवरात्रि यहाँ जोर शोर से मनाई जाती है। बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा भी शाक्त परम्परा को समर्पित है, यहाँ मावली परघाव होता है और देवी दंतेश्वरी की रथयात्रा दशहरे …

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टेंगनाही माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

सनातन काल से भारत राजे-रजवाड़ों की भूमि रही है, राजा भिन्न-भिन्न धर्मों का पालन करते थे तथा उनसे संबंधित देवी-देवताओं के उपासक हुआ करते थे। देश आजाद हुआ, लोकतंत्र की स्थापना हुई, परन्तु देवी-देवताओं की मान्यता आज भी उतनी बनी हुई है, जितनी पूर्व में थी। कुल देवी-देवता के रुप …

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