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Tag Archives: रेखा पाण्डेय

दक्षिण कोसल के रामायण कालीन ऋषि मुनि एवं उनके आश्रम : वेबीनार रिपोर्ट

दक्षिण कोसल के रामायण कालीन ऋषि मुनि एवं उनके आश्रम विषय पर ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण उत्तर प्रदेश और सेंटर फॉर स्टडी एंड हॉलिस्टिक डेवलपमेंट छत्तीसगढ़ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार श्रृंखला की 9 वीं कड़ी का आयोजन दिनाँक 9/8/ 2020, रविवार, शाम 7:00 से 8:30 के मध्य किया गया। इस वेबीनार …

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रामचरित मानस में वर्णित ॠषि मुनि एवं उनके आश्रम

भारत सदैव से ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा, उनके द्वारा विभिन्न ग्रंथों की रचना की गई। उन्होंने ही हिमालय के प्रथम अक्षर से हि एवं इंदु को मिला कर भारत को हिंदुस्तान नाम दिया। हिन्दू धर्म ग्रंथों के दो भाग श्रुति और स्मृति हैं। श्रुति सबसे बड़ा ग्रन्थ है …

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देवालयों में संगीत द्वारा ईश्वरीय आराधना की परंपरा

संगीत मनुष्य की आत्मा में निवास करता है, जब भी कहीं सुगम संगीत बजता हुआ सुनाई दे जाए मन तरंगित हो उठता है। प्राचीन भारतीय संस्कृति में संगीत का प्रमुख स्थान है। धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष नामक पुरुषार्थ चतुष्टय में इसे मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग माना जाता है। …

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भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोकसंगीत

संगीत नामक शब्द से ही मन में स्वर लहरियाँ उत्पन्न होने लगती हैं, मन और आत्मा दोनो तरंगित हो उठते हैं, देह नृत्य करने लगती है, चेतना अपने उच्चतम स्तर पर उर्ध्वगामी हो जाती है। ऐसा ही है आनंद संगीत और स्वर का। यह एक ऐसी विधा है जिसने मानव …

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बच्चों के मानसिक विकास के लिए मातृभाषा उतनी ही आवश्यक है जितना शारीरिक विकास के लिए माँ का दूध : महात्मा गांधी

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस विशेष आलेख मातृभाषा का रिश्ता जन्मदायिनी माता के साथ स्थूल रूप से जोड़ा जाता है, परंतु मातृभाषा से अभिप्राय उस परिवेश, स्थान,समूह में बोली जाने वाली भाषा से है जिसमें रहकर मनुष्य अपने बाल्यकाल में दुनियां के संपर्क में आता है, अर्थात मातृभाषा ही शिशु को …

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ऐसी भक्ति करै रैदासा : माघ पूर्णिमा विशेष

एक समय था जिसे भारत में भक्ति का काल कहा जाता है तथा हिन्दी साहित्य में भी यह भक्ती का काल माना जाता है। हिंदी साहित्य का भक्तिकाल 1375 वि. से 1700 वि. तक माना जाता है। यह युग भक्तिकाल के नाम से प्रख्यात है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग …

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बरन-बरन तरु फुले उपवन वन : वसंतोत्सव विशेष

भारतवर्ष मे ऋतु परिवर्तन के साथ त्यौहार मनाने की परंम्परा है। ऋतुओं के विभाजन में बसंत ऋतु का विशेष महत्व है क्योंकि इस ॠतु का सौंदर्य अनुपम एवं छटा निराली होती है। शीत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ॠतु की आहट की धमक के बीच का काल वसंत काल होता …

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जानिए गुप्त नवरात्रि क्या है और क्यों मनाई जाती है।

शक्ति की उपासना प्राचीन काल से ही होते रही है। इसके प्रमाण हमें दक्षिण कोसल में मिलते है, यहाँ शाक्त सम्प्रदाय का भी खासा प्रभाव रहा है। सिरपुर से उत्खनन में प्राप्त चामुंडा की प्रतिमा इसका प्रमाण है। दक्षिण कोसल के अन्य स्थानों पर देवी पूजा के प्रमाण प्राचीन काल …

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चंद्र कलाओं पर आधारित हिन्दू त्यौहार : छेरछेरा पुन्नी विशेष

सूर्य और ग्रह मंडल से मिलकर सौरमण्डल बना है। जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य को ‘सर्वति साक्षी भूतम’ (सब कुछ देखने वाला) कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य भगवान हर क्रियाकलाप के साक्षी हैं। भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह हैं- सूर्य, चंद्र, बुद्ध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, …

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जिनकी रचनाओं ने राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना जगाई : राष्ट्रकवि पुण्यतिथि

आज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि है। इनका जन्म 3 अगस्त 1886 को छोटे से कस्बे चिरगांव में हुआ था जो झांसी से 35 किमी की दूरी पर है। राष्ट्रजीवन की चेतना को मंत्र स्वर देने वाले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को साहित्य जगत में दद्दा के नाम से जाना जाता …

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