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Tag Archives: घनश्याम नाग

बस्तर की प्राचीन राजधानी बड़ेडोंगर

बस्तर का प्रवेश द्वार केशकाल आपको तब मिलेगा जब आप बारा भाँवर (बारह मोड़ों) पर चक्कर काटते हुए पहाड़ पर चढेंगे। केशकाल क्षेत्र में अनेक प्राकृतिक झरने, आदि-मानव द्वारा निर्मित शैलचि़त्र, पत्थर से बने छैनी आदि प्रस्तर युगीन पुरावशेष यत्र-तत्र बिखरे पड़े हैं। साल वृक्षों का घना जंगल, ऊँची- ऊँची …

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प्रकृति का आभूषण कटुमकसा घुमर : बस्तर

पहाड़ियाँ, घाटियाँ, जंगल, पठार, नदियाँ, झरने आदि न जाने कितने प्रकार के गहनों से सजाकर प्रकृति ने बस्तर को खूबसूरत बना दिया है। बस्तर के इन्हीं आभूषणों में से एक है, कटुमकसा घुमर। कुएमारी (पठार) से बहता हुआ एक नाला घोड़ाझर गाँव की सीमा में आता है। यहाँ एक जलप्रपात …

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क्या आप जानते हैं महिषासुर का वध कहाँ हुआ था?

महिषासुर राक्षस का उल्लेख देवी भागवत में हुआ है, जिसका संहार देवी दुर्गा ने किया था। वह पहाड़ी कन्दराओं एवं बीहड़ जंगलों में विचरण करता था । देवी भागवत में उपर्युक्त सभी कथाओं का वर्णन तो है, लेकिन महिषासुर का उद्भव कहाँ हुआ था? तथा उसका मर्दन किस स्थान पर …

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बस्तर का हल्बा विद्रोह और ताड़ झोंकनी

काकतीय (चालुक्य) वंश के राजा दलपत देव (1716-1775) की दलपत देव की पटरानी रामकुँअर चँदेलिन थी एवं छ: अन्य रानियाँ थी। पटरानी के पुत्र का नाम अजमेर सिंह और दूसरी रानी के पुत्र का नाम दरियाव देव था। दरियाव देव उम्र में बड़ा था, इसलिए राजगद्दी पर अपना अधिकार जमा …

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बस्तर के भूमकाल विद्रोह के कारण एवं विद्रोह में गुण्डाधुर की भूमिका

सत्ता की निरंकुशता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने में बस्तर के आदिवासी कभी पीछे नहीं रहे। हल्बा (डोंगर) विद्रोह, भोपालपट्ट्नम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, सन् 1910 का विप्लव आदि इसके दस्तावेजी प्रमाण हैं। सन् 1910 का विप्लव ही बस्तर में भूमकाल विद्रोह के नाम से प्रचारित हुआ। भूमकाल का अर्थ …

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बावनमारी में लिंगो पेन (देव) का जन्म स्थल लिंग दरहा

         पर्वतीय उपत्यकाओं और सुरम्य वन प्रांतर में बसा सम्पूर्ण केशकाल क्षेत्र प्रकृति एवं पुरातत्व के अतुल वैभव से भरा पड़ा है । इस क्षेत्र में अनेक स्थानों पर प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष, पाषाणकालीन अवशेष, प्रतिमाओं एवं शैलचित्रों आदि की प्राप्ति हुई है, जो बाहरी दुनियाँ से अज्ञात है या …

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पौराणिक देवी-देवताओं की वनवासी पहचान : बस्तर

पुरातन काल से बस्तर एक समृद्ध राज्य रहा है, यहाँ नलवंश, गंगवंश, नागवंश एवं काकतीय वंश के शासकों ने राज किया है। इन राजवंशों की अनेक स्मृतियाँ (पुरावशेष) अंचल में बिखरे पड़ी हैं। ग्राम अड़ेंगा में नलयुगीन राजाओं के काल में प्रचलित 32 स्वर्ण मुद्राएं प्राप्त हुई थी। नलवंशी राजाओं …

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