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Tag Archives: स्वामी विवेकानंद

संसार को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी हैं, जिन्होंने हिमालय की कंदराओं में जाकर स्वयं के मोक्ष के प्रयास नहीं किये बल्कि भारत के उत्थान के लिए अपना जीवन खपा दिया। विश्व धर्म सम्मलेन के मंच से दुनिया को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने का सामर्थ्य स्वामी विवेकानंद में ही था, क्योंकि …

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गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का महान पर्व गुरु पूर्णिमा

“गुरु परम्परा से निरन्तर जो शक्ति प्राप्त होते आयी है, उसी के साथ अपना संयोग स्थापित करना होगा, क्योंकि वैराग्य और तीव्र मुमुक्षुत्व रहने पर भी गुरु के बिना कुछ नहीं हो सकेगा। शिष्य को चाहिए कि वह अपने गुरु को परामर्शदाता, दार्शनिक, सुहृदय और पथप्रदर्शक के रूप में अंगीकार …

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स्वामी विवेकानंद एवं उनका भारत प्रेम : विशेष आलेख

भारत ही स्वामीजी का महानतम भाव था। …भारत ही उनके हृदय में धड़कता था, भारत ही उनकी धमनियों में प्रवाहित होता था, भारत ही उनका दिवा-स्वप्न था और भारत ही उनकी सनक थी। इतना ही नहीं, वे स्वयं भारत बन गए थे। वे भारत की सजीव प्रतिमूर्ति थे। वे स्वयं …

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भारतवर्ष का शाश्वत प्रतीक – स्वामी विवेकानन्द

“मेरा विश्वास आधुनिक पीढ़ी में है, युवा पीढ़ी में है, इन्हीं में से मेरे कार्यकर्ता निकलेंगे जो सिंह की तरह हर समस्या का समाधान कर देंगे।” – स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द ‘आयु में कम, किन्तु ज्ञान में असीम थे’। मात्र 39 वर्ष के अपने जीवन काल में स्वामीजी ने विश्वभर …

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हे भारत ! क्या तुम्हें याद है ?

स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रध्यान 25, 26 तथा 27 दिसंबर, 1892 आज 25 दिसंबर को दुनियाभर में “क्रिसमस” पर्व की धूम है। भारत में भी जगह-जगह क्रिसमस की शुभकामनाओंवाले पोस्टर्स, बैनर, ग्रीटिंग्स का माहौल है। पर 25 दिसंबर, हम भारतीयों के लिए क्या महत्व रखता है? इस बात को समझना होगा। …

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स्वामी विवेकानन्द का जीवन और जगत को उनकी देन

(12 जनवरी, स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर विशेष) स्वामी विवेकानन्द भारत ही नहीं अपितु विश्व के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से हैं। वे आध्यात्मिक चिंतक होने के साथ ही बहु आयामी विचारक, प्रभावशाली वक्ता, संवेदनशील समाज सुधारक, समाजसेवी और उत्कट राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने भारतीय अध्यात्म से ऊर्जित गुरु रामकृष्ण के चिंतन …

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स्वामीजी का वाङ्गमय पढ़कर मेरी देशभक्ति हजारों गुना बढ़ गई है : महात्मा गांधी

नवयुग के निर्माता स्वामी विवेकानन्दजी ने कहा था, “मैं भविष्य को नहीं देखता, न ही उसे जानने की चिन्ता करता हूं। किन्तु, एक दृश्य मैं अपने मन:चक्षुओं से स्पष्ट देख रहा हूं, यह प्राचीन मातृभूमि एक बार पुन: जाग गई है और अपने सिंहासन पर आसीन है – पहले से …

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