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इतिहास

इतिहास विभाग में वैदिक साहित्य में इतिहास, पौराणिक इतिहास, जनजातीय कथाओं में इतिहास, रामायण, महाभारत एवं जैन-बौद्ध ग्रंभों में इतिहास, भारतीय राजवंशो का इतिहास, विदेशी आक्रमणकारियों (मुगल एवं अंग्रेज) का इतिहास, स्वात्रंत्येतर इतिहास, बस्तर भूमकाल विद्रोह, नक्सल इतिहास, घुमक्कड़ परिव्राजक ॠषि मुनि तथा आदिम बसाहटों के इतिहास को स्थान दिया गया है।

जहाँ विराजी है मलयारिन माई : नवरात्रि विशेष

रायपुर से जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 पर विकास खंड मुख्यालय फरसगांव स्थित है। यहां से लगभग 16 कि. मी. दूर पश्चिम दिशा में पहाड़ियों से घिरा बड़ेडोंगर नामक गांव है, जहां पहले बस्तर की राजधानी हुआ करती थी। ग्राम बड़ेडोंगर के भैंसा दोंद डोंगरी ( महिषा द्वंद्व ) नामक …

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वन डोंगरी में विराजित गरजई माता : नवरात्रि विशेष

प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ अपनी शाक्त परम्परा के लिए विख्यात है, यहाँ अधिकांश देवियाँ डोंगरी में विराजित हैं। इस लिए देव स्थलों में मनमोहक नयनाभिराम प्राकृतिक सौंदर्य की भरमार है। यहां का लोक जीवन, गांव, नदी-नाले, जंगल और पहाड़ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। आस्थावान छत्तीसगढ़ के लोकमानस पर …

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कलचुरी शासकों की कुलदेवी महामाया माई रायपुर : नवरात्रि विशेष

भारत देश के हृदय स्‍थल में स्थित प्राचीन दक्षिण कोसल क्षेत्र जिसे अब छत्‍तीसगढ के नाम से जाना जाता है, इस छत्‍तीसगढ राज्‍य के हृदय स्‍थल में बसे तथा राज्‍य की राजधानी होने का गौरव प्राप्‍त रायपुर शहर वर्तमान ही नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही प्राप्त है । लोकमत …

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देवी का ऐसा स्थान जहाँ पद चिन्हों से जाना जाता है वार्षिक भविष्य

शिव और शक्ति से उद्भूत लिंगेश्वरी देवी (लिंगई माता) लिंग स्वरूपा जहां विराजमान हैं। लगभग दो फुट का प्रस्तर लिंग शिव स्वरूप लिए हुए है, जिसमें समाहित शक्ति लिंगेश्वरी देवी का सिंगार लिए हुए हैं। जहां शिव और शक्ति एकाकार हुए हैं यही अद्भुत रूप लौकिक जगत के लिए दर्शनीय …

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करेला भवानी माई : नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ की पावन धरा पर स्थित धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ से लगभग 14 कि0मी0 उत्तर दिशा की ओर जाने वाले सडक मार्ग पर, भण्डारपूर नामक ग्राम के समीप स्थित है ग्राम करेला, जिसे भंडारपुर करेला के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्राम खैरागढ तहसील व पोस्ट ढारा के अंतर्गत …

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केरापानी की रानी माई : नवरात्रि विशेष

आदिशक्ति जगदंबा भवानी माता भिन्न-भिन्न नाम रूपों में विभिन्न स्थानों पर विराजित हैं। छत्तीसगढ़ में माता की विशेष कृपा है। यहां माता रानी बमलाई, चंद्रहासिनी, महामाया, बिलाई माता, मावली दाई के रूप में भक्तों की पीड़ा हरती है। ऐसा ही करूणामयी एक रूप रानी माता के नाम से विख्यात है। …

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कुँवर अछरिया की लोक गाथा एवं पुरातात्विक महत्व

लोक साहित्य वाचिका परम्परा के माध्यम से एक कंठ से दूसरे कंठ में रच-बस कर अपने स्वरूप को विस्तार देता है। फिर व्यापकरूप में लोक को प्रभावित कर लोक का हो जाता है। यही लोक साहित्य कहलाता है। लोक साहित्य में लोक कथा, लोकगीत, लोकगाथा, लोकनाट्य, लोकोक्तियाँ और लोक पहेलियाँ, …

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सरगुजा अंचल की जनजातियों में होली का त्यौहार

होली का पर्व हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है। यह त्योहार बसंत ऋतु में मनाया जाता है, इसलिए इसे बसंतोत्सव भी कहा जाता है। होली का त्यौहार हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। इसे फगुआ, फागुन, धूलेंडी, छारंडी और दोल के …

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देश विदेश के डाक टिकटों में राम

रामायण महाकाव्य केवल भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में पसन्द की जाती है, सूरीनाम, फिजी, गुयाना, मॉरीशस, वेस्टइंडीज आदि देशों के प्रवासियों ने रामायण को अपने हृदय में बसाया है। बहुत से एशियाई देशों में रामायण को अपनी भाषा में अनुवादित कर अपने धार्मिक ग्रन्थ के रूप में …

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खरदूषण की नगरी खरोद का पुरातत्वीय वैभव

छत्तीसगढ़ प्रदेश के अन्तर्गत जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से शिवरीनारायण सड़क मार्ग पर स्थित ग्राम खरोद लगभग 35 कि.मी. दूरी पर स्थित है। बिलासपुर जिला मुख्यालय से खरोद की दूरी लगभग 62 कि.मी. तथा रायपुर से वाया कसडोल शिवरीनारायण होकर खरोद लगभग 140 कि.मी. दूरी पर है। यहां पर पहुंचने के …

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