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Tag Archives: सप्ताह की कविता

सबके भीतर में हैं बैठे राम

चाहते हो सुख शांति अगर, अपने घर परिवार में। रोक लगानी होगी सबको, भौतिकता की रफ्तार में।। मुँह फैलाये द्वार खड़ी है, सुरसा बनकर भौतिकवाद। इसी वजह से हो रही है, संस्कृति भी अपनी बर्बाद। रावण जैसे यहाँ चूर सभी हैं, कुलनाशक अहंकार में।।1।। पर्यावरण हो रहा प्रदूषित, अपने ही …

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पकड़ लो हाथ रघुनन्दन

पकड़ लो हाथ रघुनन्दन, ये दिल फिर टूट ना जाए।प्रभु अब दे दो तुम दर्शन, कही सब छूट ना जाए।। समझ आती नही दुनिया, कठिन जीवन का ये आकार।यहां पल पल में है धोखा, कठिन तेरा है ये संसार।दिला दो ,शीश में आशीष, चरण रज छूट ना जाये।पकड़ लो हाथ …

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हम हिंदू, हिंदुत्व हमारा

हम हिंदू, हिंदुत्व हमारा, है जानो आदत न्यारी।वीर, अहिंसक, धर्मव्रती हम, करुण-हृदय, सेवाधारी। मर्यादा में रहना हमको, रघुनंदन ने सिखलाया।जिसने रक्षा हेतु आन की, रावण को मार गिराया ।किया सफाया निशाचरों का, शांति धरा में लाने को,जूठे फल खा प्रेम निभाया, विप्र, धेनु, सुर हितकारी।हम हिंदू हिंदुत्व हमारा, है जानो …

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गद्दारी ही उनकी चौखट

इतनी नफ़रत और कड़वाहट तौबा-तौबा क्यों जीवन से इतनी खटपट तौबा-तौबा दूजे को गाली देना ही दिनचर्या है हरकत कुछ बंदों की अटपट तौबा-तौबा जिस थाली में खाना उसमें छेद करेंगे कुछ बंदे होते हैं संकट तौबा-तौबा किसी भी खूँटे से बंधना हमसे न होगा भैया तुम ही पालो झंझट …

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संघर्षों का वरण करो

देशभक्त हिंदुस्तानी हो, वीरों का अनुसरण करो।सहो नहीं अत्याचारों को, संघर्षों का वरण करो।। वतन-चमन को किया प्रदूषित,जहर उगलते व्यालों ने।गाली की हर सीमा लाँघी,इस युग के शिशुपालों ने।शांत चित्त रह चक्र चलाने, मोहन का अनुसरण करो।संकल्पों की भुजा उठाकर, संघर्षों का वरण करो।। हृदय-मंजूषा गर्व भरा हो,नस-नस में धधके …

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हे मातृभूमे तुमको नमन

हे मातृभूमे! कर रहे, तव अर्चना तुमको नमन।प्रभु कर कमल की हो मनोहर सर्जना तुमको नमन।। अमरावती के देवगण,ले जन्म आते हैं जहाँ।रघुनाथ औ यदुनाथ भी,लीला रचाते हैं यहाँ। वो जीभ गल जाये करे जो भर्त्सना तुमको नमन।हे मातृभूमे! कर रहे तव अर्चना तुमको नमन।। सब ज्ञान औ विज्ञान की,उदगम …

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मुक्त मुल्क हो गद्दारों से

राजनीति के गलियारे में, निंदा की लगती झड़ियाँ।आतंकी पोषित हैं किनके, जुड़ी हुई किनसे कड़ियाँ।।बंद करो घड़ियाली आँसू, सत्ता का लालच छोड़ो।बिखर रही है व्यर्थं यहाँ पर, गुँथी एकता की लड़ियाँ।। वह जुनून अब रहा नहीं क्यों, देश प्रेम का भाव नहीं।पनप रही कट्टरता केवल, लिए साथ अलगाव वहीं।।स्वर्ग धरा …

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चरैवेति है मंत्र हमारा

जो बढ़ते जाते हैं प्रतिदिन, वे चरण हमारे हैं। श्रम से हमने इस जगती के भाग सँवारे हैं।। चरैवेति है मंत्र हमारा, यही है सुख का धाम।सतकर्मों का लक्ष्य हमारा, रखे हमें अविराम। मत समझो तुम राख हमें, जलते अंगारे हैं। जो प्रतिदिन बढ़ते जाते,वे चरण हमारे हैं।श्रम से हमने …

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उठो-उठो ऐ सोने वालों, तुम्हें जगाने आये हैं।

राष्ट जागरण धर्म हमारा, वही निभाने आये हैं।उठो-उठो ऐ सोने वालों, तुम्हें जगाने आये हैं। दुश्मन ताक रहा है, छोर पार वो बैठा है।ललचाया सा उसका मुँह है, देखो कैसे ऐंठा है।नीयत उसकी ठीक नही है, तुम्हें बताने आये हैं।1। राष्ट जागरण धर्म हमारा, वही निभाने आये हैं।उठो-उठो ऐ सोने …

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भगवा ध्वज लहराए : सप्ताह की कविता

भगवा ध्वज लहराए, भगवा ध्वज फहराए।सप्त सिंधु की लहर-लहर में, नव ऊर्जा भर जाए। घर-घर के आंगन में गूँजे,उत्सव की किलकारें।द्वार-द्वार में फूल बिछे हों,नाचें झूम बहारें। हर्षित मन का कोना कोना, मंद मंद मुस्काए।भगवा ध्वज लहराए, भगवा ध्वज फहराए। अंबर-धरती, दसों दिशा में,वेद मंत्र का गुंजन हो।अमर पुत्र उस …

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