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Tag Archives: सप्ताह की कविता

आओ हे घनश्याम

प्राण-पखेरु उड़ जाने पर,क्या फिर दवा पिलाओगे ?तोड़ प्रेम के कोमल धागे,फिर क्या गाँठ लगाओगे ? आओ हे घनश्याम हमारे,पल-पल युग सा लगता है।तुम्ही बताओ अपनों को भी,कोई यूँ ही ठगता है। शरणागत हम टेर लगाते,फिर भी क्या ठुकराओगे ?प्राण-पखेरु उड़ जाने पर,क्या फिर दवा पिलाओगे ? प्यासी धरती ,प्यासा …

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होली के रंग, प्रीत के संग

(१)तन के तार का मूल्य नही, मन का तार बस भीगे जबपूर्ण चंद्र हो रस तरंग,बस प्रेम भाव ही जीते जब। धन धान्य धरा और धूम धाम, धरती करती है ठिठोली जब।मुरली की तान, करुणा निधान,प्रिय मोर मुकुट है होली तब। (२)बृजराज कृष्ण, बृजराज काव्य, बृजराज धरा, यमुना तरंग।मोहन के …

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भगवा ध्वज लहराया है

स्वाभिमान जागा लोगों का, भगवा ध्वज लहराया है।रामराज्य की आहट लेकर, नया सवेरा आया है । जाति- पाँति के बंधन टूटे, टूट गई मन की जड़ता।ज्वार उठा भाईचारे का, धुल गई कड़वी कटूता।निर्भय होकर नर- नारी सब, अपने दायित्व निभाते उत्पीड़न करने वालों का, नहीं कहीं भय-साया है।स्वाभिमान जागा लोगों …

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एक अकेला पार्थ खडा है, भारत वर्ष बचाने को।

एक अकेला पार्थ खडा है, भारत वर्ष बचाने को। सभी विपक्षी साथ खड़े हैं, केवल उसे हराने को।। भ्रष्ट दुशासन सूर्पनखा ने, माया जाल बिछाया है। भ्रष्टाचारी जितने कुनबे, सबने हाथ मिलाया है।। समर भयंकर होने वाला, आज दिखाई देता है। राष्ट्र धर्म का क्रंदन चारों ओर सुनाई देता है।। …

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बस राम लिखूं

रघुकुल गौरव, अवध सिया के, दशरथ कोशला राम लिखूं। या रावण हंता, दुष्ट दलंता, लंका विजई सम्मान लिखूं। है अनुज दुलारे भरत भाल, जिन पर मैं अपना स्वास लिखू।है अनुज दुलारे लखन लाल, जिन पर मैं अपना विश्वास लिखूं। ये सम्मानित राघव रघु कुल, ना काम क्रोध मद लोभ लिखूं।केवट …

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जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम

उठो पुनः हुंकार भरो करना है प्रभु का काम, जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम॥ सदियों के संघर्षों बलिदानों से तृषा छँटी है, अरुणाई की आहट है पौ देखो वहाँ फ़टी है। भारत माता पुनः हमारा करती है आह्वान। जब तक समर शेष है साथी मत लेना …

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सबके भीतर में हैं बैठे राम

चाहते हो सुख शांति अगर, अपने घर परिवार में। रोक लगानी होगी सबको, भौतिकता की रफ्तार में।। मुँह फैलाये द्वार खड़ी है, सुरसा बनकर भौतिकवाद। इसी वजह से हो रही है, संस्कृति भी अपनी बर्बाद। रावण जैसे यहाँ चूर सभी हैं, कुलनाशक अहंकार में।।1।। पर्यावरण हो रहा प्रदूषित, अपने ही …

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पकड़ लो हाथ रघुनन्दन

पकड़ लो हाथ रघुनन्दन, ये दिल फिर टूट ना जाए।प्रभु अब दे दो तुम दर्शन, कही सब छूट ना जाए।। समझ आती नही दुनिया, कठिन जीवन का ये आकार।यहां पल पल में है धोखा, कठिन तेरा है ये संसार।दिला दो ,शीश में आशीष, चरण रज छूट ना जाये।पकड़ लो हाथ …

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हम हिंदू, हिंदुत्व हमारा

हम हिंदू, हिंदुत्व हमारा, है जानो आदत न्यारी।वीर, अहिंसक, धर्मव्रती हम, करुण-हृदय, सेवाधारी। मर्यादा में रहना हमको, रघुनंदन ने सिखलाया।जिसने रक्षा हेतु आन की, रावण को मार गिराया ।किया सफाया निशाचरों का, शांति धरा में लाने को,जूठे फल खा प्रेम निभाया, विप्र, धेनु, सुर हितकारी।हम हिंदू हिंदुत्व हमारा, है जानो …

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गद्दारी ही उनकी चौखट

इतनी नफ़रत और कड़वाहट तौबा-तौबा क्यों जीवन से इतनी खटपट तौबा-तौबा दूजे को गाली देना ही दिनचर्या है हरकत कुछ बंदों की अटपट तौबा-तौबा जिस थाली में खाना उसमें छेद करेंगे कुछ बंदे होते हैं संकट तौबा-तौबा किसी भी खूँटे से बंधना हमसे न होगा भैया तुम ही पालो झंझट …

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