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Tag Archives: नौ देवियाँ

वन डोंगरी में विराजित गरजई माता : नवरात्रि विशेष

प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ अपनी शाक्त परम्परा के लिए विख्यात है, यहाँ अधिकांश देवियाँ डोंगरी में विराजित हैं। इस लिए देव स्थलों में मनमोहक नयनाभिराम प्राकृतिक सौंदर्य की भरमार है। यहां का लोक जीवन, गांव, नदी-नाले, जंगल और पहाड़ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। आस्थावान छत्तीसगढ़ के लोकमानस पर …

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कलचुरी शासकों की कुलदेवी महामाया माई रायपुर : नवरात्रि विशेष

भारत देश के हृदय स्‍थल में स्थित प्राचीन दक्षिण कोसल क्षेत्र जिसे अब छत्‍तीसगढ के नाम से जाना जाता है, इस छत्‍तीसगढ राज्‍य के हृदय स्‍थल में बसे तथा राज्‍य की राजधानी होने का गौरव प्राप्‍त रायपुर शहर वर्तमान ही नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही प्राप्त है । लोकमत …

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करेला भवानी माई : नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ की पावन धरा पर स्थित धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ से लगभग 14 कि0मी0 उत्तर दिशा की ओर जाने वाले सडक मार्ग पर, भण्डारपूर नामक ग्राम के समीप स्थित है ग्राम करेला, जिसे भंडारपुर करेला के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्राम खैरागढ तहसील व पोस्ट ढारा के अंतर्गत …

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केरापानी की रानी माई : नवरात्रि विशेष

आदिशक्ति जगदंबा भवानी माता भिन्न-भिन्न नाम रूपों में विभिन्न स्थानों पर विराजित हैं। छत्तीसगढ़ में माता की विशेष कृपा है। यहां माता रानी बमलाई, चंद्रहासिनी, महामाया, बिलाई माता, मावली दाई के रूप में भक्तों की पीड़ा हरती है। ऐसा ही करूणामयी एक रूप रानी माता के नाम से विख्यात है। …

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शक्ति का उपासना स्थल खल्लारी माता

छत्तीसगढ़ अंचल की शाक्त परम्परा में शक्ति के कई रुप हैं, रजवाड़ों एवं गाँवों में शक्ति की उपासना भिन्न भिन्न रुपों में की जाती है। ऐसी ही एक शक्ति हैं खल्लारी माता। खल्लारी में माता जी की पूजा अर्चना तो प्रतिदिन होती ही है चैत और कुआंर कि नवरात्रि में …

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जशपुर का परम्परागत दशहरा

भारत एवं छत्तीसगढ़ राज्य के कई रियासतकालीन दशहरा उत्सव प्रसिद्ध हैं, इन्ही में एक छत्तीसगढ़ के जशपुर का ऐतिहासिक एवं रियासतकालीन दशहरा महोत्सव भी आता है। अन्य क्षेत्रों की भांति शारदीय नवरात्रि के पहले ही दिन से यहां का ऐतिहासिक दशहरा उत्सव प्रारंभ होता है। जशपुर राजपरिवार यहाँ एक महत्वपूर्ण …

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बस्तर का पचहत्तर दिनों तक चलने वाला प्रसिद्ध दशहरा

बस्तर अंचल में आयोजित होने वाले पारंपरिक पर्वों में बस्तर दशहरा सर्वश्रेष्ठ पर्व है। इसका संबंध सीधे महिषासुरमर्दिनी माँ दुर्गा से जुड़ा है। पौराणिक वर्णन के अनुसार अश्विन शुक्ल दशमी को माँ दुर्गा ने अत्याचारी महिषासुर को शिरोच्छेदन किया था। इसी कारण इस तिथि को विजयादशमी उत्सव के रूप में …

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डिडिनेश्वरी माई मल्हार : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे प्राचीनतम नगर मल्हार, जिला मुख्यालय बिलासपुर से दक्षिण-पश्चिम में बिलासपुर से शिवरीनारायण मार्ग पर बिलासपुर से 17 किलोमीटर दूर मस्तूरी है, वहाँ से 14 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में जोंधरा मार्ग पर मल्हार नामक नगर है। यह नगर पंचायत 21• 55′ उत्तरी अक्षांश और 82• 22′ …

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जटियाई माता : छत्तीसगढ़ नवरात्रि विशेष

छत्तीसगढ़ अंचल में अनेक ग्राम्य देवी-देवताओं की उपासना की जाती है, इसके साथ ही यहाँ शाक्त उपासना की सुदृढ़ परम्परा दिखाई देती है। मातृशक्ति के उपासक धान की कोठी छत्तीसगढ़ का एक छोटा सा विकास खंड मुख्यालय है छुरा, जो गरियाबंद जिले में अवस्थित है। छुरा से लगभग 9 किमी …

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पहाड़ी कोरवाओं की आराध्या माता खुड़िया रानी एवं दीवान हर्राडीपा का दशहरा

दक्षिण कोसल में शाक्त परम्परा प्राचीन काल से ही विद्यमान है, पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त सप्त मातृकाओं, योगिनियों तथा महिषासुर मर्दनी की प्रतिमाएं इसका पुष्ट प्रमाण हैं। अगर हम सरगुजा से लेकर बस्तर तक दृष्टिपात करते हैं तो हमें प्रत्येक स्थान पर देवी सत्ता की दिखाई देती है। इन्हीं में …

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