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Tag Archives: तीज त्यौहार

काया कल्प करने वाली औषधि : आंवला

मनुष्य का स्वास्थ्य प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है, प्रकृति हमें विभिन्न चमत्कारिक औषधियाँ प्रदान करती हैं तथा व्याधि होने पर मनुष्य औषधियों का सेवन कर स्वास्थ्य को प्राप्त करता है। ऐसी ही एक महाऔषधि है आंवला, आमलकी। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में उसी प्रकार श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है …

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तीजा तिहार का ऐतिहासिक-सामाजिक अनुशीलन

लोक परम्पराएं गौरवशाली इतिहास की पावन स्मृतियाँ होती हैं, जो काल सापेक्ष भी हैं। वर्तमान छत्तीसगढ़ विविधताओं से परिपूर्ण भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का संगम क्षेत्र रहा है इसलिए यहाँ की परम्पराओं में चहूँ ओर की छाप दिखाई देती है। वैष्णव परंपरा में वर्षा ऋतु (आषाढ़, सावन, भादो, कुंआर) को …

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मायके का दुलार और तीजा तिहार

भारतीय जीवन व संस्कृति में बड़ी विविधता है। इस विविधता का कारण यहाँ विभिन्न धर्मो और विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय है। कहीं-कहीं इस विविधता का प्रमुख कारण यहाँ की आंचलिक जीवन शैली और उसकी लोक संस्कृति भी है। किसी तीज त्यौहार या पर्वों के पीछे उसकी वैदिक मान्यता के स्थान …

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विष्णु के आठवें अवतार : योगेश्वर श्री कृष्ण

भगवान कृष्ण का जन्मदिन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, जुलाई या अगस्त के महीने में पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें हिंदू लोग श्रीकृष्ण के जन्म को विष्णु के आठवें अवतार के रूप में …

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लोक आस्था का दर्पण : आठे कन्हैया

लोक की यह खासियत होती है कि उसमें किसी भी प्रकार की कोई कृत्रिमता या दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं होता। वह सीधे-सीधे अपनी अभिव्यक्ति को सहज सरल ढ़ंग से शब्दों रंगो व अन्य कला माध्यमों से अभिव्यक्त करता है। तीज-त्यौहारों की परम्परा तो शिष्ट में भी है और …

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सिंधड़ी दा, सेवण दा सखी शाहबाज कलंदर : संत झूलेलाल

भारत में विभिन्न धर्मों, समुदायों और जातियों का समावेश है इसलिए यहाँ अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है कि यहाँ सभी धर्मों के त्यौहारों को प्रमुखता से मनाया जाता है चाहे वह दीपावली हो, ईद हो, क्रिसमस हो या भगवान …

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क्या आप जानते हैं आंवला नवमी क्यों मनाई जाती है?

प्रकृति के साथ मानव का जुड़ाव जन्मजात है, वह किसी न किसी रुप में प्रकृति के साथ जुड़ा रहना चाहता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताएँ प्रकृति के साथ जुड़ी हुई हैं। सनातन धर्म प्रकृति के अनुरुप आचरण करना एवं जीना सिखाता है। प्रकृति के अनुरुप जीवन यापन करने के लिए आयुर्वेद …

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छेरछेरा पुन्नी : बच्चों में मनुष्यता जगाने का पर्व

हमारे देश की परम्परा तीज त्यौहारों, उत्सवों, मेलों की है। मनुष्य हमेशा उत्सव में रहना चाहता है, कहा जाए तो हमारी परम्परमा में वर्ष के सभी दिन उत्सवों के हैं। इन्हीं उत्सवों में हम छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी मनाते हैं। इस त्यौहार में बच्चे बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। …

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