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पौराणिक संस्कृति

छत्तीसगढ़ की भुंजीया जनजाति और उनका रामायणकालीन संबंध

प्राचीन काल से ही भारत में जनजातियों का अस्तित्व रहा है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल और आधुनिक काल में वर्तमान समय तक जनजातीय संस्कृति की निरंतरता दिखाई देती है। आरण्यक जीवन, फिर ग्रामीण संस्कृति और कालांतर में नगरीय सभ्यता का उद्भव इन सबका एक क्रमिक विकासक्रम दिखाई देता …

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युवाओं के आदर्श प्रेरणा स्रोत श्री हनुमान

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के सर्वोत्तम सेवक, सखा, सचिव और भक्त श्री हनुमान हैं। प्रभुराम की भारतीय जनमानस में जिस प्रकार पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार उनके प्रिय सेवक हनुमान जी की भी पूजा की जाती है। श्री हनुमान जी को रुद्रावतार भी माना जाता है। इनकी पूजा …

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मन की शक्ति जुटाने का पावन पर्व नवरात्र

चैत्र नवरात्र वसंत के समय आता है, ऐसे में जहां प्राकृतिक परिवर्तन पुराने आवरण को त्यागकर नएपन को वरण करने का संदेश देता है, वहीं मा शक्तिस्वरूपा की पूजा-अर्चना से मन में व्याप्त दुर्बलता को मिटाने, नवशक्ति – नवऊर्जा के आह्वान की कामना का शुभ अवसर भी प्राप्त होता है। …

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विंध्याचल धाम की महिमा

भारतवर्ष की सांस्कृतिक चेतना प्रारंभ से ही मातृ शक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान, अर्चन और वंदन के भाव से समर्पित रही है। इस समस्त संसार में एकमात्र हमारा ही देश है जहां स्त्री को जगत जननी मानकर उसकी पूजा की जाती है। सदियों से इस पवित्र भूमि पर “ यत्र …

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नवरात्र की वैज्ञानिकता

ऋग्वेद के देवी सूक्त में मां आदिशक्ति स्वयं कहती हैं, ‘ अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां, अहं रूद्राय धनुरा तनोमि।’ अर्थात् मैं ही राष्ट्र को बांधने और ऐश्वर्य देने वाली शक्ति हूँ, और मैं ही रुद्र के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाती हूं। हमारे तत्वदर्शी ऋषि मनीषा का उपरोक्त प्रतिपादन वस्तुतः स्त्री …

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शक्ति रुपेण संस्थिता : छत्तीसगढ़ की देवियां

छत्तीसगढ़ में देवियां ग्रामदेवी और कुलदेवी के रूप में पूजित हुई। विभिन्न स्थानों में देवियां या तो समलेश्वरी या महामाया देवी के रूप में प्रतिष्ठित होकर पूजित हो रही हैं। राजा-महाराजाओं, जमींदारों और मालगुजार भी शक्ति उपासक हुआ करते थे। वे अपनी राजधानी में देवियों को ‘‘कुलदेवी’’ के रूप में …

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स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी शीतला माता

शीतला सप्तमी विशेष आलेख किसी भी राज्य की पहचान उसकी भाषा, वेषभूषा एवं संस्कृति होती है। संस्कृति लोकपर्वों में दिखाई देती है। लोकपर्व संस्कृति का एक आयाम हैं। लोकपर्वों में अंतर्निहीत तत्व होते हैं, जिनके कारण लोकपर्व मनाए जाते हैं। संस्कृति की धारा अविरल बहती है परन्तु इसके पार्श्व में …

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लोक वाद्य नगाड़ा और होली

छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति में वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व है. इन्ही में से नगाड़ा एक ऐसा वाद्ययंत्र जो आज भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न आयोजनों में दिखाई देता है. भले ही इसका चलन कम हुआ है, लेकिन आज भी इसकी जगह अन्य वाद्ययंत्र नहीं ले पाया है. जब इसकी आवाज …

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खेलत अवधपुरी में फाग, रघुवर जनक लली

होली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम उनकी त्योहारों और पर्वो में दिखाई देता है। इन पर्वो में न जात होती है न पात, राजा और रंक सभी एक होकर इन त्योहारों को मनाते हैं। सारी कटुता को भूलकर अनुराग भरे माधुर्य से इसे मनाते …

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सामाजिक समरसता एवं भक्ति की अनुपम प्रतीक देवी शबरी

फाल्गुन कृष्ण पक्ष सप्तमी : शबरी माता जयंती भक्त शिरोमणि शबरी वनवासी भील समाज से थी। फिर भी मातंग ऋषि के गुरु आश्रम की उत्तराधिकारी बनी। रामजी ने उनके जूठे बेर खाये। यह कथा भारतीय समाज की उस आदर्श परंपरा का उदाहरण है कि व्यक्ति को पद, स्थान और सम्मान …

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