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अतिथि संवाद

सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू

सुभाष चंद्र बोस जन्म दिवस विशेष आलेख गंगाधर नेहरू का परिवार दिल्ली से उखड़ गया और 1857 में आगरा पहुंचा। 34 वर्ष की आयु में 1861 के वर्ष उनका निधन हो गया। इसके 3 महीने बाद मोतीलाल नेहरू का जन्म हुआ। मोतीलाल जी के बड़े भाई वंशीधर नेहरू आगरा में …

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भारतवर्ष का शाश्वत प्रतीक – स्वामी विवेकानन्द

“मेरा विश्वास आधुनिक पीढ़ी में है, युवा पीढ़ी में है, इन्हीं में से मेरे कार्यकर्ता निकलेंगे जो सिंह की तरह हर समस्या का समाधान कर देंगे।” – स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द ‘आयु में कम, किन्तु ज्ञान में असीम थे’। मात्र 39 वर्ष के अपने जीवन काल में स्वामीजी ने विश्वभर …

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स्वामी विवेकानन्द का राष्ट्रध्यान : विशेष आलेख

२५ दिसम्बर को दुनियाभर में “क्रिसमस” पर्व की धूम रहती है। भारत में भी जगह-जगह क्रिसमस की शुभकामनाओं वाले पोस्टर्स, बैनर, ग्रीटिंग्स का वातावरण बनाया जाता है। किन्तु हे भारत ! क्या तुम्हें स्मरण है कि २५ दिसम्बर, हम भारतीयों के लिए क्या महत्त्व रखता है? इस बात को समझना …

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मनुष्य की पहचान उसके अच्छे गुणों से : गुरु नानक देव

कार्तिक पूर्णिमा गुरु नानक जयंती विशेष सिक्ख धर्म के संस्थापक आदि गुरु नानक देव जी मानवीय कल्याण के प्रबल पक्षधर थे। जिन्होंने समकालीन सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक परिस्थितियों की विसंगतियों, विडम्बनाओं, विषमताओं धार्मिक आडम्बरों , कर्मकांडों, अंधविश्वासों तथा जातीय अहंकार के विरुद्ध लोक चेतना जागृत की तथा इसके साथ ही …

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जीवन का सुख

पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा संघ शिक्षा वर्ग, बौद्धिक वर्ग मैसूर, मई 19, 1967 को दिया गया व्याख्यान प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सुख की भावना लेकर चलता है। मानव ही नहीं, तो प्राणिमात्र सुख के लिए लालयित है। दुःख को टालना और सुख को प्राप्त करना, यह एक उसकी स्वाभाविक …

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नागरिक निर्माण में शिक्षकों की अकल्पनीय भूमिका

नागरिक निर्माणकर्ताओं को नमन, ‘अध्यापक और अध्यापन’ दोनों में कोई खास असमानता नहीं होती, एक समान ही होते हैं। क्योंकि ये दोनों हर किसी के जीवन का हिस्सा रहे होते हैं। इंसान के जीवन में शुरू से तरक्की-समृद्धि के वास्तविक पथ धारक टीचर ही रहे हैं जिनके जरिए इंसान खुद …

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याद रखनी चाहिए भारत विभाजन की त्रासदी

विभाजन विभिषिक स्मृति दिवस 14 अगस्त : विशेष आलेख देश का विभाजन एक अमानवीय त्रासदी थी जो अपने साथ भारतवर्ष का दुर्भाग्य भी लेकर आई थी। विश्व इतिहास के किसी दौर में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं है कि आप आजादी के लिए संघर्ष करें, आंदोलन चलाएं और जब आजाद …

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योग मानव जाति के लिए संजीवनी

भारतीय मनीषियों एवं ॠषियों ने मन की एकाग्रता एवं शरीर के सुचारु संचालन के लिए योग जैसे शक्तिदायक क्रिया की प्रादुर्भाव किया। जिसका उन्होंने पालन कर परिणाम जग के समक्ष रखा तथा इसे योग का नाम देकर विश्व के मनुष्यों को निरोग, स्वस्थ एवं बलशाली बनाने का रसायन दिया। वर्तमान …

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छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के युग प्रवर्तक साहित्यकार पण्डित माधवराव सप्रे

सच्चाई की धार पर चलने वाली पत्रकारिता का रास्ता हमेशा से ही काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। देश और समाज की भलाई के लिए उच्च आदर्शो के साथ किसी पत्र – पत्रिका के सम्पादन और प्रकाशन में कितनी दिक्कतें आती हैं, इसे पण्डित माधवराव सप्रे जैसे मनीषी पत्रकार की संघर्षपूर्ण जीवन …

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75 वर्ष स्वतंत्रता के : क्या खोया, क्या पाया

आजादी का अमृत महोत्सव विशेष आलेख भारत अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। हमारे धर्मशास्त्र एवं पुराणों में जीवन जीने की कला के साथ साथ धर्म, आध्यात्म ,राजनीति, अर्थ व्यवस्था एवं विज्ञान की चमत्कृत कर देने वाली घटनाएँ एवं गाथाएँ मौजूद हैं। किसी भी …

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