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नायक बनजारों की देवी बंजारी माता

नवा राजधानी अटल नगर से लगभग 5 किलोमीटर एवं अभनपुर से 11 किमी की दूरी पर बंजारी ग्राम स्थित है। इस छोटे से ग्राम में लगभग 45 घर हैं, इन 45 घरों में राजपुत, धुव्र जनजाति, पैनका एवं राऊत लोग निवास करते हैं। कुर्रु और बंजारी इन दोनों गांव की मालगुजारी राजपूतों से पास मराठा काल से ही रही है। यहाँ डीह पर बंजारी माता का स्थान है तथा आस पास के गांव के लोग यहाँ देवी की आराधना उपासना करते हैं।

मेरा इस गांव से तीन पीढी का संबंध है, जब बचपन में यहाँ आता था तो डीह पर चबुतरे पर देवी विराजमान थी। वर्तमान में आस-पास के छ: गांव चेरिया, कुर्रु, पौंता, बंजारी, तेंदूआ, खंड़वा के लोगों की सम्मिलित देवी स्थान विकास समिति बनी हुई है, जिसके अध्यक्ष प्रवीण सिंह राजपूत हैं।

प्रवीण सिंह राजपूत ने इस स्थान के विषय में बताया कि मूलत: बंजारी देवी, बंजारों की आराध्या है। प्राचीन काल में नायक बंजारे जब व्यापार करने आते थे तो यहाँ पानी का स्थान देखकर डेरा डालते थे। नायक बंजारों का कारवां यहाँ विश्राम करता और अपने साथ लाए हुए सामानों को बेचते, यहाँ की उपज को खरीदते और आगे बढ़ जाते।

नायक बंजारों की एक बात प्रसिद्ध है कि वे हमेशा पानी के स्रोत के किनारे ही डेरा डालते थे, क्योंकि उन्हें वहाँ निस्तारी एवं भोजन आदि के लिए जल उपलब्ध हो जाता था और जो जगह उन्हें डेरा डालने के लिए पसंद आती और वहाँ जल की सुविधा न होती तो वहाँ के निवासियों को धन दे देते थे, जिससे वे उनके लिए कुंआ तालाब आदि खोदकर रखते, जिससे रास्ते में उनके लिए एक पड़ाव और हो जाता था।

उसके बाद लूटपाट के डर से अपना धन रास्ते में ऐसे पड़ाव में ही गाड़ कर वहाँ कोई चिन्ह बना देते थे, जिससे लौटते समय उस स्थान को पहचान कर अपना धन ले सकें। यहाँ भी जब बंजारों ने पड़ाव डाला तो अपना धन डीह पर गाड़ दिया और एक शिला के रुप में अपनी देवी की स्थापना कर दी। बंजारी देवी की स्थापना होने के कारण इस गांव का नाम भी बंजारी पड़ गया।

प्रवीण कहते हैं कि बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि यहाँ बजारों ने धन गाड़कर अपनी देवी की स्थापना की और लौटते समय इस स्थान को आने का रास्ता भूल गये लेकिन उनकी देवी यहाँ स्थापित रही। ग्रामीणजन इसे धन की अधिष्ठात्रि देवी मानकर पूजा करते रहे हैं।

मंदिर के पीछे टीले पर एक बांबी है, जिसमें बरसों से एक नाग-नागिन का जोड़ा रहता है, ग्राम वासी इन्हें धन का रखवार मानते हैं। किवंदन्ति है कि बंजारों द्वारा गड़ाए गये धन की रक्षा आज भी कर रहे हैं। इसलिए इसे धन की देवी मानकर पूजा करते है।

मान्यता है कि देवी के प्रताप के कारण गांव में कोई महामारी नहीं फ़ैलती थी तथा अगर महामारी ग्रसित कोई व्यक्ति बंजारी ग्राम की सरहद में आ जाता था तो वो भी स्वस्थ हो जाता था। ऐसी महिमा माँ बंजारी की बताई जाती है। अब यह स्थान बंजारी धाम के रुप में विकसित हो चुका है तथा शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि में यहाँ ज्योति कलश की स्थापना की जाती है।

आलेख

ललित शर्मा इण्डोलॉजिस्ट रायपुर, छत्तीसगढ़

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