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साहित्य

छत्तीसगढ़ी कविताओं में मद्य-निषेध

शराब, मय, मयकदा, रिन्द, जाम, पैमाना, सुराही, साकी आदि विषय-वस्तु पर हजारों गजलें बनी, फिल्मों के गीत बने, कव्वालियाँ बनी। बच्चन ने अपनी मधुशाला में इस विषय-वस्तु में जीवन-दर्शन दिखाया। सभी संत, महात्माओं, ज्ञानियों और विचारकों ने शराब को सामाजिक बुराई ही बताया है। छत्तीसगढ़ी कविताओं में मदिरा का गुणगान …

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छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के युग प्रवर्तक साहित्यकार पण्डित माधवराव सप्रे

सच्चाई की धार पर चलने वाली पत्रकारिता का रास्ता हमेशा से ही काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। देश और समाज की भलाई के लिए उच्च आदर्शो के साथ किसी पत्र – पत्रिका के सम्पादन और प्रकाशन में कितनी दिक्कतें आती हैं, इसे पण्डित माधवराव सप्रे जैसे मनीषी पत्रकार की संघर्षपूर्ण जीवन …

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कहै कबीर मैं पूरा पाया भय राम परसाद : संत कबीर

संत परम्परा के अद्भुत संत सद्गुरू कबीर के जन्म के विषय में अनेक किंवदन्तियाँ प्रचलित हैं, परन्तु एक चर्चा सर्वमान्य कही जाती है कि काशी में लहरतारा- तालाब पर नीरू तथा नीमा नामक जुलाहा दम्पति को एक नवजात शिशु अनाथ रूप में प्राप्त हो गया। इन दोनों ने ही इस …

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जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम

उठो पुनः हुंकार भरो करना है प्रभु का काम, जब तक समर शेष है साथी मत लेना विश्राम॥ सदियों के संघर्षों बलिदानों से तृषा छँटी है, अरुणाई की आहट है पौ देखो वहाँ फ़टी है। भारत माता पुनः हमारा करती है आह्वान। जब तक समर शेष है साथी मत लेना …

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साहित्यलोक में व्याप्त वसंत : विशेष आलेख

वसंत ॠतु आई है, वसंत ॠतु के आगमन की प्रतीक्षा हर कोई करता है। नये पल्लव लिए वन, प्रकृति, मानव अपने पलक पांवड़े बिछाए उसका स्वागत करते दिखते हैं। भास्कर की किरणें उत्तरायण हो जाती हैं और दक्षिण दिशा से मलयाचल वायु प्रवाहित हो उठती है। वसुंधरा हरे परिधान धारण …

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छत्तीसगढ़ी के प्रथम नाटक के रचयिता : पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय

छत्तीसगढ़ के मनीषी साहित्यकारों में बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित लोचन प्रसाद पाण्डेय का नाम प्रथम पंक्ति में अमिट अक्षरों में अंकित है। हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को उनके अवदान का उल्लेख किए बिना प्रदेश का साहित्यिक इतिहास अपूर्ण ही माना जाएगा। कवि, कहानीकार, इतिहासकार और पुरातत्वविद तो वह थे …

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छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के स्मृतिशेष नवगीतकार : विशेष आलेख

नवगीत गीत-परंपरा के विकास का वर्तमान स्वरूप है जिसमें समकालीन परिप्रेक्ष्य का समग्र मूल्यांकन दिखाई देता है । दरअसल नवगीत गीत ही है , वह गीत के अन्तर्गत नवाचार है, कोई अलग विधा नहीं है। अक्सर प्रश्न उठता कि जब गीत की जानकारी के बिना नवगीत नहीं लिखा जा सकता …

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कुंडलियाँ : सप्ताह की कविता

बनकर मृग मारीच वे, बिछा रहे भ्रम जाल।फँसती जातीं बेटियाँ, समझ न पातीं चाल।।समझ न पातीं चाल, चली असुरों ने कैसी।तिलक सुशोभित भाल, क्रियाएँ पंडित जैसी।।प्रश्रय पा घुसपैठ, राष्ट्र को छलने तनकर।बिछा रहे भ्रम जाल, हिरण सोने का बनकर।। (2)कर लें पालन सूत्र हम, सर्व धर्म समभाव।सत्य सनातन धर्म का, …

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बहुआयामी प्रतिभा के धनी : डॉ बल्देव

06 अक्टूबर पुण्यतिथि विशेष आलेख बहुत से व्यक्ति किसी विधा-विशेष में दक्ष होते हैं, उन्हें हम उनकी विशेष विधा के कारण पहचानते हैं। कुछ व्यक्ति अनेक विधाओं में दक्ष होते हैं, उन्हें हम बहु-आयामी प्रतिभा के रूप में जानते हैं। बहुत से प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति केवल अपनी प्रतिभा के प्रचार-प्रसार में …

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माता कौशल्या के जीवन पर पहला उपन्यास : कोशल नंदिनी

प्राचीन महाकाव्यों के प्रसिद्ध पात्रों पर उपन्यास लेखन किसी भी साहित्यकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण और जोख़िम भरा कार्य होता है। चुनौतीपूर्ण इसलिए कि लेखक को उन पात्रों से जुड़े पौराणिक प्रसंगों और तथ्यों का बहुत गहराई से अध्ययन करना पड़ता है। इतना ही नहीं, बल्कि उसे उन पात्रों की …

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