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काष्ठ शिल्प

छत्तीसगढ़ की भुंजीया जनजाति और उनका रामायणकालीन संबंध

प्राचीन काल से ही भारत में जनजातियों का अस्तित्व रहा है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल और आधुनिक काल में वर्तमान समय तक जनजातीय संस्कृति की निरंतरता दिखाई देती है। आरण्यक जीवन, फिर ग्रामीण संस्कृति और कालांतर में नगरीय सभ्यता का उद्भव इन सबका एक क्रमिक विकासक्रम दिखाई देता …

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प्राचीन धरोहरें भारतीय शिल्पकला का अनुपम उदाहरण

17 सितम्बर भगवान विश्वकर्मा पूजा विशेष आलेख आज 17 सितम्बर भगवान विश्वकर्मा को स्मरण करने का दिन है, शासकीय तौर पर उनकी पूजा के लिए नियत तिथि है। इस दिन संसार के सभी निर्माण के कर्मी भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करके अपने निर्माण कार्य में कुशलता की कामना करते …

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जन्म से मृत्यू तक का साथी बाँस

बाँस से व्यक्ति का प्रथम परिचय सुर के साथ होता है तथा जब सुर की बात हो तो कृष्ण की बांसूरी आँखों के सामने दिखाई देने लगती है। इसकी मधुर धुन मन को मोहित कर लेती है। इस सुरीले पौधे का दैनिक जीवन में अत्यधिक महत्व एवं मानव मन को …

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बस्तर का बांस शिल्प

वर्तमान बस्तर को पहले चक्रकाट, महाकान्तार, महावन, दण्डकारण्य, आटविक राज्य आदि नाम से संम्बोधित किया जाता था। अचल में प्रचलित एक किंवदन्ती के अनुसार वारंगल के राजा प्रताप रुद्रदेव का भाई अन्नमदेव राज्य स्थापना की नीयत से यहां आया तो बाँस तरी में (बाँस झुरमुट के नीचे) अपना पहला पड़ाव …

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छत्तीसगढ़ी लोक शिल्प : कारीगरी

भारतीय संस्कृति की प्रवृति बड़ी उदात्त है। वह अपने संसर्ग में आने वाले तत्वों का बड़ी उदारता के साथ अपने आप में समाहित कर लेती है। संस्कृति का यही गुण भी है। जो सबको अपना समझता है, वह सबका हो जाता है। हमारी संस्कृति इसी गुण के कारण विश्व में …

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भारतीय हस्तशिल्प: रचनात्मकता और कलात्मकता का अनूठा संगम

भारत का हस्तशिल्प/ परम्परागत शिल्प विश्व प्रसिद्ध है, प्राचीन काल से ही यह शिल्प विश्व को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर करता रहा है। तत्कालीन समय में ऐसे शिल्पों का निर्माण हुआ जिसने विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया। नवीन अन्वेषण प्राचीन काल में परम्परागत शिल्पकारों द्वारा होते रहे हैं। …

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ऐसी कौन सी घास है जो जन्म से मरण तक साथ निभाती है?

मनुष्य का बांस से साक्षात्कार अग्नि के माध्यम से हुआ, अग्नि प्रज्जवलित करने के  लिए उसने अरणी पर परणी का घर्षण कर अग्नि का संधान किया। वर्तमान में विशेष समुदायों में विशेष अवसरों पर इसी तरह अग्नि प्रकट करने का विधान दिखाई देता है। जन्म के बाद बाँस से व्यक्ति …

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बस्तर का परम्परागत द्वार निर्माण काष्ठ शिल्प

कला की अभिव्यक्ति के लिए कलाकार का मन हमेशा तत्पर रहता है और यही तत्परता उपलब्ध माध्यमों के सहारे कला की अभिव्यक्ति का अवसर देती है। वह रंग तुलिका से लेकर छेनी हथौड़ी तक को अपना औजार बनाकर कला को जन जन तक पंहुचाता है, इसमें काष्ठ कला भी कलाभिव्यक्ति …

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