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पुस्तक चर्चा

इस खंड में विभिन्न विषय पुस्तकों की चर्चा एवं उनकी समीक्षा प्रकाशित होगी।

छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ साहित्यकार

एक हजार साल से भी पुराना है छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का इतिहास भारत के प्रत्येक राज्य और वहाँ के प्रत्येक अंचल की अपनी भाषाएँ, अपनी बोलियाँ, अपना साहित्य, अपना संगीत और अपनी संस्कृति होती है। ये रंग -बिरंगी विविधताएँ ही भारत की राष्ट्रीय पहचान है, जो इस देश को …

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छत्तीसगढ़ के लोक-देवता पर पहला उपन्यास : देवी करिया धुरवा

दुनिया के अधिकांश ऐसे देशों में जहाँ गाँवों की बहुलता है और खेती बहुतायत से होती है, जहाँ नदियों, पहाड़ों और हरे -भरे वनों का प्राकृतिक सौन्दर्य है, ग्राम देवताओं और ग्राम देवियों की पूजा-अर्चना वहाँ की एक प्रमुख सांस्कृतिक विशेषता मानी जाती है। सूर्य, चन्द्रमा, आकाश, अग्नि, वायु, जल …

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माता कौशल्या के जीवन पर पहला उपन्यास : कोशल नंदिनी

प्राचीन महाकाव्यों के प्रसिद्ध पात्रों पर उपन्यास लेखन किसी भी साहित्यकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण और जोख़िम भरा कार्य होता है। चुनौतीपूर्ण इसलिए कि लेखक को उन पात्रों से जुड़े पौराणिक प्रसंगों और तथ्यों का बहुत गहराई से अध्ययन करना पड़ता है। इतना ही नहीं, बल्कि उसे उन पात्रों की …

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मैं धरती-आबा हूं! भगवान बिरसा मुंडा

झारखंड के छोटा नागपुर स्थित उलीहातु गाँव में 15 नवम्‍बर, 1875 को जन्में बिरसा मुंडा को जनजातीय समाज सहित संपूर्ण देश ने अपना भगवान माना है। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के धनी बिरसा ने ईसाई षड्यंत्रों, सामाजिक कुरीतियों आदि को अपने तर्कों से पटखनी दी और जमकर प्रतिकार किया। वहीं, …

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युद्ध के मैदान से आया जीवन दर्शन : गीता जयंती विशेष

आज महत्वपूर्ण तिथि है, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है, द्वापर युग में इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से प्रसिद्ध है और यह तिथि भगवत् गीता के अवतरण दिवस के रुप में मनाई …

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“शुद्र कौन थे” अवलोकन एवं समीक्षा : डॉ त्रिभुवन सिंह

एन राम ने डॉक्टर्ड डॉक्यूमेंट के आधार पर फेक न्यूज़ तैयार किया। 2014 में इलेक्शन के पूर्व शेखर गुप्ता ने फेक न्यूज़ बनाकर बड़े अंग्रेजी अखबार में तत्कालीन सेना प्रमुख बीके सिंह के लिए अफवाह फैलाई कि सेना सत्ता पर कब्जा करने के लिए कूंच कर चुकी है। फेक न्यूज़ का …

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डोंगी में दिल्ली से कलकत्ता तक यात्रा की कहानी, डॉ राकेश तिवारी की जुबानी

घुमक्कड़ मनुष्य की शारीरिक मानसिक एवं अध्यात्मिक क्षमता की कोई सीमा नहीं। ये तीनों अदम्य इच्छा से किसी भी स्तर तक जा सकती हैं और चांद को पड़ाव बना कर मंगल तक सफ़र कर आती हैं। घुमक्कड़ी करना भी कोई आसान काम नहीं है, यह दुस्साहस है जो बहुत ही कम …

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