बौद्ध धर्म एवं उसका विकास : छत्तीसगढ़

(अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर) भारतीय संस्कृति में धर्म का स्थान उसी प्रकार सुनिश्चित किया जा सकता है, जिस प्रकार शरीर में प्राण। धर्म को प्राचीनकाल से ही एक पवित्र प्रेरक के रूप में आत्मसात् किया गया है। भारत की यह धरा अनेक धर्मों के उत्थान एवं पतन की साक्षी …

Read More »

छत्तीसगढ़ में सूर्योपासना परम्परा : कलात्मक अभिव्यक्ति

मानव धर्म के माध्यम से अपनी मानसिक अभिव्यक्ति करता है। इसके अंतर्गत मानव ऐसी उच्चतर अदृश्य शक्ति के प्रति अपना विश्वास प्रकट करता है, जो उसके समस्त मानवीय जीवन को प्रभावित करती है। इसमें आज्ञाकारिता, शील, सम्मान तथा अराधना की भावना अंर्तनिहित होती है। अपने प्रारम्भिक अवस्था में मानव ने …

Read More »

जानिए लाल बंगला का रहस्य क्या है

छत्तीसगढ़ पर प्रकृति ने अपना अपार स्नेह लुटाया है। यहां के नदी, पहाड़, जीव-जंतु, सघन वन्यांचल, जनजातीय परंपराएं और लोक जीवन इस राज्य की सुषमा में चार चांद लगाते हैं। अपनी विशिष्ट जीवनशैली और परंपरा को सहेजने में जनजातीय समूह विशिष्टता है। इनके विशिष्ट रीति-रिवाज और परंपराएं देश और विदेश …

Read More »

उद्भट योद्धा एवं सशक्त महिला शासक : रानी दुर्गावती

भारत मे अनेक वीरांगनाएं अवतरित हुई जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। एक प्राकृतिक तथ्य है कि नारी स्वभाव से ही कोमलकांत होने साथ कर्मठ और सहनशील होती है। धैर्य, साहस, आत्मविश्वास से भरी होती हैं इसलिए राष्ट्र निर्माण के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी …

Read More »

गांधी ने पहचानी थी भारत की पुरानी पूँजी

भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की शक्ति को समाप्त किए बिना अंग्रेज पूरे देश को चिरकाल तक अपना गुलाम नहीं बना सकते थे, यही आशय भारत में एक सर्वेक्षण के बाद लॉर्ड मैकॉले के ब्रिटिश संसद में दिए गए भाषण में था। भारत अपने प्राचीन ज्ञान परंपरा और विरासत पर …

Read More »

क्रांति दिवस 30 सितम्बर : सलिहागढ़

सन 1930 के जनक्रांति “जंगल सत्याग्रह” का केंद्र बिंदु रहा सलिहागढ़, छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा क्षेत्र में जोंक नदी के तट पर बसे नगर पंचायत खरियाररोड के दक्षिण-पूर्व दिशा में लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह क़स्बा अब ओडिशा के नुआपाड़ा जिला के अंतर्गत है जो पूर्व में महासमुंद …

Read More »

भारत माता के भक्त – भगत सिंह

(28 सितम्बर, जयन्ती पर विशेष) जागो तो एक बार जागो जागो तो जागे थे भगत सिंह प्यारे असेंबली में लग गए नारे ठप हो गयी सरकार जागो जागो तो . . . इस उत्साहवर्धक गीत के पश्चात् भैया प्रसंग बताने के लिए सामने आए। ‘हमारे बिगड़े दिमागों में बलिदानी विचार …

Read More »

पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एक युग दृष्टा

आत्मविश्वास,कर्मठता, दृढ़निश्चय, लगन, निष्ठा, त्याग, समाज कल्याण और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता जैसे शब्द जहाँ बहुतायत श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लोगों का मान बढ़ाते हैं, वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन से जुड़कर इन शब्दों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 …

Read More »

छत्तीसगढ़ के कलचुरीकालीन अभिलेखों के परिप्रेक्ष्य में स्थापत्य एवं मूर्तिकला

इतिहास का अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि अभिलेख उत्कीर्ण कराने के उद्येश्यों में प्रमुख स्थान धार्मिक निर्माण एवं दान तथा अनुदान का रहा है और संपूर्ण भारतवर्ष से अब तक प्राप्त लगभग पचास प्रतिशत से अधिक अभिलेख जो विभिन्न शासकों, व्यक्तियों एवं संस्थाओं द्वारा जारी किये गये है, …

Read More »

लोक अभिव्यक्ति का रस : ददरिया

लोक में ज्ञान की अकूत संचित निधि है, जिसे खोजने, जानने और समझने की बहुत आवश्यकता है। लोकज्ञान मूलतः लोक का अनुभवजन्य ज्ञान है जो यत्र-तत्र बिखरा हुआ है और कई गूढ़ रहस्यों का भी दिग्दर्शन कराता है। यह विविध रूपों में हैं, कहीं गीत-संगीत, कहीं लोक-कथाओं और कहीं लोक-गाथाओं …

Read More »