बस्तर की सामूहिक पूजा पद्धति ककसाड़

छत्तीसगढ़ प्रदेश के बस्तर संभाग में जीवन-यापन करने वाली जनजाति देव संस्कृति के पोषक है। वह अपने लोक देवी देवताओं के प्रति अपार श्रद्धा रखता है। उसकी यह भावना उसके कार्य-व्यवहार से परिलक्षित होती है। जनजाति समाज के तीज-त्यौहार देव कार्य सब अपने देवताओं को प्रसन्न करने और प्रकृति के …

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कुँवर अछरिया की लोक गाथा एवं पुरातात्विक महत्व

लोक साहित्य वाचिका परम्परा के माध्यम से एक कंठ से दूसरे कंठ में रच-बस कर अपने स्वरूप को विस्तार देता है। फिर व्यापकरूप में लोक को प्रभावित कर लोक का हो जाता है। यही लोक साहित्य कहलाता है। लोक साहित्य में लोक कथा, लोकगीत, लोकगाथा, लोकनाट्य, लोकोक्तियाँ और लोक पहेलियाँ, …

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आराध्या भक्त शिरोमणी माता कर्मा

भक्त माता कर्मा जयंती चैत्र मास कृष्ण पक्ष एकादशी के दिन मनाई जाती है जिसे पापमोचनी एकादशी भी कहा जाता है । छत्तीसगढ़ में इस परंपरा की शुरुआत साहू समाज द्वारा सन 1974 में रायपुर से की गई थी । बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के किसी सामाजिक पत्रिका …

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छत्तीसगढ़ी बालमन की मनोरंजक तुकबंदियाँ

बालमन बड़ा स्वतंत्र होता है। उसे बंधन जरा भी स्वीकार नहीं। बंधन में रहकर बालमन कुम्हलाने लगता है। जैसे कलियों को खिलने के लिए सूरज का प्रकाश चाहिए, उसी प्रकार बालमन को खिलने के लिए बंधन मुक्त होना चाहिए। बालकपन खेल प्रिय होता है। खेल-खेल में वह नए सृजन भी …

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सामाजिक संदर्भ में लोक गाथा दसमत कैना

छत्तीसगढ़ के गाथा- गीत “दसमत कैना” में उड़ीसा के अन्त्यज समाज और छत्तीसगढ़ के द्विज समाज की तत्कालीन सामाजिक व्यवस्थाएँ स्पष्ट रूप से देखने में आती हैं। गाथा से जुड़े सामाजिक सन्दर्भों का बिन्दुवार वर्णन निम्नानुसार है – सामूहिकता, सहकारिता और व्यवसाय – नौ लाख ओड़िया लोगों का एक साथ …

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छत्तीसगढ़ के लोकगीतों का सामाजिक संदर्भ

लोक गीत लोक जीवन के अन्तर्मन की अतल गहराइयों से उपजी भावानुभूति है। इसलिए लोकगीतों में लोक समाज का क्रिया-व्यापार, जय-पराजय, हर्ष-विषाद उत्थान-पतन, सुख-दुख सब समाहित रहता है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है कि “ये गीत प्रकृति के उद्गम और आर्येत्तर के वेद है।” उक्त कथन लोक गीत की …

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सरगुजा अंचल की जनजातियों में होली का त्यौहार

होली का पर्व हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है। यह त्योहार बसंत ऋतु में मनाया जाता है, इसलिए इसे बसंतोत्सव भी कहा जाता है। होली का त्यौहार हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। इसे फगुआ, फागुन, धूलेंडी, छारंडी और दोल के …

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दे दे बुलौआ राधे को नगर में : होली फाग गीतों के संग

प्रकृति मनुष्य को सहचरी है, यह सर्वविदित है। किन्तु मनुष्य प्रकृति का कितना सहचर है? यह प्रश्न हमें निरूत्तर कर देता है। हम सोचने के लिए विवश हो जाते हैं कि सचमुच प्रकृति जिस तरह से अपने दायित्वों का निर्वाह कर रही हैं? क्या मनुष्य प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों …

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देश विदेश के डाक टिकटों में राम

रामायण महाकाव्य केवल भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में पसन्द की जाती है, सूरीनाम, फिजी, गुयाना, मॉरीशस, वेस्टइंडीज आदि देशों के प्रवासियों ने रामायण को अपने हृदय में बसाया है। बहुत से एशियाई देशों में रामायण को अपनी भाषा में अनुवादित कर अपने धार्मिक ग्रन्थ के रूप में …

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खरदूषण की नगरी खरोद का पुरातत्वीय वैभव

छत्तीसगढ़ प्रदेश के अन्तर्गत जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से शिवरीनारायण सड़क मार्ग पर स्थित ग्राम खरोद लगभग 35 कि.मी. दूरी पर स्थित है। बिलासपुर जिला मुख्यालय से खरोद की दूरी लगभग 62 कि.मी. तथा रायपुर से वाया कसडोल शिवरीनारायण होकर खरोद लगभग 140 कि.मी. दूरी पर है। यहां पर पहुंचने के …

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