भारत के एक प्रकाशमान नक्षत्र महाराणा प्रताप

हिन्दू वीर महाराणा प्रताप पुण्यतिथि 19 जनवरी विशेष आलेख भारतीय इतिहास के एक प्रकाशमान नक्षत्र हैं चित्तौड़ के राणा प्रताप। जो न किसी प्रलोभन से झुके और न किसी बड़े आक्रमण से भयभीत हुये। उन्होंने स्वाधीनता और स्वाभिमान के लिये जीवन भर संघर्ष किया और अकबर को पराजित किया। मुगल …

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सामाजिक समरसता की पावन भूमि खल्लारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 75 कि मी, जिला मुख्यालय महासमुंद से 25 कि. मी. रायपुर-पदमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में अवस्थित खल्लारी मध्यकालीन ऐतिहासिक स्थल है। इस ऐतिहासिक स्थल के स्मरण में खल्लारी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का गठन हुआ है जो बागबाहरा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत है। इतिहासकार यहां …

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अयोध्या के राम लला एवं रामानंदी सम्प्रदाय

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा के बाद प्रतिदिन की पूजा सेवा, निमित्त उत्सवों आदि को रामानंदी पद्धति से करना तय किया है। यह संप्रदाय रामभक्ति की विभिन्न धाराओं व शाखाओं के बीच समन्वय, वर्ण-विद्वेष को दूरकर राममय होकर तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों …

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असीरगढ़ के किले पर धोखे से कब्जा किया अकबर ने

17 जनवरी 1601 : मुगलों की लूट का क्रूर रक्त रंजित इतिहास बचपन की पाठ्यपुस्तकों में मुगल बादशाह अकबर को महान पढ़ा था। उन पुस्तकों में कुछ उदाहरण भी थे। इस कारण अकबर को और समझने की जिज्ञासा सदैव बनी रही। आगे चलकर उनकी महानता की अनेक कहानियाँ भी पढ़ी। …

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एक सौ इकसठ वर्ष की कानूनी लड़ाई एवं महत्वपूर्ण घटनाक्रम

अयोध्या में रामजन्म स्थान मुक्ति के लिये सशस्त्र संघर्ष और बलिदान का ही सबसे लंबा इतिहास नहीं है। इतनी लंबी अवधि तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का उदाहरण भी दुनियाँ में दूसरा नहीं है। कोई पाँच सौ वर्षों के कुल संघर्ष में लगभग एक सौ साठ साल कानूनी लड़ाई के …

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संघर्ष और बलिदान का ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं : अयोध्या

अपने जन्मस्थान अयोध्या में अब रामलला विराजने जा रहे हैं। यह क्षण असाधारण संघर्ष और बलिदान के बाद आया है। जितने आक्रमण अयोध्या पर हुये और बचाने लिये जितने बलिदान अयोध्या में हुये ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं मिलता। सनातनी समाज की हजारों पीढ़ियाँ यह सपना संजोये …

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राजिम धाम में मकर संक्रांति की प्राचीन परम्परा

भारतीय संस्कृति में नदियों के संगम पर विभिन्न धार्मिक कार्यों के संपादन की प्राचीन परम्परा रही है। इसी परम्परा में संक्राति पर्वों पर स्नान-दान एवं ध्यान की परम्परा भी है। संक्रांति पर भारत में नदियों के तट पर मेले लगते हैं, हमारा छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नही है। यहाँ भी …

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श्रीराम के अनन्य भक्त संत शिरोमणि जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य

प्राचीन काल से ही भारत भूमि महान ऋषि-मुनियों की जननी रही है। गुरु-शिष्य परंपरा से सुशोभित इस धरा पर अनगिनत संत और महापुरुष जन्में, जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व का मार्गदर्शन किया। अपने तेज, त्याग और तपस्या से संपूर्ण ब्रह्माण्ड को आलोकित किया। सदियों से ही धर्म भारत की आत्मा रही है। …

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मकर संक्रांति पर्व का महत्व एवं गंगा सागर स्नान दर्शन

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश ‘संक्रांति‘ कहलाता है। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण और कर्क रेखा से दक्षिण मकर रेखा की ओर जाना दक्षिणायन कहलाता है। जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होने लगता है तब दिन बड़े और रात छोटी होने लगती …

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फाँसी से पहले हथौड़े से जिनके दाँत तोड़े, नाखून उखाड़े गये

12 जनवरी 1934 : दो क्राँतिकारियों सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास साधारण नहीं है। इसमें बलिदान के कुछ ऐसे प्रसंग भी हैं जिन्हें पढ़कर आत्मा काँप उठती है। क्राँतिकारी सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त को फाँसी देने से पहले अमानवीय यातनाएँ दी गई, हथौड़े से …

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