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Tag Archives: छत्तीसगढ़

जानिए बस्तर के घोटुल को

इसे बस्तर का दुर्भाग्य ही कहा जाना चाहिये कि इसे जाने-समझे बिना इसकी संस्कृति, विशेषत: इसकी जनजातीय संस्कृति, के विषय में जिसके मन में जो आये कह दिया जाता रहा है। गोंड जनजाति, विशेषत: इस जनजाति की मुरिया शाखा, में प्रचलित रहे आये “घोटुल” संस्था के विषय में मानव विज्ञानी …

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मान दान का पर्व : छेरछेरा तिहार

छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ का लोक पर्व है । अंग्रेज़ी के जनवरी माह में व हिन्दी के पुष पुन्नी त्यौहार छेरछेरा को मनाया जाता है। त्यौहार के पहले घर की साफ़-सफ़ाई की जाती है। छत्तीसगढ़ में धान कटाई, मिसाई के बाद यह त्यौहार को मनाया जाता है। यह त्यौहार छत्तीसगढ़ का …

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छत्तीसगढ़ की घुमन्तू जनजाति : नट

अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति है और उस अनेकता के मूल में निश्चित रुप से भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित जनजातीय है। भारत में घुमंतू जनजातियों के लोग हर क्षेत्र में निवास करते हैं इनकी जीवन पद्धति अन्य लोगों से भिन्न है। घुमंतू जनजातियों की वेशभूषा, खान पान, …

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सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले संत गुरु घासीदास

गुरु घासीदास का संपूर्ण जीवन संघर्ष पूर्ण रहा। उस समय देश में सामंती प्रथा व्याप्त थी। पूरा देश अंग्रेजी शासन के अधीन था। जनता शोषित और पीड़ित थी। दलित समाज में विचित्र छटपटाहट थी। विचार अभिव्यक्ति की स्वतंतत्रा तो दूर की बात, लोगों को रोटी-कपड़े के लिए भी संघर्ष करना …

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इतिहास एवं पुरातत्व के आईने में महासमुंद

महासमुंद जिला बने 27 माह 25 दिन ही हुए थे कि राज्यों के पुनर्गठन पश्चात 01 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना। 06 जुलाई 1998 के पूर्व यह रायपुर जिले का एक तहसील हुआ करता था। 1873-74 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधिकारी जे.डी. बेगलर जब मध्य …

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भारतीय संस्कृति में गोमय का महत्व

छत्तीसगढ़ में दीपावली पर गौमय से आंगन लीपने की परम्परा है, माना जाता है कि गोबर से लिपे पुते घर आंगन में लक्ष्मी का आगमन होता है। गाय को गौधन कहा जाता है तथा उसके मूत्र, गोबर, घी, दूध, दही को पंचगव्य कहा गया है। गाय के पंच गव्य से …

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बागबाहरा कलां की तीन देवियाँ

हमारे देश भारत एवं विदेशों में भी आदि शक्ति जगतजननी मां जगदंबा शक्तिपीठों में विराजमान हैं। जहाँ उन्हें कई नाम एवं कई रूपों में बारहों महीने पूजा जाता हैं और चैत कुंवार के नवरात्रि में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। जहां श्रद्धालु जन भारी संख्या में मनोकामना पूर्ति हेतु …

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कवर्धा राज का दशहरा उत्सव

हमारा देश सनातन काल से सौर, गाणपत्य, शैव, वैष्णव, शाक्त आदि पंच धार्मिक परम्पराओं का वाहक रहा है। यहाँ पर्वों एवं त्यौहारों की कोई कमी नहीं है, सप्ताह के प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होते हैं। विक्रम संवत की प्रत्येक तिथियाँ भी अपनी विशिष्टता लिए हुए हैं। …

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अज्ञात पंचसागर शक्तिपीठ

आदि शक्ति मां के 51 शक्ति पीठ कहे गए हैं। पुराणों में माता के शक्तिपीठों का नाम दिये गये हैं उनमें से दो शक्तिपीठ अज्ञात कहें गये हैं। ‘पंचसागर शक्तिपीठ’ छत्तीसगढ़ में विद्यमान हैं। पौराणिक आख्यानों के अनुसार पंचसागर शक्तिपीठ का जो वर्णन मिलता है वैसा ही स्वरूप छत्तीसगढ़ के …

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छत्तीसगढ़ का लोक पर्व : तीजा तिहार

भारतीय जीवन व संस्कृति में बड़ी विविधता है। इस विविधता का कारण यहाँ विभिन्न धर्मो और विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय है। कहीं-कहीं इस विविधता का प्रमुख कारण यहाँ की आंचलिक जीवन शैली और उसकी लोक संस्कृति भी है। किसी तीज त्यौहार या पर्वों के पीछे उसकी वैदिक मान्यता के स्थान …

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