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Tag Archives: रेखा पाण्डेय

अक्षय तृतीया का सामाजिक महत्व एवं व्यापकता

अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय या नाश ना हो। हिन्दू पंचाग के अनुसार बारह मासों की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुभ मानी जाती है, परंतु वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्त में होने के कारण हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व है। ऋतु परिवर्तन काल …

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नव संवत्सर एवं चैत्र नवरात्रि का पर्व

विश्व भर में विभिन्न जाति-धर्म सम्प्रदायों के मानने वाले अपनी संस्कृति-सभ्यता अनुसार परंपरागत रूप से भिन्न-भिन्न मासों एवं तिथियों में नववर्ष मनाते हैं। एक जनवरी को जार्जियन केलेंडर के अनुसार नया वर्ष मनाया जाता है। परंतु हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि को नया वर्ष, …

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नाट्यशास्त्र एवं लोकनाट्य रामलीला

रंगमंच दिवस विशेष आलेख भारत में नाटकों का प्रचार, अभिनय कला और रंग मंच का वैदिक काल से ही निर्माण हो चुका था। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से प्रमाण मिलता है। संस्कृत रंगमंच अपनी चरम सीमा में था। नाटक दृश्य एवं श्रव्य काव्य का रूप है जो दर्शकों को आनंदानुभूति कराती …

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छत्तीसगढ़ में शिवोपासना की परंपरा

छत्तीसगढ़ वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों का विकास केंद्र रहा है। यहां प्राप्त मंदिरों, देवालयों और उनके भग्नावशेषों से ज्ञात होता है कि यहां वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध, जैन धर्म एवं संस्कृतियों का प्रभाव रहा है। शैवधर्म का छत्तीसगढ़ में व्यापक प्रभाव परिलक्षित होता है। जिसका प्रमाण …

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प्राचीन भारतीय योग विज्ञान सर्वकाल में उपयोगी

युञ्ज्यते असौ योग:, योग शब्द संस्कृत के युञ्ज धातु से बना है। जिसका अर्थ है जुड़ना, मिलना या एकजुट होना। योग, विश्व को प्राचीन भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अनुपम देन है। योग द्वारा मनुष्य अपने शरीर एवं मन-मस्तिष्क को आत्मबल प्रदान कर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाता है। योग …

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भारतीय प्राचीन साहित्य में पर्यावरण संरक्षण का महत्व

प्रकृति और मानव का अटूट संबंध सृष्टि के निर्माण के साथ ही चला आ रहा है। धरती सदैव ही समस्त जीव-जन्तुओं का भरण-पोषण करने वाली रही है। ‘क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच रचित अति अधम सरीरा ।’ इन पाँच तत्वों से सृष्टि की संरचना हुई है। बिना प्रकृति के …

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अप्प दीपो भव : बुद्ध पूर्णिमा

धार्मिक ग्रंथों के आधार पर भगवान विष्णु के नौवें अवतार बुद्ध का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का यह प्रमुख पर्व है। बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है, इसके संस्थापक शाक्य मुनि महात्मा गौतम …

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सकल सृष्टि की जनक माँ : मातृ दिवस विशेष

माँ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर मन आनन्द से भर कर हिलोर लेने लगता है। माता, जननी, मम्मी, आई, अम्माँ इत्यादि बहुत से नामों से माँ को पुकारते हैं भाषा चाहे कोई भी हो पर माँ शब्द के उच्चारण मात्र से उसके आँचल की शीतल छाया एवं प्यार भरी …

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हिन्दवी स्वराज के संस्थापक : छत्रपति शिवाजी

भारत के महान योद्धा राजा, रणनीतिकार, कुशल प्रबुद्ध सम्राट के रूप में प्रतिष्ठित वीर सपूत एवं भारतीय गणराज्य के महानायक शिवा जी का जन्म 19 फरवरी को मराठा परिवार में हुआ था। माता जीजा जी बाई धार्मिक स्वभाव की कुशल व्यवहार की वीरांगना नारी थीं। उन्होंने बालक शिवा जी का …

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भारतीय हस्तशिल्प: रचनात्मकता और कलात्मकता का अनूठा संगम

भारत का हस्तशिल्प/ परम्परागत शिल्प विश्व प्रसिद्ध है, प्राचीन काल से ही यह शिल्प विश्व को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर करता रहा है। तत्कालीन समय में ऐसे शिल्पों का निर्माण हुआ जिसने विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया। नवीन अन्वेषण प्राचीन काल में परम्परागत शिल्पकारों द्वारा होते रहे हैं। …

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