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Tag Archives: दीपावली

लोकमंगल का पर्व सुरहुति तिहार

वर्ष भर की प्रतीक्षा उपरांत लो आ गई त्योहारों की रानी दीपावली। प्रकाश, पवित्रता, हर्षोल्लास और स्वच्छता का पर्व दीपावली जनमानस में उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व संपूर्ण भारत वर्ष के साथ ही विश्व के दूसरे भू भागों में भी मनाया जाता है जहां भारतवंशी रहते …

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काया कल्प करने वाली औषधि : आंवला

मनुष्य का स्वास्थ्य प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है, प्रकृति हमें विभिन्न चमत्कारिक औषधियाँ प्रदान करती हैं तथा व्याधि होने पर मनुष्य औषधियों का सेवन कर स्वास्थ्य को प्राप्त करता है। ऐसी ही एक महाऔषधि है आंवला, आमलकी। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में उसी प्रकार श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है …

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राष्ट्र की उन्नति में गौधन का विशेष योगदान : गोपाष्टमी विशेष

गाय विश्व की माता है (गावो विश्वस्य मातर:), वैदिक काल से ही गाय पूजनीया मानी जाती रही है। गाय भावनात्मक या धार्मिक कारणों से पूजनीया नहीं है, अपितु इसे मानव समाज की अनिवार्य आवश्यकता के कारण पूज्या माना गया है। गोउत्पाद की चर्चा वेदों में की गई है। परवर्ती काल …

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गौधन के प्रति कृतज्ञता अर्पण : सोहाई बंधन

प्रकाश का पर्व दीपावली लोगों के मन में उल्लास भर देता है। यह पर्व संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पीछे अनेकानेक कारण और कहानियां जुड़ी हुई है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दीपावली के दिन ही भगवान राम का लंका विजय पश्चात अयोध्या आगमन हुआ …

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छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज में गौरी-गौरा पूजा की प्राचीन परम्परा

गौरा पूजा विशुद्ध रुप से आदिम संस्कृति की पूजा है, इस पर्व को जनजातीय समाज के प्रत्येक जाति के लोग मनाते है और क्षेत्र अनुसार दिवाली से 5 दिन पूर्व से पूस पुन्नी तक मनाया जाता है। जैसे रायपुर राज मे दिवाली प्रमुख है, बिलासपुर राज मे देव उठनी, बनगवां, …

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जनजातीय अनुष्ठान : गौरी-गौरा पूजा

छत्तीसगढ़ राज्य नया है, किन्तु इसकी लोक संस्कृति का उद्गम आदिम युग से जुड़ा हुआ है, जो आज भी यहाँ के लोक जीवन में सतत् प्रवाहमान है। यहाँ तीज-त्यौहारों और पर्वों की बहुलता है। ये तीज-त्यौहार और पर्व यहाँ के जनमानस में रची-बसी आस्था को आलोकित करते हैं और लोक …

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दक्षिण कोसल की स्थापत्य कला में लक्ष्मी का प्रतिमांकन

प्राचीन काल में भारत में शक्ति उपासना सर्वत्र व्याप्त थी, जिसके प्रमाण हमें अनेक अभिलेखों, मुहरों, मुद्राओं, मंदिर स्थापत्य एवं मूर्तियों में दिखाई देते हैं। शैव धर्म में पार्वती या दुर्गा तथा वैष्णव धर्म में लक्ष्मी के रूप में देवी उपासना का पर्याप्त प्रचार-प्रसार हुआ। लक्ष्मी जी को समृद्धि सौभाग्य …

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गज लक्ष्मी एवं लक्ष्मी पूजन की परम्परा

‘महालक्ष्‍मी नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि।हरि प्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दयानिधे।।’ प्राचीन काल से श्री लक्ष्मी का संबंध धन-एश्वर्य, श्री कीर्ति से माना जाता है। पौराणिक शास्त्रों में लक्ष्मी के अष्ट रुप माने गए हैं, जो आदि लक्ष्मी या महालक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धन्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सनातना लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी या जाया लक्ष्मी …

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