Home / सप्ताह की कविता / नित वाणी में तेज भरो माँ!

नित वाणी में तेज भरो माँ!

नित वाणी में तेज भरो माँ!

एक नहीं, नौ माताओं की, मुझको अद्भुत शक्ति मिले ।
नित वाणी में तेज भरो माँ, मुझको नव-अभिव्यक्ति मिले।।

‘शैलपुत्री’ औ ‘ब्रह्मचारिणी’, ‘चंद्रघटा’ का वंदन है।
‘कुष्मुण्डा’, ‘स्कन्दमात’ औ ‘कात्यायनी’ शुभदर्शन है।

‘कालरात्रि’, ओ ‘महागौरी’ तू, ‘सिद्धिदात्री’ की भक्ति मिले।।
एक नहीं नौ माताओं की, मुझको अद्भुत शक्ति मिले ।

केवल भक्ति नहीं चाहिए, मानवता का ज्ञान धरूँ।
सद्कर्मो की जोत जलाऊँ, जन-जन का कल्यान करूँ।

उसकी सेवा में जीवन हो, जो भी वंचित व्यक्ति मिले।
एक नहीं नौ माताओं की, मुझको अद्भुत शक्ति मिले ।

कदम-कदम पर असुर बढ़ गए, नारी में देवी उतरे।
दुष्टो का संहार करो माँ, पापी-मन कुछ तो सुधरे।

ऐसा मनुज बना माते,सद्कर्मो में आसक्ति मिले।।
एक नहीं नौ माताओं की, मुझको अद्भुत शक्ति मिले।

बल, बुद्धि, वैभव भी पाएं, स्वस्थ रहे तन-मन माते ,
पल-पल हो मंगलमय सबका, बने शुद्ध जीवन माते।

गढ़ूं एक सुन्दर दुनिया माँ, वही एक अनुरक्ति मिले।।
एक नहीं नौ माताओं की, मुझको अद्भुत शक्ति मिले।।

सप्ताह के कवि

श्री गिरीश पंकज
वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि रायपुर, छत्तीसगढ़

About hukum

Check Also

होली के रंग, प्रीत के संग

(१)तन के तार का मूल्य नही, मन का तार बस भीगे जबपूर्ण चंद्र हो रस …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *