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जानिए ऐसे राजा के विषय में जिसकी शौर्य गाथाओं के साथ प्रेम कहानी सदियों से लोक में प्रचलित है

प्राचीन कथालोक में कई गाथाएं हैं, जो दादी-नानी की कथाओं का विषय रहा करती थी। अंचल में हमें करिया धुरवा, सिंघा धुरवा, कचना घुरुवा आदि कई कथाएं सुनाई देती हैं। ये तत्कालीन दक्षिण कोसल में छोटे राजा हुए हैं, जिनके पराक्रम की कहानियाँ जनमानस में आज भी प्रचलित हैं। यह …

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बरषा काल मेघ नभ छाए, बीर बहूटी परम सुहाए

मानस में भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी से कहते हैं – बरषा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए। ग्रीष्म ॠतु की भयंकर तपन के पश्चात बरसात देवताओं से लेकर मनुष्य एवं चराचर जगत को सुहानी लगती है। वर्षा की पहली फ़ुहार के साथ प्रकृति अंगड़ाई लेती है और …

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बस्तर का गोंचा महापर्व : रथ दूज विशेष

बस्तर अंचल में रथयात्रा उत्सव का श्रीगणेश चालुक्य राजवंश के महाराजा पुरूषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के पश्चात् हुआ। लोकमतानुसार ओड़िसा में सर्वप्रथम राजा इन्द्रद्युम्न ने रथयात्रा प्रारंभ की थी, उनकी पत्नी का नाम ‘गुण्डिचा’ था। ओड़िसा में गुण्डिचा कहा जाने वाला यह पर्व कालान्तर में परिवर्तन के साथ बस्तर …

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रींवा गढ़ का पुरातात्विक उत्खनन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 25 किमी की दूरी पर रींवा गढ़ में एक टीले का उत्खनन हो रहा है। यहाँ उत्खनन के द्वारा इतिहास की किताब के अज्ञात पृष्ठ अनावृत हो रहे हैं। खुरपी से खुरचकर धरती की परतों के नीचे छिपा इतिहास परतों से बाहर लाया रहा है। …

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धरती के गर्भ से अनावृत हो रहा है प्राचीन नगर

राजा-रानी की कहानियाँ लोक का एक अंग है, दादी-नानी की कहानियों में भी राजा-रानी होते थे। जब किसी स्थल का पुरातात्विक उत्खनन प्रारंभ होता है। राजा-रानी एक बार फ़िर जीवित हो जाते हैं। कहीं राजा की मोतियों की माला मिलती है तो कहीं रानी का बाजूबंद और मुंदरी। फ़िर प्रमाण …

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अत्यावश्यक है प्राचीन पद्धति से वर्षा जल सरंक्षण

मानसून की पहली फ़ुहार के साथ वर्षा ॠतु आगमन हो गया है। मई-जून की भीषण गर्मी में जिस तरह लोगों ने जल संकट का सामना किया उसे देखकर लगता है कि आने वाले भविष्य में जल संकट भयानक रुप लेने वाला है। वर्षा जल का संग्रहण आवश्यक हो गया है। …

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भारत के ईंटो से निर्मित प्राचीन मंदिर

भारत में गुप्तकाल से मंदिर-देवालय निर्माण कार्य में भव्यता दिखाई देने लगती है। इस काल में प्रस्तर निर्मित मंदिरों की बहुलता दिखाई देती है। कुछ स्थानों पर ईष्टिका निर्मित मंदिर भी हैं, जो कि निर्माण कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। पकी लाल ईंटों से निर्मित ये मंदिर शिल्पकारों की …

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योगश्चित्त वृत्ति निरोध: योग दिवस विशेष

भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा योग है, यह विद्या भारत में प्राचीन काल से है और योगी जन के साथ सामान्य जन भी इसका लाभ उठा रहे हैं। योग न केवल आपके शरीर को रोगों से दूर रखता है बल्कि आपके मन को भी शांत रखने का काम करता है। …

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बस्तर की माड़िया जनजाति का गौर नृत्य एवं गौर

बस्तर की संस्कृति में पशु पक्षियों का बड़ा महत्व है, ये तोता, मैना, मुर्गा इत्यादि पक्षियों को का पालन तो ये करते ही हैं, इसके साथ इनके पारम्परिक नृत्यों में गौर के सींग का प्रयोग महत्वपूर्ण है। गौर के सींग का मुकुट बनाकर इसे नृत्य के अवसर पर पहना जाता …

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प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का पर्व वट सावित्री पूर्णिमा

आदि मानव सभ्यता के विकास के क्रम में ही प्रकृति का महत्व जान गया था, जिसमें नदी, पहाड़, वृक्ष, वन, वायु, अग्नि आकाशादि तत्वों की उसने पहचान कर ली थी और इनका प्रताप भी देख चुका था। इनको उसने देवता माना एवं इनकी तृप्ति का वैज्ञानिक साधन यज्ञ के रुप …

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