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छत्तीसगढ़ का सीतानदी अभयारण्य

सीतानदी अभयारण्य की स्थापना 1974 में हुई थी एवं इसका क्षेत्रफ़ल 553 .36 वर्ग किमी है। यहाँ की विशेषताओं में 1600 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा, तापमान न्यूनतम 8.5 से अधिकतम 44.5 डिग्री सेल्सियस पर रहता है।

सीतानदी के आधार पर अभयारण्य को सीतानदी नाम दिया गया है। जो कि अभयारण्य में उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है। सीतानदी की भूमि उबड़-खाबड़ एवं छोटी छोटी पहाड़ियों और साल वनों से आच्छादित है। यहाँ स्थित सालवन, देश के सर्वोत्कृष्ट वनों में से एक हैं।

अभयारण्य में सीधे तने वाले टीक के रोपित वन व साजा, बीजा, लेंडिया, हल्दू, धावड़ा, आँवला, तरई, अमलतास के मिश्रित भव्य वृक्ष बहुतायत में देखे जा सकते हैं।

उदंती अभयारण्य के समान ही सीतानदी अभयारण्य की भूमि भी घांस, पौधों  झाड़ियों आदि से ढंकी हुई है। बाँस वृक्ष यहाँ का सबसे प्रभावी और ध्यान आकर्षित करने वाला है।

सीतानदी के अलावा, अभयारण्य में सोंढूर एवं लिलांज नदी बहती है। इस पर सोंढूर बांध का निर्माण किया गया है।, जिसमें विशाल जलराशि संचित है। अभयारण्य में स्थित वन का बड़ा हिस्सा सोंढूर नदी की पानी की सतह से नीचे है। जिससे सीतानदी के वनों को नुकसान पहुंचता है। 

मगर साथ ही यहाँ बहुत बड़े जलाशय का निर्माण हो गया है। बदले हुए प्राकृतिक आवास के कारण यहाँ पेड़ पौधों एवं अन्य जीवों की कई प्रजातियों का विकास हुआ है।

चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर एवं सियार यहाँ आमतौर पर आसानी से देखे जा सकते हैं। तेंदूआ, भालू, जंगली कुत्ते,जंगली बिल्ली, साही, लोमड़ी, धारीदार लकड़बग्घा, गौर, चौंसिंगा एवं हिरण भी मिलते हैं।

यहाँ शेर भी हैं, परन्तु लोगों को कम ही दिखाई देते हैं।  पूरे अभयारण्य में घने वन का विस्तार होने से जंगली जानवरों को देखना मुश्किल हो जाता है।

सीतानदी अभयारण्य में 175 से अधिक प्रजाति के पक्षियों के होने का दावा किया जाता है। इनमें प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। जंगली मूर्गे, फ़ेजेन्ट, बुलबुल, डेरोंगो, कठफ़ोड़वा आदि यहाँ विशेषत: दिखाई देते हैं। उड़नेवाली गिलहरील एक लुप्तप्राय प्रजाति है, जो यहाँ दिखाई देती है।

खल्लारी स्थित वन विश्राम गृह, वाच टावर, सोंढूर डेम आदि दर्शनीय स्थल  हैं। अन्य पर्यटन स्थलों में अगस्त ॠषि, अंगिरा ॠषि, महर्षि गौतम, मुचकुंद ॠषि, शरभंग ॠषि एवं शृंगी ॠषि के आश्रम स्थल दर्शनीय हैं।

यह अभयारण्य भ्रमण के लिए 1 नवम्बर से 30 जून तक खुला रहता है तथा इसकी समुद्र तल ऊंचाई 736 मीटर है।

कैसे पहुंचे?

वायु मार्ग – रायपुर (175 किमी) निकटतम हवाई अड्डा है, जो मुंबई, दिल्ली, नागपुर, भुबनेश्वर, कोलकाता, रांची विशाखापत्तनम सहित देश के अनेकों हवाई अड्डों से जुड़ा है।

रेलमार्ग – हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर रायपुर समीपस्थ  रेल संपर्क है।

सड़क मार्ग– रायपुर से सार्वजनिक एवं निजी वाहन द्वारा सड़क मार्ग से नगरी, सिहावा, गरियाबंद, मैनपुर की यात्रा की जा सकती है।

आवास व्यवस्था – नगरी  गरियाबंद, मैनपुर में ठहरने के लिए  होटलों के अतिरिक्त पर्यटन मंडल के आवासीय भवन एवं रेस्ट हाऊस  भी हैं।

टीम दक्षिण कोसल

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