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तीज त्यौहार

मझवार वनवासियों में होती है पितर छंटनी

भारत में पितृ पूजन एवं तर्पण की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है, विभिन्न ग्रथों में इस पर विस्तार से लिखा भी गया है और पितृ (पितरों) के तर्पण की जानकारी मिलती है। सनातन समाज में अश्विनी मास के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक पितृपक्ष मनाया …

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सकल सृष्टि के कर्ता – भगवान विश्वकर्मा

वैदिक साहित्य ने सृष्टि का कर्ता भगवान विश्वकर्मा को माना है, इनके के अनेक रूप बताए जाते हैं- दो बाहु वाले, चार बाहु एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख एवं पंचमुख वाले। देवों के देव भगवान श्री विश्वकर्मा ने सदैव कर्म को ही सर्वोपरि बतलाया है। यह …

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छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक वैभव : भोजली गीत

लोक गीतों का साहित्य एवं अनुसंधान दोनों दृष्टियों से महत्व है। छत्तीसगढ़ अंचल ऐसे लोक गीतों से भरे-पूरे हैं, ग्राम्य एवं आदिम दोनों संस्कृतियों का घर है छत्तीसगढ़। गीत और नृत्य जहां एक ओर हमारे लिए मनोरंजन के साधन हैं, वहीं दूसरी ओर वे कला के विशिष्ट अवयव बन जाते …

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छत्तीसगढ़ का लोक पर्व : तीजा तिहार

भारतीय जीवन व संस्कृति में बड़ी विविधता है। इस विविधता का कारण यहाँ विभिन्न धर्मो और विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय है। कहीं-कहीं इस विविधता का प्रमुख कारण यहाँ की आंचलिक जीवन शैली और उसकी लोक संस्कृति भी है। किसी तीज त्यौहार या पर्वों के पीछे उसकी वैदिक मान्यता के स्थान …

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छत्तीसगढ के तिहार : गरभ पूजा एवं पोला

दुनिया के प्रत्येक भू-भाग की अपनी विशिष्ट पहचान एवं संस्कृति है, जो उसे अन्य से अलग पहचान देती है। इसी तरह छत्तीसगढ की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान एवं छवि है। प्राचीन सभ्यताओं को अपने आंचल में समेटे इस अंचल में विभिन्न प्रकार के कृषि से जुड़े त्यौहार मनाए जाते हैं। …

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छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार पोला

प्रकृति को सहेजती सनातन परंपरा और धार्मिक रीति-रिवाजों में हमारी भावनाएं मूर्त रूप ले लेती हैं, इन्हीं भावों को साकार करते हैं हमारे पर्व। भारत की गोधन संस्कृति में गाय और गोवंश जीवन जगत की मूलाधार रही है। गाय गौ माता और खेती किसानी में बैल किसानों के जीवन का …

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सनातन विश्व में पर्यावरण क्रांति के अग्रदूत : श्री कृष्ण

श्री कृष्ण जनमाष्टमी विशेष आलेख पर्यावरण संरक्षण की चेतना वैदिक काल से ही प्रचलित है। प्रकृति और मनुष्य सदैव से ही एक दूसरे के पूरक रहे हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना करना बेमानी है। वैदिक काल के ध्येय वाक्य “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की अभिधारणा लिए प्रकृति और मनुष्य …

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प्रथम नहर और बीज विज्ञानी: भगवान हलधर

हल षष्ठी पर विशेष भारतीय धर्म और संस्कृति में बलराम एक हिंदुओं के देवता और भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में पहचाने जाते है। जगन्नाथ परंपरा, त्रय देवताओं में से एक के रूप में वह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।उनके अन्य नामो के रूप में बलदेव,बलभद्र,बलदाऊ,बलभद्र, दाऊ, …

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विराट भारत का महा संकल्प दिवस : श्रावणी पर्व

भारत की कृषिप्रधान और ऋषि परम्परा की संस्कृति में त्योहारों और पर्व उत्सवों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही रह है। यहां बाराहोमास ऋतु, तिथि, कर्म, धर्मानुसार पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है ताकि जीवन मे रंग और उत्स बना रहे यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने …

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नागों का उद्भव एवं प्राचीन सभ्यताओं पर प्रभाव

नागपंचमी विशेष आलेख प्राचीनकाल में नागों की सत्ता पूरी दुनिया पर थी, जिसके प्रमाण हमें आज भी मिलते हैं। भूगोल की शायद ऐसी कोई संस्कृति या सभ्यता न हो जहाँ नागों का वर्चस्व या प्रभाव न दिखाई देता हो। चाहे भारतीय संस्कृति/सभ्यता हो, चाहे माया सभ्यता हो चाहे मिश्र की …

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