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मध्यकालीन इतिहास

चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर : कबीर जयंती विशेष

कबीर पंथ के चौदहवे आचार्य पंथ श्री गृन्धमुनिनाम साहब ने अपने ग्रंथ ‘सद्गुरु कबीर ज्ञान पयोनिधि’ की प्रस्तावना में लिखा है,- “संसार के लोग राख के ढेर पर ही पैर रखकर चलते हैं- जलती आग पर नहीं, किन्तु जो इसके ठीक विपरीत होते हैं, आग पर चलकर अग्नि परीक्षा देते …

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13 जून 1922 क्राँतिकारी नानक भील का बलिदान : सीने पर गोली खाई

किसानों के शोषण के विरुद्ध आँदोलन चलाया स्वतंत्रता के बाद भी अँग्रेजों के बाँटो और राज करो षड्यंत्र के अंतर्गत सोचने वालों के लिये बलिदानी नानक भील एक बड़ा उदाहरण है । बलिदानी नानक भील वनवासी थे लेकिन उन्होंने एक सशक्त किसान आँदोलन चलाया । प्रथम विश्व युद्ध के दौरान …

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चर्च की सत्ता के विरुद्ध उलगुलान के नायक बिरसा मुंडा

अमर क्रान्तिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 छोटा नागपुर कहे जाने वाले क्षेत्र में हुआ था। यह क्षेत्र अब झारखंड में है। उनकी माता सुगना देवी और पिता करमी मुंडा का गाँव झारखंड प्रांत के रांची जिले में पड़ता है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम साल्वा में हुई।अंग्रेजी शिक्षा …

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सामाजिक समरसता की पावन भूमि खल्लारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 75 कि मी, जिला मुख्यालय महासमुंद से 25 कि. मी. रायपुर-पदमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में अवस्थित खल्लारी मध्यकालीन ऐतिहासिक स्थल है। इस ऐतिहासिक स्थल के स्मरण में खल्लारी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का गठन हुआ है जो बागबाहरा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत है। इतिहासकार यहां …

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बंगाल के अंग्रेज कलेक्टर को गोली मारने वाली बहादूर बालिकाएं

14 दिसम्बर विशेष आलेख कोई कल्पना कर सकता है केवल चौदह वर्ष की दो बालिकाओं की वीरता की जिन्होंने अंग्रेजी राज में अंग्रेज कलेक्टर के कार्यालय में घुसकर गोली मारी और ढेर कर दिया। सुनीति चौधरी और शांति घोष दो ऐसी वीर बालिकाएँ थीं। जिन्हे कालापानी भेजा गया। आजकल त्रिपुरा …

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मध्यकालीन अंधकार में प्रकाश पूंज गुरु नानकदेव

एक राष्ट्र के रूप में भारत ने आज तक की अपनी निंरतर ऐतिहासिक यात्रा में अनेक उतार- चढ़ाव देखे हैं। इतिहास बताता है कि देश के सांस्कृतिक-आध्यात्मिक आधार के कारण किसी एक आध्यात्मिक विभूति की उपस्थिति ने समाज को गिरावट से उबारा है। तत्कालीन समाज में व्याप्त अज्ञानता, रूढ़ि और …

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मुगलों को धूल चटाने वाले वीर योद्धा – लचित बोरफ़ुकन

लचित बोरफुकन, जिन्हें ‘चाउ लासित फुकनलुंग’ नाम से भी जाना जाता है, 17वीं शताब्दी के एक महान और वीर योद्धा थे। उनकी वीरता के कारण ही उन्हें पूर्वोत्तर भारत का वीर ‘शिवाजी’ कहा जाता है। उन्होंने मुगलों के खिलाफ जो निर्णायक लड़ाई लड़ी थी, उसके लिए उन्हें आज भी याद …

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तुलसी धरयो शरीर

श्रावण शुक्ल सप्तमी गोस्वामी तुलसीदास जयंती विशेष आलेख भारतीय संस्कृति में कई ऐसे संतों ने जन्म लिया जिन्होंने न केवल अपने कार्यो से हिन्दूओं को जागृत किया वरन समाज की धारा को ही नया मार्ग दिखाने का कार्य किया। भक्तिकाल ये संत आज भी जनमानस में अपना स्थान बनाये रखते …

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औरंगजेब को पराजित कर अपनी शर्तें मनवाने वाले वीर दुर्गादास राठौड़

13 अगस्त 1668 – वीर ठाकुर दुर्गादास राठौड़ जन्म दिवस आलेख निसंदेह भारत में परतंत्रता का अंधकार सबसे लंबा रहा। असाधारण दमन और अत्याचार हुये पर भारतीय मेधा ने दासत्व को कभी स्वीकार नहीं किया। भारत भूमि ने प्रत्येक कालखंड में ऐसे वीरों को जन्म दिया जिन्होंने आक्रांताओं और अनाचारियों …

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रानी रंगा देवी एवं इतिहास का सबसे बड़ा जौहर

9 जुलाई 1301 से 11 जुलाई 1301 को रणथंबोर में जौहर सवाई माधोपुर से लगभग छह मील दूर रणथम्भौर दुर्ग अरावली पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा विकट दुर्ग है। रणथम्भौर का वास्तविक नाम रन्त:पुर है, अर्थात ‘रण की घाटी में स्थित नगर’। इस दुर्ग का निर्माण राजा सज्जन वीर सिंह नागिल …

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