संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव
पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026
व्यवसाय : लेखक भारतीय संस्कृति व रामायण परंपरा के कथाकार हैं, जो कॉरपोरेट अनुभवों के साथ पौराणिक प्रसंगों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हैं।
पता : हैदराबाद, तेलंगाना
चिदम्बरम का नटराज मन्दिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि पंचतत्त्व, चेतना और आत्मबोध का जीवित प्रतीक है। आनी उथिरम की आध्यात्मिक परम्परा के माध्यम से यह लेख पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश के मानव जीवन से सम्बन्ध तथा चिदम्बर रहस्यम के गूढ़ अर्थ को समझाता है।
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गुरु हरगोबिंद साहिब ने मीरी और पीरी के सिद्धान्त के माध्यम से सिख पन्थ को भक्ति, शक्ति, न्याय और आत्मरक्षा का नया जीवनदर्शन दिया। यह लेख उनके तेजस्वी जीवन, अकाल तख्त की स्थापना, सन्त-सिपाही परम्परा और बन्दी छोड़ बाबा के प्रेरक प्रसंग के माध्यम से उनकी अमर विरासत को प्रस्तुत…
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यह लेख तमिलनाडु स्थित गोष्ठिपुरम दिव्यदेशम् की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महिमा को रेखांकित करता है। इसमें आचार्य रामानुज की अट्ठारह यात्राओं, अहंकार-त्याग, गुरु-शिष्य परम्परा और जनकल्याण हेतु मोक्ष मन्त्र को जन-जन तक पहुँचाने की करुणामयी कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।
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यह लेख तमिल सन्त कवयित्री अव्वैयार की प्रसिद्ध रचना आठिचूड़ी के नैतिक सूत्रों, जीवन दर्शन और सांस्कृतिक महत्त्व को प्रस्तुत करता है। इसमें सत्य, विनम्रता, दानशीलता, क्रोध नियंत्रण, माता-पिता के सम्मान और चरित्र निर्माण जैसे शाश्वत मूल्यों की सरल व्याख्या की गई है।
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श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम, भगवान रंगनाथ की राजसी उपासना, श्रीवैष्णव परम्परा, आलवार संतों की भक्ति और भव्य द्रविड़ स्थापत्य का अद्वितीय संगम है। कावेरी तट पर स्थित यह पावन धाम ‘भूलोक वैकुंठ’ के रूप में पूजित है।
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राम नवमी के पावन अवसर पर प्रस्तुत यह कथा भरत के त्याग, संयम और राजधर्म के अद्वितीय आदर्श को उजागर करती है। श्रीराम की अनुपस्थिति में भरत ने खड़ाऊँ को सिंहासन पर स्थापित कर यह सिद्ध किया कि सच्चा शासन सत्ता नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और न्याय पर आधारित होता…
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