संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
यह लेख विष्णु के अवतारवाद की दार्शनिक और सांस्कृतिक व्याख्या करते हुए सृष्टि के विकास क्रम को मत्स्य से नृसिंह तक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से नृसिंहावतार के माध्यम से भक्त प्रहलाद की रक्षा, अहंकार के विनाश और दिव्य न्याय के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया…
Read More
रक्तिम पलाश केवल एक पुष्प नहीं, अपितु ऋतुराज बसंत का दैदीप्यमान उद्घोष है। वैदिक साहित्य, आयुर्वेद और लोकपरंपराओं में इसकी पावन महिमा विस्तृत रूप से प्रतिपादित है। जानिए कैसे यह वृक्ष भारतीय संस्कृति, साधना और प्रकृति-सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बना। सम्पूर्ण आलेख पढ़ने हेतु क्लिक करें ।
Read More
अजयमेरु की अजेय पर्वतीय अस्मिता, चौहान-कालीन स्थापत्य की गौरवगाथा, मुगलकालीन परकोटों की सामरिक संरचना तथा राजवंशीय हवेलियों का वैभव—इन सबका समन्वित इतिहास अजमेर की दीर्घ सांस्कृतिक चेतना का दर्पण है। इसके द्वारों और कोठियों में निहित विरासत को जानने हेतु पूर्ण आलेख अवश्य पढ़ें।
Read More
राजस्थान हमारी भारतीय संस्कृति का वह जीवंत केंद्र है, जहां आज भी भारतीय जीवन दर्शन का मूल दर्शन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यहां होने वाले उत्सव और मेले हमारी परंपरा और भारतीय संस्कृति की चेतना को समेटे हुए है। आइए जानते है, नागौर के विश्व प्रसिद्ध पशु…
Read More