संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
व्यवसाय : शिक्षक
पता : कवर्धा, छत्तीसगढ़
बैगा जनजातीय समुदाय में जंवारा नवरात्रि के दौरान मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान है, जो गांव की सुरक्षा, समृद्धि और देवी आराधना से जुड़ा है। इसमें जवारा बोने, जोत जलाने, जसगीत गाने और सामूहिक अनुष्ठानों के माध्यम से देवी शक्ति की उपासना की जाती है। अंत…
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छत्तीसगढ़ की बैगा जनजाति में 'बिदरी' कृषि से जुड़ा एक प्रमुख पर्व है। बीज बोने से पहले 'ठाकुर देव' की पूजा कर बीजों को अभिमंत्रित किया जाता है, ताकि अच्छी फसल हो और रोग न लगें। यह पूजा बैगा समुदाय की अटूट आस्था, एकता और प्रकृति प्रेम का जीवंत उदाहरण…
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छेरछेरा केवल पर्व नहीं, अन्न और आत्मसम्मान की सामूहिक साधना है। जहाँ धान का दान, श्रम का सम्मान और समानता का भाव एक साथ प्रकट होता है। धरती माता की करुणा से जन्मी यह परंपरा आज भी बाँटकर जीने का संस्कार सिखाती है।
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भारत के विशिष्ट संस्कृति को सहेज मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के गाँव कस्बों एवम शहरों में हरेली त्योहार को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं।
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Read Moreभारत की महान संस्कृति को छुद्र दिखाने के लिए विघ्न संतोषियों ने ऐसे झूठ फ़ैलाये जो कि सभ्य समाज के गले से नीचे नहीं उतरते। इनके झूठों को आगे बढ़ाने का कार्य इनके कुशिष्यों ने किया। जो कि कॉपी पेस्ट के रुप में अभी तक चल रहा है। इसमें एक…
वैदिक कालीन मानव का जीवन सोलह संस्कारों में विभक्त था एवं उसी के अनुसार उनके कार्य और व्यवहार थे। परन्तु जनजातीय समुदाय में संस्कार तो होते हैं पर सोलह संस्कारों जैसी कोई सामाजिक मान्यता नहीं है। जनजातीय समाज मुख्य रुप से जन्म, नामकरण, विवाह और मृत्यु संस्कार को मानता है…
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वनवासी संस्कृति में उत्सव मनाने के लिए नृत्य प्रधान होता है। जब भी कोई उत्सव मनाते हैं वहाँ नृत्य एवं गान आवश्यक हो जाता है। ढोल की थाप के साथ सामुहिक रुप से उठते हुए कदम अद्भुत दृश्य उत्पन्न करते हैं। यह नृत्य युवाओं को प्रिय है क्योंकि इससे ही…
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