संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
व्यवसाय : वरिष्ठ लेखक
पता : भोपाल मध्य प्रदेश
यह लेख महाराजा रणजीत सिंह के विश्वस्त सेनानायक सरदार हरि सिंह नलवा के जीवन, युद्ध-कौशल, कश्मीर-पेशावर विजय, जमरुद के बलिदान और उनके निर्माण कार्यों का प्रेरक वर्णन करता है।
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पृथ्वीसिंह आजाद (1892-1989) गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य और महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने अमेरिका, रूस और भारत में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। सेलुलर जेल में कठोर सजा भोगी। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा के सदस्य बने और 1977 में पद्म भूषण से सम्मानित हुए।
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यह लेख छत्तीसगढ़ के परलकोट संग्राम और अमर हुतात्मा गेंद सिंह के शौर्य की गाथा है। 1824 में उन्होंने समाज को एकजुट कर अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया। अपनी माटी की रक्षा हेतु उन्होंने फाँसी को गले लगाकर सर्वोच्च बलिदान दिया।
Read Moreराम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने संगठन, लेखन और सशस्त्र संघर्ष के ज़रिए देश की आज़ादी की नींव मज़बूत की। काकोरी कांड में उनके नेतृत्व ने अंग्रेज़ी हुकूमत की नींव हिला दी। उनकी लेखनी, संगठन क्षमता और बलिदान भारतीय युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा…
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31 अक्टूबर आधुनिक भारत के शिल्पी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है। लौह पुरुष के रूप में प्रसिद्ध पटेल ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई, बल्कि स्वतंत्र भारत के एकीकरण में भी अतुलनीय योगदान दिया। खेड़ा और बारडोली आंदोलन में किसानों की…
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गुरु पूर्णिमा: केवल ज्ञान के पूजन का नहीं, आत्मवोध और राष्ट्र स्वाभिमान के जागरण का पर्व। यह दिन उस परम् प्रेरक को समर्पित है जो अज्ञान के बादलों को हटाकर व्यक्ति को उसकी मौलिक प्रतिभा, संस्कृति और कर्तव्य का बोध कराता है। चाहे वह मनुष्य हो, ग्रंथ हो या भगवा…
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8 जनवरी 1026 को महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला कर भीषण लूट और नरसंहार किया। हजारों श्रद्धालुओं की हत्या हुई और महिलाओं को बंदी बनाकर गुलाम बनाया गया। आज का मंदिर स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल और के.एम. मुंशी के प्रयासों से पुनः निर्मित हुआ।
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अमर क्रान्तिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 छोटा नागपुर कहे जाने वाले क्षेत्र में हुआ था । यह क्षेत्र अब झारखंड में है । उनकी माता सुगना देवी और पिता करमी मुंडा का गाँव झारखंड प्रांत के रांची जिले में पड़ता है । उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम साल्वा…
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पाकिस्तान भारत का ही हिस्सा है, उसका जन्म भारत की भूमि पर हुआ, भारत के भूभाग पर ही पाकिस्तान अस्तित्व में आया । वहां रहने वाले लोग भी भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं । फिर भी वे लोग दिन रात भारत के विरुद्ध विष वमन और भारत को मिटाने का…
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28 अप्रैल 1740 सुप्रसिद्ध सेनानायक बाजीराव पेशवा का खरगौन में निधन
पिछले डेढ़ हजार वर्षों में पूरे संसार का स्वरूप बदल गया है। 132 देश एक राह पर, 57 देश दूसरी राह पर और अन्य देश भी अपनी अलग-अलग राहों पर हैं। इन सभी देशों उनकी मौलिक संस्कृति के कोई…
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26 अप्रैल 1858 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी बाबू कुँअर सिंह का बलिदान
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में ऐसे असंख्य बलिदानी हुये जिन्होंने न अपने परिवार की चिंता की न आयु बाधा बनी। वे भारत की स्वाधीनता के लिये न्यौछावर हो गये। ऐसे ही बलिदानी थे बाबू कुँअर सिंह, जिन्होंने हाथ में बंदूक…
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23 अप्रैल 1880 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी तेलंगा खड़िया का बलिदान
भारत पर आक्रमण चाहे सल्तनतकाल काल का रहा हो अथवा अंग्रेजीकाल का। वन्य अंचलों ने कभी दासत्व को स्वीकार नहीं किया और स्वाधीनता केलिए सदैव संघर्ष किया और बलिदान हुये। ऐसे ही संघर्ष के नायक हैं तेलंगा खड़िया जिन्होंने वनवासी…
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19 अप्रैल 1910 : तीन महान क्राँतिकारियों अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, विनायक नारायण देशपाँडे और कृष्ण गोपाल कर्वे का बलिदान
भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में अनंत वीरों का बलिदान हुआ है। कुछ के तो नाम तक नहीं मिलते और जिनके नाम मिलते हैं उनका विवरण नहीं मिलता। नासिक में ऐसे ही क्राँतिकारियों…
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18 अप्रैल 1859 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी तात्या टोपे का बलिदान
सुप्रसिद्ध बलिदानी तात्या टोपे संसार के उन विरले सेनानायकों में से एक हैं जिन्होंने न केवल एक विशाल क्रान्ति को संचालित किया अपितु क्राँति के समस्त नायकों का बलिदान हो जाने के बाद अपनी अकेली दम पर लगभग एक वर्ष…
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ। इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया। असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी। इस संघर्ष का सूत्रपात करने वाले स्वाभिमानी सिपाही मंगल पाण्डेय थे…
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6 अप्रैल 1929 : महाशय राजपाल का बलिदान
दासता के दिनों में भारतीय अस्मिता पर चौतरफा हमला हुआ है। आक्रांताओं ने केवल सत्ताओं को ही ध्वस्त नहीं किया अपितु भारतीय संस्कृति और साहित्य को भी विकृत करने का प्रयास किया है। एक ओर यदि भारतीय जन स्वाधीनता संघर्ष के लिये…
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3 अप्रैल 1988 : सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् वाकणकर पुण्यतिथि
डॉक्टर हरिभाऊ वाकणकर की गणना संसार के प्रमुख पुरातत्वविदों में होती है। उन्होंने भारत के विभिन्न वनक्षेत्र के पुरातन जीवन और भोपाल के आसपास लाखों वर्ष पुराने मानव सभ्यता के प्रमाण खोजे। भीम बैठका उन्ही की खोज है। उनके शोध के बाद…
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सार्वजनिक जीवन या पत्रकारिता में ऐसे नाम विरले हैं जिनका व्यक्तित्व व्यापक है और जो विभिन्न विचारों में समन्वय बिठा कर राष्ट्र और संस्कृति की सेवा में समर्पित रहे हों। ऐसे ही क्राँतिकारी पत्रकार थे गणेश शंकर विद्यार्थी। उन्हे उनके जीवन में और जीवन के बाद भी सब अपना मानते…
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17 मार्च 1527 : खानवा के युद्ध में अज्जा झाला का बलिदान
पिछले डेढ़ हजार वर्षों दुनियाँ के दो सौ देशों के स्वरूप और संस्कृति बदल गई। लेकिन विध्वंस की आँधी और विभाजन की त्रासदी के बीच भी भारत की संस्कृति अक्षुण्ण है। यह उन बलिदानियों के कारण संभव हो…
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4 मार्च 1939 सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी लाला हरदयाल का बलिदान
सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी और विचारक लाला हरदयाल की गणना उन विरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में होती है जिन्होंने केवल भारत ही नहीं अपितु अमेरिका और लंदन में भी अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध जनमत जगाया था।
लालाजी को अपने पक्ष में करने…
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फाल्गुन कृष्ण पक्ष सप्तमी : शबरी माता जयंती
भक्त शिरोमणि शबरी वनवासी भील समाज से थी। फिर भी मातंग ऋषि के गुरु आश्रम की उत्तराधिकारी बनी। रामजी ने उनके जूठे बेर खाये। यह कथा भारतीय समाज की उस आदर्श परंपरा का उदाहरण है कि व्यक्ति को पद, स्थान और सम्मान…
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1 मार्च 1924 : चार्ल्स ट्रेगार्ट को मौत के घाट उतारने का प्रयास
पराधीनता के दिनों में कुछ अंग्रेज अधिकारी ऐसे थे जो अपने क्रूरतम मानसिकता के चलते भारतीय स्वाधीनता सेनानियों से अमानवीयता की सीमा भी पार जाते थे। बंगाल में पदस्थ ऐसा ही अधिकारी चार्ल्स ट्रेगार्ट था। जिसे मौत…
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27 फरवरी 2010 में सुप्रसिद्ध राष्ट्रसेवी भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि
हजार वर्ष की दासता के अंधकार के बीच यदि आज राष्ट्र और संस्कृति का वट वृक्ष पुनः पनप रहा है तो इसके पीछे उन असंख्य तपस्वियों का जीवन है जिन्होंने अपना कुछ न सोचा। जो सोचा वह राष्ट्र…
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26 फरवरी 1966 : स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा है। एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया। दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से…
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23 फरवरी 1568 : रानी फूलकुँअर के साथ आठ हजार वीरांगनाओं ने किया था अग्नि प्रवेश
भारत राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिये केवल युद्ध के मैदान में ही बलिदान नहीं हुये अपितु हजारों लाखों महिलाओं ने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा केलिये अग्नि में प्रवेश करके अपना बलिदान…
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अंग्रेजों के विरुद्ध 1857 की सशस्त्र क्रान्ति के बारे सब जानते हैं। निसंदेह वह एक संगठित अभियान था पर इससे पहले भी स्थानीय स्तर पर अनेक सशस्त्र संघर्ष हुये हैं। इससे पहले ऐसा ही एक सशस्त्र आन्ध्र प्रदेश में हुआ था जिसके नायक थे नरसिंह रेड्डी। क्रांति से अंग्रेजी सेना…
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20 फरवरी 1986 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुण्यतिथि
भाई उद्धवदास जी मेहता देश के उन विरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में एक हैं जो दस वर्ष की बालवय में स्वाधीनता संघर्ष केलिये सामने आये और पन्द्रह वर्ष की आयु में बंदी बनाये गये। उनका सारा जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र…
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18 फरवरी 1931 : लेखन के साथ सक्रिय आँदोलन में भागीदारी
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनेक बलिदानी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने लेखन से जनमत जगाया, युवकों को क्राँति के लिये संगठित किया और स्वयं विभिन्न आँदोलनों में सीधी सहभागिता की और बलिदान हुये । सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित…
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15 फरवरी 1882 को जन्मे बद्रीदत्त पांडेय का पूरा जीवन राष्ट्र और संस्कृति रक्षा को समर्पित
जिस प्रकार प्रातःकालीन सूर्योदय के लिये करोड़ो पलों की उत्सर्ग होता है उसी प्रकार भारत राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिये भी करोड़ो जीवन के बलिदान हुये हैं । कुछ नाम सामने आ रहे हैं…
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भारतीय स्वाधीनता के संघर्ष में कितने बलिदान हुये इसका विस्तृत वर्णन कहीं एक स्थान पर नहीं मिलता। जिस क्षेत्र के इतिहास पर नजर डालों वहाँ संघर्ष और बलिदान की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ मिलती हैं। ऐसी ही कहानी क्राँतिकारी बुधु भगत की है जिन्होंने जीवन की अंतिम श्वाँस…
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11 फरवरी 1750 क्रांतिकारी तिलका मांझी जन्म दिवस विशेष
भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में वीरता और बलिदान की अद्भुत घटनायें दर्ज हैं। ऐसे ही एक बड़े संघर्ष का विवरण संथाल परगने में मिलता है। जिसके नायक वनवासी तिलका मांझी थे। जिन्हें अंग्रेजों ने चार घोड़ो से बाँध कर जमीन…
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10 फरवरी 1993 : का निधन, स्वतंत्रता के बाद जन आंदोलन में दो वर्ष जेल में रहे
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में कुछ ऐसे सेनानी हुये जिनका पूरा जीवन संघर्ष में बीता। पहले स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजों से संघर्ष किया और स्वतंत्रता के बाद जन समस्याओं के निवारण के लिये…
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गौरक्षा का ऐतिहसिक आँदोलन इन्हीं नेतृत्व में हुआ
धर्म सम्राट करपात्रीजी महाराज एक महान सन्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका पूरा जीवन भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना और स्वत्व जागरण के लिये समर्पित रहा। इतिहास प्रसिद्ध गौरक्षा आँदोलन उन्हीं के आव्हान पर हुआ था। वे उतना ही भोजन ग्रहण करते…
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6 फरवरी 1915 : कवि प्रदीप का जन्म दिवस मध्यप्रदेश के बड़नगर में
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में करोड़ो प्राणों के बलिदान हुये । ये बलिदान साधारण नहीं थे । पर इन बलिदानों केलिये आव्हान करने वाले शब्द साधकों की भी एक धारा रही है जिन्होंने अपने शब्दों की शैली और…
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स्वाधीनता के लिये संघर्ष जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण है समाज में स्वत्व जागरण का अभियान। यदि स्वत्ववोध नहीं होगा तो स्वतंत्रता की चेतना कैसे जाग्रत होगी। अपने लेखन से स्वत्व चेतना का यही अभियान चलाया आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने। उन्होने अपना सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम से आरंभ किया…
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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनकी यशगाथा रामायण केवल भारत में नहीं अपितु पूरे संसार रची बसी है। बीस से अधिक देशों में उनकी अपनी लोकभाषा में रामायण उपलब्ध है। अनेक देशों के पुरातात्विक अनुसंधान में राम सीता जैसी छवियाँ, काष्ठ या भीति चित्र मिले हैं।
राम और रामायण की…
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गणतंत्र दिवस विशेष आलेख
26 जनवरी भारत के लिये अति पवित्र दिन है। यह भारत के गणतंत्र का उत्सव दिवस है। दासत्व के एक लंबे अंधकार के बाद भारतीय जीवन में अपना संविधान आया था। भारतीय गणतंत्र की वर्षगाँठ के साथ इस दिन एक और गौरव मयी स्मृति जुड़ी…
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21 जनवरी 1943 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी हेमू कालाणी बलिदान दिवस
भारतीय सवाधीनता संग्राम असंख्य बलिदानों का इतिहास है। हजारों लाखों जीवन की आहूति के बाद ही भारत में स्वतंत्रता का सूर्य उदित हो सका। ऐसे ही एक अमर बलिदानी हैं हेमू कालाणी। संभवतः उनका जन्म ही स्वाधीनता संग्राम के लिये हुआ…
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भारत को अंग्रेजों से मुक्ति सरलता से नहीं मिली। पूरा देश मानों भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने उठ खड़ा हुआ था। क्या नगर वासी, क्या ग्राम वासी और क्या वनवासी। सभी क्षेत्रों में क्रान्ति की ज्वाला धधक उठी। ऐसे ही क्राँतिकारी थे वनवासी गेंद सिंह जिन्होने छत्तीसगढ के बस्तर…
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हिन्दू वीर महाराणा प्रताप पुण्यतिथि 19 जनवरी विशेष आलेख
भारतीय इतिहास के एक प्रकाशमान नक्षत्र हैं चित्तौड़ के राणा प्रताप। जो न किसी प्रलोभन से झुके और न किसी बड़े आक्रमण से भयभीत हुये। उन्होंने स्वाधीनता और स्वाभिमान के लिये जीवन भर संघर्ष किया और अकबर को पराजित किया।
मुगल…
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17 जनवरी 1601 : मुगलों की लूट का क्रूर रक्त रंजित इतिहास
बचपन की पाठ्यपुस्तकों में मुगल बादशाह अकबर को महान पढ़ा था। उन पुस्तकों में कुछ उदाहरण भी थे। इस कारण अकबर को और समझने की जिज्ञासा सदैव बनी रही। आगे चलकर उनकी महानता की अनेक कहानियाँ भी पढ़ी…
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अपने जन्मस्थान अयोध्या में अब रामलला विराजने जा रहे हैं। यह क्षण असाधारण संघर्ष और बलिदान के बाद आया है। जितने आक्रमण अयोध्या पर हुये और बचाने लिये जितने बलिदान अयोध्या में हुये ऐसा उदाहरण विश्व के इतिहास में कहीं नहीं मिलता। सनातनी समाज की हजारों पीढ़ियाँ यह सपना संजोये…
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12 जनवरी 1934 : दो क्राँतिकारियों सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त का बलिदान
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास साधारण नहीं है। इसमें बलिदान के कुछ ऐसे प्रसंग भी हैं जिन्हें पढ़कर आत्मा काँप उठती है। क्राँतिकारी सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त को फाँसी देने से पहले अमानवीय यातनाएँ दी गई, हथौड़े से…
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10 जनवरी 1760 दत्ता जी शिन्दे बलिदान
भारतीय स्वतंत्रता का संघर्ष साधारण नहीं है। इसमें असंख्य बलिदान हुये हैं और सबसे बड़ी त्रासदी यह कि बाह्य आक्रमणकारियों की सहायता अनेक स्वदेशी राजाओं और सेनानायकों ने की है। विदेशी आक्रांता यदि भारत में सफल हुये हैं तो स्थानीय लोगों की सहायता…
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7 जनवरी 1738 : भोपाल युद्ध और दोराहा संधि
इतिहास के पन्नों में एक ओर आक्रांताओं के क्रूरतम अत्याचार और विध्वंस का वर्णन है तो दूसरी ओर भारतीयों के शौर्य का विवरण भी। भोपाल के समीप हुआ यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें मुगल, निजाम हैदराबाद, अवध एवं भोपाल नबाब…
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5 जनवरी 1880 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी बारीन्द्रनाथ घोष का जन्म दिवस
अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिये जिन क्राँतिकारियों ने अपनी स्वर्णिम सुख सुविधा का परित्याग करके बहुआयामी संघर्ष किये और जेल गये उनमें बारीन्द्र घोष भी हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष संघर्ष तो किया ही साथ ही जन जागरण के…
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एक जनवरी से अंग्रेजो का नया साल आरंभ हो रहा है, पूरी दुनियाँ वर्ष 2024 में प्रवेश करेगी। समय नापने की यह पद्धति ग्रेगोरियन कैलेण्डर के अनुसार है। पर यह ग्रेगोरियन कैलेण्डर पद्धति 2023 वर्ष पुरानी नहीं है। यह केवल 442 वर्ष पुरानी है और भारत में इसे लागू हुये…
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1 जनवरी 1670 : वीर गोकुल सिंह जाट बलिदान दिवस
स्वाधीनता और स्वाभिमान के संघर्ष में असंख्य बलिदान हुये हैं। इतिहास की पुस्तकों में उनका विवरण नगण्य मिलता है। ऐसा ही बलिदान तिलपत में वीर गोकुल सिंह जाट का हुआ। यह बलिदान साधारण नहीं था। बंदी बनाकर ऐसी क्रूरतम मौत…
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30 दिसम्बर 1887 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लेखक और पत्रकार के एम मुंशी का जन्म दिवस
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में कुछ ऐसी दूरदर्शी विभूतियाँ रहीं हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिये सार्वजनिक संघर्ष किया, अनेक बार जेल गये और इसके साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों की पुर्नप्रतिष्ठा का अभियान भी चलाया। ऐसे…
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दिसम्बर माह की 21 से लेकर 27 के बीच गुरु गोविन्द सिंह के चारों पुत्रों को दी गई क्रूरतम यातनाओं और बलिदान की स्मृतियाँ तिथियाँ हैं। ऐसा उदाहरण विश्व के किसी इतिहास में नहीं मिलता। इनमें 26 दिसम्बर के दिन दो अबोध साहबजादों का बलिदान हुआ। ये बलिदान राष्ट्र और…
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23 दिसम्बर 1926 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी स्वामी श्रृद्धानंद का बलिदान दिवस
आर्यसमाज के प्रखर वेदज्ञवक्ता, उच्चकोटि के अधिवक्ता, ओजस्वी वक्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्राँतिकारियों की एक पूरी पीढ़ी तैयार करने वाले स्वामी श्रृद्धानंद की हत्या केवल एक धर्मान्ध कट्टरपंथी द्वारा की गई, हत्या भर नहीं थी बल्कि वह एक ऐसे…
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अयोध्या में भव्य आकार ले रहे रामजन्म स्थान मंदिर ने अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले लिया है। पूरी दुनियाँ में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा दिवस की अधीरता से प्रतीक्षा की जा रही है। निर्माण के लिये 155 देशों से जल आया है, अमेरिका से एक श्रृद्धालु ने दान भेजा है तो…
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19 दिसम्बर 1927 क्रांतिकारी बलिदान विशेष
भारत की स्वतंत्रता के लिये कितने बलिदान हुये, कितने क्राँतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी इसका समूचा विवरण इतिहास की पुस्तकों से भी नहीं मिलता। अंग्रेजों के सामूहिक अत्याचार से बलिदान हुये निर्दोष नागरिकों के आकड़े निकाल दें तब भी अंग्रेजों ने जिन्हें…
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14 दिसम्बर विशेष आलेख
कोई कल्पना कर सकता है केवल चौदह वर्ष की दो बालिकाओं की वीरता की जिन्होंने अंग्रेजी राज में अंग्रेज कलेक्टर के कार्यालय में घुसकर गोली मारी और ढेर कर दिया। सुनीति चौधरी और शांति घोष दो ऐसी वीर बालिकाएँ थीं। जिन्हे कालापानी भेजा गया।
आजकल…
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12 दिसंबर 1896 : सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबा राघवदास का जन्म
संत राघवदास स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक और एक ऐसे आध्यात्मिक कार्यकर्ता थे। जिनका पूरा जीवन समाज की सेवा और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा। उनका आश्रम क्राँतिकारियो और अहिसंक आँदोलनकारी दोनों की गतिविधि स्थल था। वे…
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8 दिसम्बर 1894 : निर्भीक चिंतक और इतिहासकार वैद्य गुरुदत्त का जन्म दिवस
भारत को स्वतंत्र हुये सत्तहत्तर वर्ष हो गये हैं पर अभी भी ऐसी जन भावना मुखर नहीं हो सकी जो उन राष्ट्रसेवियों का खुलकर सम्मान करे जिन्होने राज्याश्रय की बिना परवाह किये परतंत्रता के अंधकार के बीच…
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1 दिसम्बर 1885 : सुविख्यात शिक्षाशास्त्री, पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काका कालेलकर का जन्म दिवस
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में कुछ सेनानी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपना संघर्ष केवल राजनैतिक अथवा अंग्रेजों से मुक्ति तक ही सीमित न रखा अपितु उन्होंने जीवन भर स्वाभिमान और सामाजिक जागरण का अभियान चलाया…
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स्वतंत्रता आँदोलन के अग्रणी नेताओं में "लाल, बाल, पाल" के रूप "त्रिदेव" के नाम आते हैं जिन्होंने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण स्वदेशी का नारा लगाया था। विपिनचंद्र पाल इन "त्रिदेव" में से एक थे और अन्य दो लाला लाजपतराय एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे।
इन्हीं त्रिदेव ने…
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4 नवम्बर 1870 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भाई परमानन्द का जन्म दिवस विशेष
सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भाई परमानन्द का जन्म 4 नवम्बर 1870 को झेलम जिले के करियाला गाँव में हुआ। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान मे है। भाई जी के परिवार की पृष्ठभूमि राष्ट्र और संस्कृति के लिये बलिदान की रही है…
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महर्षि वाल्मीकि का जन्म शरद पूर्णिमा को हुआ था। वे भारत की उन विरली विभूतियों में से एक हैं, जिन्हें हर समाज अपना पूर्वज मानता है। ब्राह्मण समाज ऋषि पुत्र मानता है तो भील वनवासी समाज उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं, दलित वर्ग में तो वाल्मीकि समाज की गणना होती…
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26 अक्टूबर 2000 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी और लेखक मन्मन्थनाथ गुप्त पुण्यतिथि विशेष
सुप्रसिद्ध साहित्यकार और क्राँतिकारी मन्मन्थनाथ गुप्त ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिनकी गिरफ्तारियाँ तीनों कार्यों में हुई। क्राँति के प्रचार में, क्राँति में सहभागिता में और साहित्य रचना में भी। उनकी पहली गिरफ्तारी तेरह वर्ष की आयु में हुई…
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सनातन परंपरा में मनाये जाने वाले तीज त्यौहार केवल उत्सव भर नहीं होते उनमें जीवन को सुन्दर बनाने का संदेश होता है। दशहरा उत्सव में भी संदेश है। यह संदेश है व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र की समृद्धि का जो इसकी कथा और उसे मनाने के तरीके से बहुत स्पष्ट…
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12 अक्टूबर 1909 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और संत रामचंद्र वीर का जन्म दिवस
स्वामी रामचंद्र वीर एक ऐसे संत और राष्ट्रीय संस्कृति के लिये समर्पित विभूति थे जिन्होंने दासत्व काल में जहाँ स्वतंत्रता के लिये संघर्ष किया तो स्वतंत्रता के बाद स्वत्व, स्वाभिमान और सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना के…
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9 अक्टूबर 1885 सुप्रसिद्ध संत और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी का जन्म दिवस
भारतीय स्वतंत्रता के लिये जितना संघर्ष प्रत्यक्ष आँदोलन के लिये हुआ उससे कहीं अधिक उस अप्रत्यक्ष संघर्ष में जीवन समर्पित हुये जिन्होंने स्वाधीनता आँदोलन में तो भाग लिया ही साथ ही भारतीय संस्कृति के मानविन्दुओं और…
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सामान्यतः हम रानी दुर्गावती को गोंडवाना की महारानी के रूप में जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उन्होंने अकबर के आक्रमण का पुरजोर उत्तर दिया था। वे आसफ खाँ की उस कुटिल रणनीति का शिकार बनीं थीं जो उसने जबलपुर के नरई नाले पर धोखे की जमावट की…
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27 सितम्बर 1310 सिवाणा में पहला जौहर
मध्यकाल में हुये भीषण विध्वंस और नरसंहार के बीच रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐसी अगणित वीरगाथाएँ हैं जिनमें अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा केलिये क्षत्रियों ने केशरिया बाना धारण कर बलिदान दिया और क्षत्राणियों ने अपनी सखी सहेलियों सहित अग्नि में…
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25 सितम्बर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म दिवस विशेष आलेख
विश्व की आधुनिक शासन प्रणालियों में बहुत से बहुत से सिद्धांत सामने आये। इन सिद्धातों को सूत्र रूप प्रस्तुत करने के लिये कुछ शब्द भी आये। जैसे साम्यवाद, पूँजीवाद, समाजवाद, आदि। दीनदयाल जी ने इन सबकों अपूर्ण और अव्यवहारिक बताया और…
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24 सितम्बर बलिदान दिवस विशेष आलेख
भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में ऐसे असंख्य बलिदान हुये जिनका इतिहास की पुस्तकों में वर्णन शून्य जैसा है। जबकि उनक कार्य स्वर्णाक्षरों में उल्लेख करने लायक हैं। इनमें से एक हैं महिला क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार जिन्होंने 24 सितम्बर 1932 में अंग्रेजों की पुलिस से…
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भाषा का लेकर चंदन, आओ कर लें अभिनंदन
की गर्व से हिन्दी बोलें, चलो हिन्दी के हो लें
संपूर्ण विश्व में एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जो न केवल भौगोलिक क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से विशाल है अपितु हमें तो इस बात का भी गर्व है कि हमारे…
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गणेश जी के स्वरूप और उत्सव में परिवार के समन्वय, समाज की जागरुकता, सशक्तीकरण और नेतृत्वकर्ता के लिये कुशलता का अद्भुत संदेश है। नेतृत्व कर्ता का व्यक्तित्व कैसा हो, व्यवहार कैसा हो, कार्य क्षमता कैसी हो। यह सभी संदेश गणेशोत्सव के माध्यम से दिये गये हैं।
गणेश जी को हम…
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18 सितम्बर 1958 : डा.भगवान दास का निधन, स्वतंत्रता के बाद पहला "भारत रत्न" सम्मान
भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास ऐसे विविध सेनानियों से भरा है जो अपने स्वर्णिम जीवन स्तर का परित्याग करके आँदोलनकारी बने और जेल गये। डॉ भगवान दास ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्होंने डिप्टी कलेक्टर…
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क्राँतिकारी महावीर सिंह राठौर का जन्म दिवस 16 सितम्बर विशेष
जेल की प्रताड़ना से हुआ था बलिदान कोई कल्पना कर सकता है ऐसे मानसिक दृढ़ संकल्प की कि पुलिस की हजार प्रताड़नाओं के बाद भले प्राण चले जायें पर संकल्प टस से मस न हो। ऐसे ही संकल्पवान क्राँतिकारी थे…
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भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में जितना योगदान सार्वजनिक संघर्ष करने वाले राजनेताओं का है उससे कहीं अधिक उन संतों का भी है जिन्होंने सार्वजनिक संघर्ष में तो सहभागिता की और जेल गये पर अपना पूरा जीवन सामाजिक और साँस्कृतिक जागरण के लिये समर्पित किया। स्वामी ब्रह्मानंद जी ऐसे ही…
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11 सितम्बर, 1893 विश्वबंधुत्व दिवस विशेष आलेख
अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ।उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद्, अध्याय ६, मंत्र ७१)यह नीति वाक्य सदियों से हमारी प्राचीन सनातन संस्कृति और भारतवर्ष के श्रेष्ठ चरित्र का परिचायक है। विश्व के इतिहास में एक स्वर्णिम कालखण्ड ऐसा भी रहा है जब भारत…
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3 सितम्बर 1857 चौदह वर्षीय बालिका अंग्रेजों ने कठोर यातनाएँ देकर जिन्दा जलाया
पराधीनता काल के भीषण अत्याचारों से केवल सल्तनकाल का इतिहास ही रक्त रंजित नहीं है, अंग्रेजी शासन काल में भी दर्जनों ऐसी क्रूरतम घटनाएँ इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं जिन्हें पढ़कर आज भी प्रत्येक भारतीय आत्मा…
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2 सितंबर 2000 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल का निर्वाण दिवस
Read Moreश्रीकृष्ण सरल की कविता ग्यारहवीं की हिन्दी पाठ्य पुस्तक में थी, हम उसे पढ़ते थे। 1983 में एक दिन श्रीकृष्ण सरल जी स्वयं मेरे स्कूल में पधारे। क्लास में आकर उन्होंने "अमर शहीदों का चारण" नामक कविता…
29 अगस्त 1880 : सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माधवहरि अणे जन्म दिवस
माधव श्रीहरि अणे में बिना लाग लपेट के अपना अभिमत प्रकट करने का उनमें अनुपम साहस था। जनता श्रद्धा से उन्हें लोकनायक के नाम से संबोधित करती थी। जैसे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक वैसे ही उनके प्रधान शिष्य…
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क्रांतिकारी बीनादास का जन्म 24अगस्त 1911
स्वतंत्रता के जो सुनहरे दिन हम आज देख रहे हैं उसके पीछे कितने बलिदान हुये और कितने बलिदानियों की क्या गति बनीं इसका आज की पीढ़ी को होश तक नहीं। ऐसी ही बलिदानी हैं क्राँतिकारी बीनादास। जिन्होंने बंगाल के अत्याचारी गवर्नर स्टेनली को गोली…
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अगस्त 1946 : पाकिस्तान की माँग के लिये मुस्लिम लीग का डायरेक्ट एक्शन
पन्द्रह अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता और यह वर्तमान स्वरूप सरलता से नहीं मिला। यह दिन मानों रक्त के सागर से तैरकर आया है। बलिदानियों ने जितना बलिदान विदेशी आक्रांताओं से मुक्ति के लिये दिया। उतना ही…
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17 अगस्त 1909 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मदन लाल ढींगरा का बलिदान
स्वत्व और स्वाभिमान रक्षा के लिये क्राँतिकारियों ने केवल भारत की धरती पर ही अंग्रेज अधिकारियों को गोली मारकर मौत की नींद नहीं सुलाया अपितु लंदन में भी क्रूर अंग्रेजों के सीने में गोली उतारी है। क्राँतिकारी मदन लाल…
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14 अगस्त : भारत विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस
संसार में भारत अकेला ऐसा देश है जिसका इतिहास यदि सर्वोच्च गौरव से भरा है तो सर्वाधिक दर्द से भी। यह गौरव है पूरे संसार को शब्द, गणना और ज्ञान विज्ञान से अवगत कराने का और दर्द है निरंतर आक्रमणों और अपनी…
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13 अगस्त 1668 - वीर ठाकुर दुर्गादास राठौड़ जन्म दिवस आलेख
निसंदेह भारत में परतंत्रता का अंधकार सबसे लंबा रहा। असाधारण दमन और अत्याचार हुये पर भारतीय मेधा ने दासत्व को कभी स्वीकार नहीं किया। भारत भूमि ने प्रत्येक कालखंड में ऐसे वीरों को जन्म दिया जिन्होंने आक्रांताओं और अनाचारियों…
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12 अगस्त 1942 : क्राँतिकारी लाल पद्मधर सिंह और बालवीर रमेशदत्त का बलिदान
स्वतंत्रता आँदोलन में संघर्ष की अहिसंक धारा में भी सैकड़ों बलिदान हुये हैं। 1942 के भारत छोड़ो आँदोलन में ही देश के पचास से अधिक स्थानों पर गोलियाँ चलीं और सौ से अधिक सेनानी बलिदान हुये। अंग्रेजों…
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हुतात्मा खुदीराम बोस बलिदान दिवस विशेष आलेख
दुनियाँ में ऐसा कोई देश नहीं जो कभी न परतंत्रता के अंधकार में डूबा न हो। उनमें अधिकांश का स्वरूप ही बदल गया। उन देशों की अपनी संस्कृति का आज कोई अता पता नहीं है। लेकिन दासत्व के लंबे अंधकार के बाद भी…
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भारत को स्वतंत्रता सरलता से नहीं मिली। इसके लिये असंख्य बलिदान हुये हैं। यह बलिदान दोनों प्रकार के। एक वे जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया और दूसरे वे जिन्होंने देश स्वाधीनता का जन जागरण करने के लिये अपने संपूर्ण जीवन का समर्पण किया।
श्यामलाल जी गुप्त ऐसे ही महामना…
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भारत के स्वाधीनता आँदोलन में 9 अगस्त वह ऐतिहासिक तिथि है जब स्वतंत्रता के लिये निर्णायक संघर्ष का उद्घोष हुआ था। इसलिए इसे अगस्त क्रान्ति कहा जाता है।
स्वाधीनता आँदोलन के इतिहास में यह नौ अगस्त की तिथि दो महत्वपूर्ण स्मृतियों से जुड़ी है। पहली तिथि 9 अगस्त 1925 है…
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जो सशस्त्र क्राँतिकारी सामने आये और उनके जीवन का बलिदान हुआ। इनके साथ ऐसे क्राँतिकारी भी असंख्य हैं जिन्होंने क्राँतिकारियों को शस्त्र और अन्य साधन उपलब्ध कराये। इनमें एक प्रमुख नाम प्रेमकृष्ण खन्ना हैं। जिन्होंने न केवल चंद्रशेखर आजाद को माउजर पिस्टल उपलब्ध कराई अपितु काकोरी…
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वेद-वेदांग की पुर्नप्रतिष्ठा और सांस्कृतिक जागरण के लिये समर्पित जीवन
भारत राष्ट्र के सांस्कृतिक गौरव का मूल वेद-वेदांग है। इसलिए विदेशी आक्रांताओं ने वेदों और उनकी महत्ता को धूमिल करने का प्रयत्न किया किंतु समय समय पर ऐसी विलक्षण विभूतियों ने जन्म लिया जिन्होंने अपना वेद-वेदांग के माध्यम से भारत…
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31 जुलाई 1940 : क्रान्तिकारी ऊधमसिंह का बलिदान दिवस
कुछ क्रांतिकारी ऐसे हुए हैं जिन्होंने शांति के जगह क्रांति का रास्ता अपनाया, उन्होंने अंग्रेजों की नेस्तनाबूत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, ऐसे ही क्रान्तिकारी थे ऊधमसिंह, जिनको लंदन में 31 जुलाई 1940 को फांसी दी गई थी। सरदार…
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अंग्रेजी सत्ता ने भारत में अपनी जड़ों को गहरा करने के लिये व्यापार को माध्यम बनाया था। उन्होंने पहले विदेशी वस्तुओं का आकर्षण पैदा किया फिर स्वदेशी उत्पाद का दमन किया। 1857 में क्रान्ति की असफलता के बाद इस तथ्य अनेक महापुरुषों ने पहचाना उनमें सबसे प्रमुख थे गणेश वासुदेव…
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महान क्राँतिकारी चन्द्रशेखर आजाद एक ऐसे विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे कि उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध भारत के संपूर्ण क्राँतिकारी आँदोलन कारियों को एकजुट किया तथा बंगाल से पंजाब तक अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला दीं। उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के अंतर्गत ग्राम…
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22 जुलाई, बलिदान दिवस विशेष आलेख
भारत तो स्वतंत्रता सैकड़ों वर्षों के संघर्ष एवं लाखों की संख्या में बलिदानों को उपरांत प्राप्त हुई। जिनमें कुछ बलिदानियों का नाम तो लोग जानते हैं परन्तु असंख्य ऐसे हैं, जिनके विषय में बहुत कम ही ज्ञात हो पता है। हम प्रसिद्ध एवं सिद्ध…
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17 से 21 जुलाई 1857 : अंग्रेजों द्वारा कानपुर में भीषण नरसंहार
जलियाँवाला बाग में हुये सामूहिक नरसंहार को सब जानते हैं। पर अंग्रेजों ने इससे पहले और इससे भीषण नरसंहार भी किये हैं। इनमें एक भीषण नरसंहार जुलाई 1857 को कानपुर में हुआ। इसमें लगभग बीस हजार से अधिक…
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भारतीय इतिहास में ज्ञात होता है कि जिन लोंगो ने हमें स्वतंत्र बनाने के लिये अपना जीवन न्योछावर किया, अंग्रेजों की अमानवीय यातनाएं सहीं उनके साथ स्वतंत्रता के बाद भी कैसा व्यवहार हुआ। इनमें से एक हैं सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी बटुकेश्वर दत्त।
उन्हें स्वतंत्रता के बाद भी आजीविका के लिये भीषण…
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इस वर्ष 18 जुलाई से अधिकमास आरंभ हो रहा है जो 16 अगस्त तक रहेगा। भारतीय पंचांग का यह पुरुषोत्तम मास का विधान विज्ञान के निष्कर्ष, और आध्यात्म की साधना और समाज समन्वित स्वरूप रचना का अद्भुत निष्कर्ष है। विज्ञान की दृष्टि से अधिकमास की यह अवधि जहाँ सूर्य और…
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9 जुलाई 1301 से 11 जुलाई 1301 को रणथंबोर में जौहर
सवाई माधोपुर से लगभग छह मील दूर रणथम्भौर दुर्ग अरावली पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा विकट दुर्ग है। रणथम्भौर का वास्तविक नाम रन्त:पुर है, अर्थात ‘रण की घाटी में स्थित नगर’। इस दुर्ग का निर्माण राजा सज्जन वीर सिंह नागिल…
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6 जुलाई 1905 जन्म दिवस विशेष आलेख
भारतीय स्वाधीनता संघर्ष की सफलता में उस भावना की भूमिका महत्वपूर्ण है जिसने समाज में स्वत्व का वोध कराया। यदि हम केवल आधुनिक संघर्ष का ही स्मरण करें तो हम पायेंगे कि आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती से लेकर राष्ट्रीय स्वयं…
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गुरु पूर्णिमा अर्थात अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर की और यात्रा और व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक स्वाभिमान जाग्रत कराने वाले परम् प्रेरक के लिये नमन् दिवस। जो हमें अपने आत्मवोध, आत्मज्ञान और आत्म गौरव का भान कराकर हमारी क्षमता के अनुरूप जीवन यात्रा का मार्गदर्शन…
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जन्म दिवस एवं पुण्यतिथि विशेष आलेख
भारत में आज एक जुलाई डॉक्टर्स दिवस है। यह तिथि सुप्रसिद्ध चिकित्सक और स्वाधीनता सेनानी डॉ विधान चंद्र राय की जन्मतिथि है। डाक्टर विधान चंद्र राय उन विरले लोगों में से कि जिस एक जुलाई की तिथि को उनका जन्म हुआ, अस्सी वर्ष बाद…
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सुप्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रकार बंकिम चंद्र चटोपाध्याय का जन्म दिवस विशेष
देश की स्वतंत्रता के लिये हुये असंख्य बलिदानों की श्रृंखला के पीछे असंख्य प्रेरणादायक महाविभूति भी रहे हैं। जिनके आव्हान से समाज जाग्रत हुआ और संघर्ष के लिये सामने आया। ऐसे ही महान विभूति हैं बंकिम चंद्र चटोपाध्याय। जिनका…
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23 जून 1953 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान: विशेष आलेख
सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्राँतिकारी विचारक डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 23 जुलाई 1901 को बंगाल के अति प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे…
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भारतीय इतिहास में जीजाबाई एक ऐसी आदर्श माता हैं जिन्होंने अपने पुत्र जन्म से पहले एक ऐसे संकल्पवान पुत्र की कामना की थी जो भारत में स्वत्व आधारित स्वराज्य की स्थापना करे। माता की इसी कल्पना को शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य के रूप में आकार दिया और माता अपने…
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क्राँतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11जून 1897 को शाहजहांपुर के खिरनी बाग में हुआ था। उनके पिता का नाम पं मुरलीधर और माता का नाम देवी मूलमती था। परिवार की पृष्ठभूमि आध्यात्मिक और वैदिक थी। पूजन पाठ और सात्विकता उन्हें विरासत में मिली थी।
कविता और लेखन की क्षमता…
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भारतीय स्वाभिमान और स्वातंत्र्य बोध जागरण के लिए यूँ तो करोड़ों महापुरुषों के जीवन का बलिदान हुआ है किन्तु उनमें कुछ ऐसे हैं जिनके जीवन की प्रत्येक श्वाँस राष्ट्र के लिये समर्पित रही। स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ऐसे ही महान विभूति थे जिनके जीवन का प्रतिक्षण राष्ट्र और स्वत्व बोध कराने…
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सल्तनत काल के इतिहास में भारत का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहाँ हमलावरों से अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिये भारतीय नारियों ने अग्नि में प्रवेश न किया हो । फिर कुछ ऐसे जौहर हैं जिनकी गाथा से आज भी रोंगटे खड़े होते हैं। ऐसा ही एक जौहर…
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पिछले डेढ़ हजार वर्षों में पूरे संसार का स्वरूप बदल गया है । 132 देश एक राह पर, 57 देश दूसरी राह पर और अन्य देश भी अपनी अलग-अलग राहों पर हैं। इन सभी देशों उनकी मौलिक संस्कृति के कोई चिन्ह शेष नहीं किंतु हजार आक्रमणों के बाद यदि भारत…
Read Moreझूठी है उनके क्रोधी होने और क्षत्रिय क्षय की बातें : अक्षय तृतीया विशेष लेख
पृथ्वी पर सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना के लिये भगवान् नारायण ने अनेक अवतार लिये हैं। इनमें परशुरामजी का अवतार पहला पूर्ण अवतार है। जो सर्वाधिक व्यापक है। संसार का ऐसा कोई कोना,कोई क्षेत्र…
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भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में अनंत वीरों का बलिदान हुआ है। कुछ के तो नाम तक नहीं मिलते और जिनके नाम मिलते हैं उनका विवरण नहीं मिलता। नासिक में ऐसे ही क्राँतिकारियों का एक समूह था जिनमें तीन को फाँसी और दो को आजीवन कारावास…
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यूँ तो भारत के इतिहास में राष्ट्र, संस्कृति समाज और स्वाभिमान रक्षा के लिये प्रतिदिन किसी न किसी न किसी क्राँतिकारी के बलिदान से जुड़ी है पर 18 अप्रैल की तिथि दो ऐसे महान क्राँतिकारियों के बलिदान की याद दिलाती है जिन्होंने जीवन की अंतिम श्वाँस तक संघर्ष किया और…
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आज जलियाँ वाला बाग नरसंहार को एक सौ तेइस वर्ष हो गये। इस दिन जनरल डायर के आदेश पर स्त्री बच्चों सहित निर्दोष नागरिकों पर गोलियाँ चलीं थी, और लगातार दस मिनट तक चलतीं रहीं थीं। इसमें तीन सौ से…
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क्रांतिकारी वीर राम सिंह पठानिया जन्म दिवस विशेष आलेख
सामान्यतः लोग जानते हैं कि अंग्रेजों की हड़प नीति 1857 के आसपास शुरु हुई। पर इतिहास गवाह है कि इस हड़प नीति के विरुद्ध अद्भुत साहस के प्रतीक इस 24 वर्षीय नवयुवक ने अपने मुट्ठी भर साथियों के बल पर अंग्रेजी…
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सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय बलिदान दिवस विशेष
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ। इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया । असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी । इस संघर्ष…
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आज सृष्टि के विकास आरंभ का दिन है, और संसार के लिये कालगणना के लिये नवसंवत्सर । अर्थात नये संवत् वर्ष का प्रथम दिन है । आज से विक्रम संवत् 2080 और युगाब्द 5125 आरंभ हो रहा है । इस संवत्सर का आरंभिक नाम नल और 24 अप्रैल से पिंगल…
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