संवत् 2082 विक्रमी | पौसा कृष्ण एकादशी | बुधवार
नक्षत्र: अनुराधा | योग: गंड | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जनवरी 2026
व्यवसाय : हिन्दी, व्याख्याता अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़
पता :
यह आलेख हिंदी दिवस के महत्व और हिंदी भाषा की विकास यात्रा पर केंद्रित है। इसमें संस्कृत से लेकर प्राकृत, अपभ्रंश और आधुनिक हिंदी तक की भाषाई प्रगति को रेखांकित किया गया है। स्वतंत्रता पश्चात संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा का दर्जा देने की ऐतिहासिक प्रक्रिया, गांधी जी और…
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सूर्य और ग्रह मंडल से मिलकर सौरमण्डल बना है। जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य को ‘सर्वति साक्षी भूतम’ (सब कुछ देखने वाला) कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य भगवान हर क्रियाकलाप के साक्षी हैं। भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह हैं- सूर्य, चंद्र, बुद्ध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि,…
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भगवान राम लोक के आदर्श हैं तथा लोक के कण-कण में समाहित हैं, उन्हें समाज के आदर्श पुरुष के रुप में जाना जाता है इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके चरित्र में सामाजिक समरसता परिलक्षित होती है, वे समाज के प्रत्येक अंग को लेकर साथ चलते हैं तथा…
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मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष पंचमी श्री राम जानकी विवाह दिवस विशेष
वैदिक धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास आश्रम) में विभाजित किया गया है। वैदिक ग्रंथ कहते हैं कि मनुष्य जब जन्म लेता है तब से वह देव, ऋषि एवं पितृ का ऋणी होता…
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आज हिंदी दिवस है, हिंदी हमारे देश के अधिकांश भू-भाग पर बोली जाने वाली, व्यवहरित होने वाली भाषा है। यह नागरी लिपि में लिखी जाती है। वर्तमान में बहुसंख्यक लोगों के आम व्यवहार में होने के कारण यह भारत में रोजगार की भाषा भी है। एक भाषा के रूप में…
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हिंदी साहित्य की प्रतिभाशाली कवयित्री एवं छायावाद के चार प्रमुख आधार स्तंभों में से एक तथा आधुनिक युग की मीरा कही जाने वाली महादेवी वर्मा का जन्म उत्तरप्रदेश के फ़ारुखाबाद में एक कायस्थ परिवार में 26 मार्च1907 को हुआ था। सात पीढ़ियों बाद पुत्री जन्म से इनके बाबा बाबू बाँके…
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किसी भी देश को महान बनाने के लिए माता-पिता और शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।माता को प्रथम गुरु एवं परिवार को प्रथम पाठशाला कहा जाता है। माँ हमें दया, करुणा, आदर, क्षमा, परोपकार सहयोग, समानता आदि सभी मानवीय गुणों का भाव देती है। जिस प्रकार माता पिता शरीर का…
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भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण घटना भारत की स्वतंत्रता है। जो ब्रिटिश शासन के विरूद्ध एक अत्यंत कठिन और लंबी लड़ाई का अंत था। स्वतंत्रता किसी भी देश के नागरिकों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य कर अपनी राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं शिक्षा इत्यादि सभी क्षेत्रों में सर्वांगीण…
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हिन्दू पंचांग में काल गणना एवं बारह मासों की पृष्ठभूमि वैज्ञानिकता पर आधारित है। जिसमें श्रावण या सावन मास पांचवे स्थान पर है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त माह का समय श्रावण मास या सावन का होता है। यह मास जल के लिए जाना जाता है. साथ ही यह सृष्टि…
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पंडित राम प्रसाद विस्मिल का जन्म दिवस विशेष आलेख
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की भूमिका अग्रणी रही है। हजारों क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों को होम कर दिया। इनमें कई ऐसे क्रांतिकारी रहे हैं जो क्रांति का पर्याय बन चुके हैं। इनमें पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का नाम प्रमुखता से लिया…
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विश्व भर में विभिन्न धर्म/सम्प्रदाय को मानने वाले हैं। प्रत्येक का अपना एक पंचाग या कैलेंडर है। इन्हीं तिथियों के अनुसार विभिन्न पर्व, व्रत-त्योहार परंपरागत रूप से मनाए जाते हैं। इसी प्रकार नए वर्ष को भी बड़े पर्व के रूप में मनाने की परपरा दिखाई देती है। ग्रेगेरियन कैलेंडर के…
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भाषा भावों और विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम होती है। हिंदी एक प्रवाहमान, सशक्त भाषा है। हिंदी पहले साधारण बोलचाल की भाषा से धीरे-धीरे विकसित हो कर सम्पर्क एवं साहित्य की भाषा बनी। सम्पर्क भाषा बनने में स्थानीय क्षेत्रीय बोलियों का बड़ा योगदान होता है, इन बोलियों के बहुतेरे शब्द…
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हम सबका अभिमान है हिन्दी,
हम सब का सम्मान है हिन्दी॥
उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम तक, फुलवारी सी सजती है हिन्दी
शिलालेखों एवं प्राच्य अभिलेखों में, मेंहदी सी रचती है हिन्दी
हम सबका अभिमान है हिन्दी,
हम सब का सम्मान है हिन्दी॥
मातृभाषा व राष्ट्रभाषा के पद पर, सदैव शोभित हमारी हिन्दी…
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भारतीय मनीषियों एवं ॠषियों ने मन की एकाग्रता एवं शरीर के सुचारु संचालन के लिए योग जैसे शक्तिदायक क्रिया की प्रादुर्भाव किया। जिसका उन्होंने पालन कर परिणाम जग के समक्ष रखा तथा इसे योग का नाम देकर विश्व के मनुष्यों को निरोग, स्वस्थ एवं बलशाली बनाने का रसायन दिया। वर्तमान…
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अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय या नाश ना हो। हिन्दू पंचाग के अनुसार बारह मासों की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुभ मानी जाती है, परंतु वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्त में होने के कारण हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व है। ऋतु परिवर्तन काल…
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विश्व भर में विभिन्न जाति-धर्म सम्प्रदायों के मानने वाले अपनी संस्कृति-सभ्यता अनुसार परंपरागत रूप से भिन्न-भिन्न मासों एवं तिथियों में नववर्ष मनाते हैं। एक जनवरी को जार्जियन केलेंडर के अनुसार नया वर्ष मनाया जाता है। परंतु हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि को नया वर्ष…
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रंगमंच दिवस विशेष आलेख
भारत में नाटकों का प्रचार, अभिनय कला और रंग मंच का वैदिक काल से ही निर्माण हो चुका था। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से प्रमाण मिलता है। संस्कृत रंगमंच अपनी चरम सीमा में था। नाटक दृश्य एवं श्रव्य काव्य का रूप है जो दर्शकों को आनंदानुभूति कराती…
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छत्तीसगढ़ वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों का विकास केंद्र रहा है। यहां प्राप्त मंदिरों, देवालयों और उनके भग्नावशेषों से ज्ञात होता है कि यहां वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध, जैन धर्म एवं संस्कृतियों का प्रभाव रहा है।
शैवधर्म का छत्तीसगढ़ में व्यापक प्रभाव परिलक्षित होता है। जिसका प्रमाण…
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युञ्ज्यते असौ योग:, योग शब्द संस्कृत के युञ्ज धातु से बना है। जिसका अर्थ है जुड़ना, मिलना या एकजुट होना। योग, विश्व को प्राचीन भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अनुपम देन है। योग द्वारा मनुष्य अपने शरीर एवं मन-मस्तिष्क को आत्मबल प्रदान कर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाता है…
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प्रकृति और मानव का अटूट संबंध सृष्टि के निर्माण के साथ ही चला आ रहा है। धरती सदैव ही समस्त जीव-जन्तुओं का भरण-पोषण करने वाली रही है। 'क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच रचित अति अधम सरीरा ।' इन पाँच तत्वों से सृष्टि की संरचना हुई है। बिना प्रकृति के…
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धार्मिक ग्रंथों के आधार पर भगवान विष्णु के नौवें अवतार बुद्ध का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का यह प्रमुख पर्व है। बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है, इसके संस्थापक शाक्य मुनि महात्मा गौतम…
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माँ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर मन आनन्द से भर कर हिलोर लेने लगता है। माता, जननी, मम्मी, आई, अम्माँ इत्यादि बहुत से नामों से माँ को पुकारते हैं भाषा चाहे कोई भी हो पर माँ शब्द के उच्चारण मात्र से उसके आँचल की शीतल छाया एवं प्यार भरी…
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भारत के महान योद्धा राजा, रणनीतिकार, कुशल प्रबुद्ध सम्राट के रूप में प्रतिष्ठित वीर सपूत एवं भारतीय गणराज्य के महानायक शिवा जी का जन्म 19 फरवरी को मराठा परिवार में हुआ था। माता जीजा जी बाई धार्मिक स्वभाव की कुशल व्यवहार की वीरांगना नारी थीं। उन्होंने बालक शिवा जी का…
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भारत का हस्तशिल्प/ परम्परागत शिल्प विश्व प्रसिद्ध है, प्राचीन काल से ही यह शिल्प विश्व को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर करता रहा है। तत्कालीन समय में ऐसे शिल्पों का निर्माण हुआ जिसने विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया। नवीन अन्वेषण प्राचीन काल में परम्परागत शिल्पकारों द्वारा होते रहे हैं…
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“भारतवर्ष से जिन विदेशियों ने वास्तविक रूप से प्रेम किया है, उनमें निवेदिता का स्थान सर्वोपरि है।” ---अवनीन्द्रनाथ ठाकुर
भारत भूमि और भारतीय संस्कृति के वैभवशाली स्वरुप के आकर्षण ने सदैव ही विदेशियों को प्रभावित किया और इसी कारण कुछ विदेशियों ने कर्मभूमि मानकर भारत की सेवा में पूरा जीवन…
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नारी सिर्फ़ कोमलांगी, त्याग या करुणा की मूर्ति ही नहीं है, इसके द्वारा किये पुरुषोचित कार्यों से इतिहास भरा पड़ा है। शक्ति एवं सुंदरता का संयोजन ईश्वर ने नारी को ही दिया। युद्ध स्थल में नारी की बहादूरी के सामने बड़े-बड़े शूरमा दांतों तले…
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भारत सदैव से ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा, उनके द्वारा विभिन्न ग्रंथों की रचना की गई। उन्होंने ही हिमालय के प्रथम अक्षर से हि एवं इंदु को मिला कर भारत को हिंदुस्तान नाम दिया। हिन्दू धर्म ग्रंथों के दो भाग श्रुति और स्मृति हैं। श्रुति सबसे बड़ा ग्रन्थ है…
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संगीत मनुष्य की आत्मा में निवास करता है, जब भी कहीं सुगम संगीत बजता हुआ सुनाई दे जाए मन तरंगित हो उठता है। प्राचीन भारतीय संस्कृति में संगीत का प्रमुख स्थान है। धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष नामक पुरुषार्थ चतुष्टय में इसे मोक्ष प्राप्ति का सुगम मार्ग माना जाता है…
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संगीत नामक शब्द से ही मन में स्वर लहरियाँ उत्पन्न होने लगती हैं, मन और आत्मा दोनो तरंगित हो उठते हैं, देह नृत्य करने लगती है, चेतना अपने उच्चतम स्तर पर उर्ध्वगामी हो जाती है। ऐसा ही है आनंद संगीत और स्वर का। यह एक ऐसी विधा है जिसने मानव…
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मातृभाषा का रिश्ता जन्मदायिनी माता के साथ स्थूल रूप से जोड़ा जाता है, परंतु मातृभाषा से अभिप्राय उस परिवेश, स्थान,समूह में बोली जाने वाली भाषा से है जिसमें रहकर मनुष्य अपने बाल्यकाल में दुनियां के संपर्क में आता है, अर्थात मातृभाषा ही शिशु को…
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एक समय था जिसे भारत में भक्ति का काल कहा जाता है तथा हिन्दी साहित्य में भी यह भक्ती का काल माना जाता है। हिंदी साहित्य का भक्तिकाल 1375 वि. से 1700 वि. तक माना जाता है। यह युग भक्तिकाल के नाम से प्रख्यात है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग…
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भारतवर्ष मे ऋतु परिवर्तन के साथ त्यौहार मनाने की परंम्परा है। ऋतुओं के विभाजन में बसंत ऋतु का विशेष महत्व है क्योंकि इस ॠतु का सौंदर्य अनुपम एवं छटा निराली होती है। शीत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ॠतु की आहट की धमक के बीच का काल वसंत काल होता…
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शक्ति की उपासना प्राचीन काल से ही होते रही है। इसके प्रमाण हमें दक्षिण कोसल में मिलते है, यहाँ शाक्त सम्प्रदाय का भी खासा प्रभाव रहा है। सिरपुर से उत्खनन में प्राप्त चामुंडा की प्रतिमा इसका प्रमाण है। दक्षिण कोसल के अन्य स्थानों पर देवी पूजा के प्रमाण प्राचीन काल…
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आज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि है। इनका जन्म 3 अगस्त 1886 को छोटे से कस्बे चिरगांव में हुआ था जो झांसी से 35 किमी की दूरी पर है। राष्ट्रजीवन की चेतना को मंत्र स्वर देने वाले राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को साहित्य जगत में दद्दा के नाम से जाना जाता…
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आज महत्वपूर्ण तिथि है, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है, द्वापर युग में इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से प्रसिद्ध है और यह तिथि भगवत् गीता के अवतरण दिवस के रुप में मनाई…
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मनुष्य में जन कल्याण की भावना तो जन्म के पश्चात संस्कारों के साथ ही पल्लवित एवं पुष्पित होती है, जब मनुष्य आत्म कल्याण के साथ जग कल्याण के विषय में अग्रसर होता है तो तब वह संत कहलाता है। उसके हृदय में समस्त समष्टि के लिए कल्याण की भावना होती…
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