संवत् 2083 विक्रमी | भाद्रपद शुक्ल द्वितीया | शनिवार
नक्षत्र: हस्त | योग: शुभ | करण: बालव
पर्व विशेष : | तदनुसार 12 सितंबर 2026
शिक्षा : एम.ए. इतिहास
प्रमुख रचनाएँ : डिजिटल एडिटर : "बस्तर भूषण "
व्यवसाय : सहायक प्राध्यापक
पता : सुकमा, छत्तीसगढ़
बारसूर का नाम बाणासुर से जुड़ा है या किसी प्राचीन शासक से? 1060 ईस्वी के शिलालेख और छिन्दककालीन नगर-नामकरण परम्परा से जानिए इसका इतिहास।
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दंतेवाड़ा की फागुन मंडई, बस्तर के चक्रकोट स्थित माणिक्य देवी (दंतेश्वरी माई) के शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा का स्मृति पर्व है। सदियों पुरानी इस परंपरा में देवी के छत्र की स्थापना, पालकी भ्रमण, लोक नृत्य और नगर परिक्रमा के साथ सनातन धर्म की गौरवशाली विरासत जीवंत रहती है।
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चक्रकोट की माणिक्य देवी से दन्तेश्वरी माई तक की यह यात्रा केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शिलालेखों, शक्तिपीठ परंपरा और बस्तर के ऐतिहासिक आत्मबोध की कथा है। देवी के पुरातन स्वरूप, अभिलेखीय प्रमाण और लोकमान्यता को जानने के लिए पूरा आलेख अवश्य पढ़ें।
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दंतेवाड़ा में शंखिनी-डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की संस्कृति और आस्था का केंद्र है। सहस्राब्दियों से पूजित यह धाम बस्तर दशहरा और फागुन मड़ई जैसे पर्वों का आधार है, जो लोक परंपराओं और श्रद्धा को जीवंत रखते हैं।
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छत्तीसगढ़ का भोरमदेव शिव मंदिर, जिसे "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है, 11वीं सदी की परमारकालीन स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। मैकल घाटी में स्थित यह मंदिर फणि नागवंशी राजा गोपाल देव द्वारा निर्मित माना जाता है। भूमिज शैली, प्रेम-मैथुन शिल्पों और देवी-देवताओं की मूर्तियों से अलंकृत यह…
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भारतीय सांस्कृतिक धुरी में सिंधुघाटी सभ्यता सर्वाधिक रोचक और रहस्य वाली है। यूं कहे कि वर्तमान भारतीय संस्कृति का मूल केंद्र सिंधुघाटी सभ्यता रही और पूरे भारत में उसका सांस्कृतिक विस्तार हुआ। सभ्यता का ह्रास भले ही विभिन्न कारणों से हुआ किंतु वहां के निवासियों ने आगे बढ़कर भारत के…
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प्रकृति ने बस्तर में जी भर कर अपना सौंदर्य लुटाया है, अद्वितीय प्राकृतिक खुबसूरती ने बस्तर को पर्यटकों का लाडला बनाया है। यहाँ की हरी-भरी वादियाँ, गगनचुम्बी चोटियाँ, खूबसूरत झरने किसी भी व्यक्ति का मनमोह लेते हैं। बस्तर…
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बालोद से दुर्ग मार्ग में पैरी नामक छोटा सा ग्राम है। पैरी ग्राम से लगा हुआ एक छोटा सा ग्राम है गौरेया। बालोद से आने वाली तांदुला नदी पैरी एवं गौरेया ग्राम की सीमा रेखा बनाती है। बालोद क्षेत्र अपने एतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलों के लिये छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध है…
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