संवत् 2083 विक्रमी | ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी | रविवार
नक्षत्र: रोहिणी | योग: धृति | करण: शकुनि
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जून 2026
व्यवसाय : इतिहासकार एवं स्वतंत्र शोधकर्ता
पता : झालावाड़, राजस्थान
यह लेख प्राचीन भारतीय मुद्राओं में भगवान श्रीराम के अंकन की शोधपूर्ण पड़ताल करता है। शुंग, कुषाण, चौहान, विजयनगर और मुगल कालीन सिक्कों के उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि श्रीराम भारतीय जनमानस, शासन परम्परा और सांस्कृतिक स्मृति में निरन्तर प्रतिष्ठित रहे हैं।
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यह लेख श्रीरामकथा की वैश्विक लोकप्रियता और उसकी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय महत्ता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें दर्शाया गया है कि रामायण केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक मानव जीवन के आदर्शों का मार्गदर्शन करती है। विविध धर्मों और…
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नर्मदा तट पर स्थित भेड़ाघाट का चौसठ योगिनी मन्दिर केवल स्थापत्य नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना, कलचुरी सत्ता और मातृका परम्परा का जीवित साक्ष्य है। 64 नहीं, 81 योगिनियों का यह वृत्ताकार देवालय इतिहास, आस्था और रहस्य का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। पूरा पढने के लिए क्लिक करें।
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“गागरोन स्थित बलिण्डा घाट पर विराजमान अद्भुत गणेशजी अपनी अनोखी छवि और आस्था के कारण विशेष प्रसिद्ध हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ दर्शन करने से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।”
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राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में स्थित बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों को मिला कर बना हाड़ौती क्षेत्र लोक साहित्य की दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध रहा है। यहाँ की लोकभाषा ‘हाड़ौती’ में लोकगीत, लोकनाट्य, गाथाएँ, कहावतें, प्रहेलिकाएँ, गद्य-पद्य तथा संत साहित्य की सशक्त परम्परा रही। विवाह, संस्कार, पर्व-त्योहार, कृषि और भक्ति…
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भारतीय चित्रकला परंपरा में श्रीराम न केवल लोककथाओं और धर्मग्रंथों के नायक हैं, बल्कि लघुचित्रों, भित्तिचित्रों और सचित्र ग्रंथों में भी वे आदर्श, भक्ति और लोक आस्था के प्रतीक रूप में अंकित हुए हैं। मध्यकाल में रामायण के प्रसंगों को मेवाड़, कांगड़ा, बसोहली, मालवा, बुंदेलखंड, राजस्थानी, पहाड़ी व दक्षिण भारतीय…
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