संवत् 2083 विक्रमी | ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी | रविवार
नक्षत्र: रोहिणी | योग: धृति | करण: शकुनि
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जून 2026
व्यवसाय : लेखक
पता : रायपुर, छत्तीसगढ़
यह लेख भगवान श्रीराम के मानवीय और लोकनिष्ठ स्वरूप को उजागर करता है, जिसमें दक्षिण कोसल के ‘भांचा राम’, रामनामी सम्प्रदाय की निर्गुण भक्ति और भक्ति आन्दोलन की परंपरा के माध्यम से यह बताया गया है कि किस प्रकार ईश्वर लोकजीवन में रच-बसकर जनमानस का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं।
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काशी के मणिकर्णिका घाट पर खेली जाने वाली मसान होली एक अद्भुत परंपरा है, जहाँ शिवभक्त चिता की भस्म से होली खेलते हैं। यह पर्व जीवन के प्रति मोह और मृत्यु के भय को त्यागकर शिवत्व यानी वैराग्य की चरम अवस्था — को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता…
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जब भगवान शिव बारात लेकर आए तो रानी मैना ने राख से सने, सर्पों को धारण किए भोलेनाथ को देखकर विवाह से मना कर दिया। लेकिन पार्वती ने विश्वास और प्रेम से क्या उत्तर दिया? महाशिवरात्रि पर जानिए यह अद्भुत कथा।
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कुरुक्षेत्र के रण से लेकर मकर संक्रांति के आध्यात्मिक अर्थ तक यह आलेख सत्ता, धर्म और चेतना के शाश्वत द्वंद्व को उजागर करता है। भीष्म की शरशय्या, उत्तरायण का दर्शन और सूर्य-संक्रांति का विज्ञान, सब एक सूत्र में पिरोया गया है। पूरा संदर्भ पढ़ने के लिए क्लिक करें।
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महज उम्र का नाम युवा नहीं है! युवा वो है जिसमें राम सा साहस और विवेकानंद सा त्याग हो। जो चुनौतियों को स्वीकारे और पीढ़ियों का भार उठाए, वही असली युवा है। क्या आप इस कसौटी पर खरे उतरते हैं?
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ब्रजभूमि में जब इंद्र की पूजा को चुनौती देते हुए मात्र सात वर्ष के बालक कृष्ण ने कहा “अब ब्रज इंद्र नहीं, गोवर्धन की पूजा करेगा”। यही क्षण था जब प्रकृति, पशुधन और मनुष्य के बीच समरसता का पर्व जन्मा "गोपोत्सव"।
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