संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव
पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026
शिक्षा : पीएचडी, डी.लिट.
प्रमुख रचनाएँ : श्रीधर पाठक पुरस्कार (1986), हजारी प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार (1997) और आचार्य विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान (2021) प्राप्त हुए।
व्यवसाय : ब्रज परंपरा, लोककथा व लोकसंस्कृति के विशेषज्ञ
पता : पानीपत, हरियाणा
करवाचौथ केवल व्रत नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन, परिवार और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। इसका इतिहास वेदों, लोककथाओं और लोकगीतों तक फैला हुआ है। मिट्टी के करवे से जुड़े प्रतीक, सप्त मातृकाओं की कथाएँ, बिहारी और स्वामी हरिदास जैसे कवियों की रचनाएँ, और गांव-गांव में गाए जाने वाले लोकगीत इस…
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यह लेख बताता है कि इतिहास को बोझ नहीं, बल्कि जीवन के लिए ऊर्जा का स्रोत बनाना चाहिए। सत्ता द्वारा इतिहास के दुरुपयोग पर सवाल उठाते हुए यह सामाजिक एकता और लोकजीवन से जुड़ी सीख पर जोर देता है।
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