संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव
पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026
शिक्षा : पीएचडी
प्रमुख रचनाएँ :
व्यवसाय : शिक्षिका एवं लोक संस्कृति अध्येता
पता : खैरागढ़ छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का मुख्य आधार लोक कलाएँ हैं। इनमें पंडवानी का स्थान विशिष्ट है। यह महाभारत पर आधारित एक पारम्परिक लोकगाथा है। कलाकार इसके माध्यम से कथा और अभिनय का सीधा प्रदर्शन करके लोक परम्परा को सहेजते हैं।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतन्त्र भारत के प्रमुख राष्ट्रवादी विचारक तथा शिक्षाविद् थे। उन्होंने राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। कश्मीर के पूर्ण एकीकरण में उनका बलिदान आज भी भारतीय समाज को दिशा दिखाता है।
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सद्गुरु कबीर साहेब भारतीय संत परंपरा के अद्वितीय युग-दृष्टा संत हैं। यह लेख कबीर पंथ की उत्पत्ति, प्रमुख गद्दियों, गुरु-परंपराओं और दामाखेड़ा, खरसिया, नादिया तथा बुरहानपुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों के माध्यम से कबीर विचारधारा के विस्तार को सरल रूप में प्रस्तुत करता है।
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प्रस्तुत लेख झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन, शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायी चित्रण करता है। इसमें उनके जन्म, बाल्यकाल, युद्ध-कौशल, झाँसी के अधिकार की रक्षा, दुर्गा दल के गठन और 1857 के स्वाधीनता संग्राम में उनके अदम्य नेतृत्व को रेखांकित किया गया है। रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान भारतीय…
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यह लेख छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में रचे-बसे भगवान श्रीराम के आत्मीय, पारिवारिक और लोकजीवन से जुड़े स्वरूप का मार्मिक चित्रण करता है। यहाँ श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि दुलारे भांजे के रूप में पूजे जाते हैं, जिनकी उपस्थिति विवाह गीतों, सोहर, फाग, ददरिया और नाचा जैसे लोक रूपों में सहज…
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