संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
शिक्षा : पीएच.डी.- 'वागड़ का प्राचीन इतिहास व संस्कृति'।
प्रमुख रचनाएँ : सुप्त वीणा के तार, अनछुए अहसास, चकम छकाई, अग्निगंधा, वागड़ का प्रारंभिक इतिहास (शोध ग्रंथ)
व्यवसाय : माध्यमिक शिक्षा विभाग राजस्थान में सेवारत।
पता : बासबाड़ा, राजस्थान
प्राचीन भारतीय गुरुकुल प्रणाली केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक आधारों पर टिकी थी। यह शिक्षा पद्धति चरित्र निर्माण, व्यावहारिक कौशल और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को सदियों तक अक्षुण्ण रखा।
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गोत्र प्रणाली मानव जाति के इतिहास, वंश परंपरा और सामाजिक पहचान को सहेजने वाली प्राचीन भारतीय व्यवस्था है। यह न केवल पीढ़ियों को जोड़ती है, बल्कि सांस्कृतिक और जैविक विरासत की भी रक्षा करती है।
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नील नदी की गोद में बसे मिश्र और भारत के प्राचीन व्यापार, संस्कृति व आध्यात्मिक संबंधों की रोचक झलक।
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वैदिक परंपराओं को मानने वालों में सर्वदेवो में अग्रगण्य, प्रथम पूज्य, गौरीनंदन गणेश को बाधाओं को हरने वाले पुरुष देवता के रूप में लोकप्रियता प्राप्त हैं और उनसे सम्बंधित अनेकानेक कथाएँ भी मिलती है जिनसे प्रायः हम सभी परिचित है।
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हमारी आर्ष संस्कृति ऋषि परंपराओं पर आधारित है और यह ऋषि परंपराएं सनातन होने के साथ-साथ केवल विश्वासों पर आधारित न हो कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर पल्लवित हुई है। हमारे सनातन ऋषियों ने इन परंपराओं को देश, काल, ऋतू के अनुरूप एवं सर्वजन हिताय ही विकसित किया है। इसमे कीड़ी…
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गाँधी का विश्व-क्षितिज पर आना एक विलक्षण घटना थी। गांधी अपने आप मे एक पूर्ण युग थे, एक ऐसा युग जिसे देख कर विश्व पटल पर हर कोई अचम्भित रह जाता है। उनके व्यक्तित्व व कृतित्व के आगे उनके शत्रु भी विवश हो उन्हें यह कहने को बाध्य हो गए…
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भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। देशभर में धूमधाम से इस दिन गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह शुभ तिथि आज है। गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है, इस दिन चंद्र दर्शन करना निषेध…
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उत्सवधर्मी एवं अनूठी भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के लिए लोकप्रसिद्ध रंग निराले है जो जीवन दर्शन भी देते है और जीने को उमंग के साथ सलीके से जीना भी सिखाते है। भारतीय संस्कृति के सावन भादो मास हरित खुशहाली के साथ त्योहारों की लड़ियाँ ले कर आते है जिनके अपने विशिष्ट…
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श्रावण मास में शिवार्चना पर विशेष आलेख
त्रिदेवों में एक शिव का रूप और महिमा दोनों ही अनुपमेय है। वेदों में शिव को रुद्र के नाम से सम्बोधित क्रिया गया तथा इनकी स्तुति में कई ऋचाएं लिखी गई हैं। सामवेद और यजुर्वेद में शिव-स्तुतियां उपलब्ध हैं। उपनिषदों में भी विशेषकर…
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नील का वरदान प्राचीन मिस्र की सभ्यता की वैज्ञानिक पड़ताल और उसकी सांस्कृतिक विरासत अपेक्षाकृत कई आयामो पर स्तुत्य है। प्राचीन मिस्रवासियों की अनेक उपलब्धियों में उत्खनन, सर्वेक्षण और निर्माण की तकनीक जिसने विशालकाय पिरामिड, मंदिर और ओबिलिस्क के निर्माण, सुनियन्त्रित सिचाई, स्वतंत्र लेखन प्रणाली, गणना विधि, एक व्यावहारिक और…
Read Moreभारतीय अस्मिता के जागरण एवं राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अनेकानेक विभूतियों का महती योगदान रहा है। यदि भारत के प्राचीन काल के इतिहास को खंगाला जाय तो अनेक ऐसे अमर हुआत्माओं के नाम समक्ष आते है जिन्होने अपना सारा जीवन खपा दिया।
हुतात्मा मात्र वह नही होता जो राष्ट्र…
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"गु अँधियारी जानिये, रु कहिये परकाश। मिटि अज्ञाने ज्ञान दे, गुरु नाम है तास।" कबीरदास ने गुरु के अर्थ और उनके बारे में अंनत लिखा है ।यहाँ तक की सभी महापुरुषों ने गुरु को दुर्लभ मनुष्य जीवन की अत्यंत अनिवार्य कड़ी बताया है।
कबीर कहते है-"गुरु गोविंद दाऊ खड़े काके…
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भारत पर्वोत्सव की परम्परा अत्यन्त प्राचीन रही है फिर चाहे वह कोई भी त्यौहार क्यो न हो, हमारी उत्सवधर्मी संस्कृति में इसकी न केवल सदीर्घ परम्परा मौजुद है वरन् कई-कई प्रचलित रीतियों के साथ-साथ लोकमान्यताओं, अध्यात्मिक चेतना एवं धार्मिर्क आस्थाओं के बीज भी विद्यमान है। ऋतुराज वसंत की पूर्णाहुति पर…
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श्री कृष्ण जनमाष्टमी विशेष आलेख
पर्यावरण संरक्षण की चेतना वैदिक काल से ही प्रचलित है। प्रकृति और मनुष्य सदैव से ही एक दूसरे के पूरक रहे हैं। एक के बिना दूसरे की कल्पना करना बेमानी है। वैदिक काल के ध्येय वाक्य "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की अभिधारणा लिए प्रकृति और मनुष्य…
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हल षष्ठी पर विशेष
भारतीय धर्म और संस्कृति में बलराम एक हिंदुओं के देवता और भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में पहचाने जाते है। जगन्नाथ परंपरा, त्रय देवताओं में से एक के रूप में वह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।उनके अन्य नामो के रूप में बलदेव,बलभद्र,बलदाऊ,बलभद्र, दाऊ…
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(आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष आलेख)
प्रसिद्ध इतिहासकार ई. एच. कार ने कहा था-"इतिहास वर्तमान काल और भूत काल के बीच एक निरंतर संवाद है। इतिहास का दोहरा काम मनुष्य को अतीत के समाज को समझने और वर्तमान समाज के अपने ज्ञान को बढ़ाने में सक्षम बनाना है।" इतिहासकार…
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भारत की कृषिप्रधान और ऋषि परम्परा की संस्कृति में त्योहारों और पर्व उत्सवों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही रह है। यहां बाराहोमास ऋतु, तिथि, कर्म, धर्मानुसार पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है ताकि जीवन मे रंग और उत्स बना रहे यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने…
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जो समाज अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी नहीं रखता, अपने पुरखों की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण न कर उन्हें भूल जाता है ,वहां समाजीकरण में अत्यंत वीभत्स दृश्य पैदा होते है और अंततः विप्लप या आतंक का कारण बनते है। प्राचीन भारतीय मनीषी इस मनोवैज्ञानिक सत्य से भलीभांति परिचित थे…
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काव्य मीमांसा में राजशेखर ने एक मत देते हुए कहा है कि- "इतिहास पुराणाभ्यां चक्षुर्भ्यामिव सत्कविः. विवेकांजनशुद्धाभ्यां सूक्ष्मप्यर्थमीक्षते !"अर्थात इतिहास लेखन में जितनी दक्षता और सतर्कता अपेक्षित होती है संभवतया उतनी अन्य विधाओं में प्रायः नही होती।" मेरे विचार में यह इतिहास के बारे में शत प्रतिशत सही वक्तव्य है…
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मध्ययुगीन भक्ति परम्परा की सिरमौर मीरा बाई उस युग की एकमात्र महिला भक्त संत है जिन्होंने सगुण भक्ति के कृष्णोपासक के रूप में हिंदी साहित्य में अपनी अमिट छाप ही नही छोड़ी वरन उस युग के समाज पर प्रश्न उठाकर समाज की दिशा व दशा निर्धारित करने का बीड़ा भी…
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