संवत् 2083 विक्रमी | ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी | रविवार
नक्षत्र: रोहिणी | योग: धृति | करण: शकुनि
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 जून 2026
शिक्षा : पीएचडी, बी.एससी., बी.एड., एम. ए. (हिंदी साहित्य)
प्रमुख रचनाएँ : साहित्य संस्कृति एवं भाषा के विविध आयाम, 21 वीं सदी में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता, यदुवंशी संस्कृति आदि।
व्यवसाय : प्राचार्य, विष्णु कांति महाविद्यालय, छीतापार लोरमी, जिला-मुंगेली, छत्तीसगढ़
पता : बिलासपुर, छत्तीसगढ़
कर्मा पर्व मध्य भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ और झारखंड के गोंड, उरांव, बैगा आदि समाज का प्रमुख प्रकृति-पूजा आधारित त्योहार है। कर्म/करम वृक्ष की पूजा से सुख, समृद्धि व फसल उन्नति की कामना की जाती है। आइए जाने कर्म-सिद्धांत से जुड़ा यह पर्व सामूहिक उत्सव से जीवन में कैसे शांति-उन्नति लाता…
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संत गहिरा गुरु जी छत्तीसगढ़ के महान संत, समाजसुधारक और सनातन धर्म के प्रखर प्रवक्ता थे। उन्होंने वनवासी समाज में सामाजिक चेतना, शिक्षा, और आध्यात्मिक जागरण का अलख जगाया। उनका जीवन सत्य, सेवा, शांति और मानवता के मूल्यों को समर्पित था। उनके विचार आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्त्रोत…
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रायपुर स्थित कंकाली मठ छत्तीसगढ़ में नागा साधुओं की आध्यात्मिक साधना और योद्धा परंपरा का प्रतीक है। घने जंगल में स्थापित यह मठ मां कंकाली की उपासना, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र और नागा साधुओं की शौर्य-परंपरा को सहेजे हुए है। यह स्थल आज भी सनातन धर्म की अमिट विरासत का जीवंत केंद्र…
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छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति में वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व है. इन्ही में से नगाड़ा एक ऐसा वाद्ययंत्र जो आज भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न आयोजनों में दिखाई देता है. भले ही इसका चलन कम हुआ है, लेकिन आज भी इसकी जगह अन्य वाद्ययंत्र नहीं ले पाया है. जब इसकी आवाज…
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संत गहिरा गुरु जी छत्तीसगढ़ के महान संत, समाजसुधारक और सनातन धर्म के प्रखर प्रवक्ता थे। उन्होंने वनवासी समाज में सामाजिक चेतना, शिक्षा, और आध्यात्मिक जागरण का अलख जगाया। उनका जीवन सत्य, सेवा, शांति और मानवता के मूल्यों को समर्पित था। उनके विचार आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्त्रोत…
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खेती किसानी में पशुधन के महत्व को दर्शाने वाला पोला पर्व छत्तीसगढ़ के सभी अंचलों में परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है खेती किसानी में पशु धन का उपयोग के प्रमाण प्राचीन समय से मिलते हैं पोला मुख्य रूप से खेती किसानी से जुड़ा त्यौहार है भादो…
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भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ - साथ उत्सव प्रधान भी है। यहाँ अधिकतर त्यौहार कृषि कार्य पर आधारित हैं, प्रत्येक त्यौहार किसी न किसी तरह कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ में जब धान की बुआई सम्पन्न हो जाती है तब सावन माह की अमावश को कृषि…
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गंगा-दशहरा पुण्य-सलिला गंगा का हिमालय से उत्पत्ति का दिवस है। जेष्ठ शुक्ल दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों का विनाश होता है इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा नाम दिया गया। इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।
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यदि मनुष्य जो संवेदनाओं का पुंज है, मशीन की भांति ही कार्य करता रहे तो उसका जीवन सार्थक हो जाए। अतः समाज ने नाना कलाओं में पारंगत होकर समय-समय पर अन्य समाजों का मनोरंजन करने का काम करने लगे। ऐसी ही कलाओं में से कुछ कलाओं के नाम हैं…
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भगवान श्री राम के जीवन का लंबा समय वनवास में व्यतीत हुआ था, अतः वनों से भारतीय संस्कृति का सम्बंध उनके काल से ही घर-घर में पहुँच चुका था जब वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना कर दी थी। लेकिन आजकल वाल्मीकि जी द्वारा सँस्कृत में रचित पूर्ण रामायण कम…
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छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ का लोक पर्व है । अंग्रेज़ी के जनवरी माह में व हिन्दी के पुष पुन्नी त्यौहार छेरछेरा को मनाया जाता है। त्यौहार के पहले घर की साफ़-सफ़ाई की जाती है। छत्तीसगढ़ में धान कटाई, मिसाई के बाद यह त्यौहार को मनाया जाता है। यह त्यौहार छत्तीसगढ़ का…
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अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति है और उस अनेकता के मूल में निश्चित रुप से भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित जनजातीय है। भारत में घुमंतू जनजातियों के लोग हर क्षेत्र में निवास करते हैं इनकी जीवन पद्धति अन्य लोगों से भिन्न है। घुमंतू जनजातियों की वेशभूषा, खान पान…
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भारतीय समाज में गोधन अलंकर एवं पूजा की परंपरा है। तदनुरूप राउत जाति के लोग भी गौ पूजा अलंकरण में विश्वास करते है। वृद्ध और युवा पीढ़ी के मध्य विचारों में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन न आने के कारण दोनों पीढ़ियों के द्वारा समान रूप से परंपरागत ढंग से…
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