संवत् 2083 विक्रमी | श्रवण शुक्ल चतुर्थी | रविवार
नक्षत्र: हस्त | योग: साध्य | करण: विष्टि
पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अगस्त 2026
व्यवसाय : Assistant block Education Officer at Education Department
पता : निवास: कवर्धा, छत्तीसगढ़
यह लेख डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र की पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ परिचय’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ के इतिहास, लोककथाओं, नामकरण, शैलचित्रों, रियासतों और सांस्कृतिक चेतना का विवेचन करता है। इसमें जनश्रुतियों और ऐतिहासिक सन्दर्भों के आधार पर छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण परम्परा को समझने का प्रयास किया गया है।
Read More
भोरमदेव के मड़वा महल अभिलेख और फणिनागवंशी इतिहास की अनजानी कड़ियाँ। भोणिंगदेव और महाराजा सतीम जैसे शासकों से जुड़ी अभिलेखीय साक्ष्य, सिक्के और ऐतिहासिक संभावनाएँ इस आलेख में समाहित हैं। छत्तीसगढ़ के मध्यकालीन राजवंशों की गूढ़ परतों को समझने हेतु पूरा लेख अवश्य पढ़ें।
Read More
पचराही, छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है, जो भोरमदेव क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करता है। यहाँ 9वीं से 14वीं शताब्दी के फणिनागवंशीय शासन के साक्ष्य, अभिलेख, मूर्तियाँ, सिक्के और मंदिरों के अवशेष मिले हैं। ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक उत्खनन (2007–09) तक…
Read More
भोरमदेव मंदिर, जिसे अक्सर "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" कहा जाता है, अपनी अद्वितीय स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। 11वीं–12वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर फणिनागवंशी शासकों और कलचुरियों के सांस्कृतिक-संबंधों को दर्शाता है। मंदिर के नामकरण और निर्माता को लेकर विद्वानों में मतभेद रहे हैं, पर अभिलेखीय…
Read More