संवत् 2083 विक्रमी | वैशाख कृष्ण द्वादशी | गुरुवार
नक्षत्र: रेवती | योग: प्रीति | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 14 मई 2026
व्यवसाय : Assistant block Education Officer at Education Department
पता : निवास: कवर्धा, छत्तीसगढ़
भोरमदेव के मड़वा महल अभिलेख और फणिनागवंशी इतिहास की अनजानी कड़ियाँ। भोणिंगदेव और महाराजा सतीम जैसे शासकों से जुड़ी अभिलेखीय साक्ष्य, सिक्के और ऐतिहासिक संभावनाएँ इस आलेख में समाहित हैं। छत्तीसगढ़ के मध्यकालीन राजवंशों की गूढ़ परतों को समझने हेतु पूरा लेख अवश्य पढ़ें।
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पचराही, छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है, जो भोरमदेव क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करता है। यहाँ 9वीं से 14वीं शताब्दी के फणिनागवंशीय शासन के साक्ष्य, अभिलेख, मूर्तियाँ, सिक्के और मंदिरों के अवशेष मिले हैं। ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक उत्खनन (2007–09) तक…
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भोरमदेव मंदिर, जिसे अक्सर "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" कहा जाता है, अपनी अद्वितीय स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। 11वीं–12वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर फणिनागवंशी शासकों और कलचुरियों के सांस्कृतिक-संबंधों को दर्शाता है। मंदिर के नामकरण और निर्माता को लेकर विद्वानों में मतभेद रहे हैं, पर अभिलेखीय…
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