संवत् 2083 विक्रमी | आषाढ़ शुक्ल पंचमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी | योग: वरीयान | करण: बव
पर्व विशेष : | तदनुसार 18 जुलाई 2026
यह लेख आगम और तन्त्र परम्परा में भगवान श्रीराम की सूक्ष्म उपस्थिति का गम्भीर विवेचन करता है। इसमें निगम और आगम साधना के भेद के साथ शैव, शाक्त, वैष्णव, बौद्ध और जैन आगमों में श्रीराम के व्यापक स्वरूप को रेखांकित किया गया है।
यह लेख तमिलनाडु स्थित गोष्ठिपुरम दिव्यदेशम् की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महिमा को रेखांकित करता है। इसमें आचार्य रामानुज की अट्ठारह यात्राओं, अहंकार-त्याग, गुरु-शिष्य परम्परा और जनकल्याण हेतु मोक्ष मन्त्र को जन-जन तक पहुँचाने की करुणामयी कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।
यह लेख आधुनिक भारत की युवा पीढ़ी के मानसिक संघर्षों, भावनात्मक शून्यता और संवादहीनता की गंभीर चुनौती को रेखांकित करता है। लेखक ने सामाजिक दबाव, पारिवारिक अपेक्षाओं, बेरोजगारी और एकाकीपन के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते संकट को भारतीय लोकपरम्परा, पौराणिक प्रसंगों और मानवीय संवेदना के आधार पर…
यह लेख रामचरितमानस में वर्णित रामराज्य के पर्यावरणीय दृष्टिकोण का विश्लेषण करता है। इसमें जल संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीवों की निर्भयता, प्रकृति और मानव के सामंजस्य तथा वर्तमान जलवायु संकट के संदर्भ में वैदिक मूल्यों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया है।
यह लेख प्राचीन भारतीय मुद्राओं में भगवान श्रीराम के अंकन की शोधपूर्ण पड़ताल करता है। शुंग, कुषाण, चौहान, विजयनगर और मुगल कालीन सिक्कों के उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि श्रीराम भारतीय जनमानस, शासन परम्परा और सांस्कृतिक स्मृति में निरन्तर प्रतिष्ठित रहे हैं।
यह लेख भारत की अपहृत सांस्कृतिक धरोहरों, विशेषकर भोजशाला से सम्बद्ध माँ वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा की पुनर्वापसी की आवश्यकता पर केन्द्रित है। इसमें औपनिवेशिक काल में भारतीय मूर्तियों, पाण्डुलिपियों और पुरातात्त्विक सम्पदाओं की लूट, उनके विदेशों में संग्रहित होने तथा वर्तमान भारत द्वारा सांस्कृतिक धरोहरों की घर वापसी के…
छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी दामाखेड़ा में आयोजित कबीर पंथियों का संत समागम आध्यात्मिकता, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का अद्वितीय संगम है। वसंत पंचमी से माघ पूर्णिमा तक चलने वाले इस आयोजन में विश्वभर से संत और अनुयायी एकत्र होकर कबीर वाणी, सत्यनाम और साधना की परंपरा को जीवंत करते हैं। यह…
यह लेख विष्णु के अवतारवाद की दार्शनिक और सांस्कृतिक व्याख्या करते हुए सृष्टि के विकास क्रम को मत्स्य से नृसिंह तक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से नृसिंहावतार के माध्यम से भक्त प्रहलाद की रक्षा, अहंकार के विनाश और दिव्य न्याय के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया…
छत्तीसगढ़ की भुंजिया जनजाति में भगवान श्रीराम केवल देवता नहीं, बल्कि परम सखा और रक्षक के रूप में पूजित हैं। यह लेख उनके अद्भुत लोकविश्वास, लाल बंगला परम्परा और लक्ष्मण रेखा से जुड़ी अनोखी कथा के माध्यम से वनवासी जीवन में रची-बसी रामभक्ति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
वारुणी पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू पर्व है, जो जल के देवता वरुण की उपासना और जल के महत्व की स्मृति से जुड़ा है। भविष्यपुराण, नारदपुराण और स्कन्दपुराण जैसे ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। यह पर्व जल संरक्षण, प्रकृति…
भारत में बहुत सारे स्थान ऐसे हैं जहाँ बोलते हुए पत्थर पाये जाते हैं, पत्थरों पर आघात करने से धातु जैसी ध्वनि निकलती है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा का ठिनठिनी पखना हो या कर्णाटक के हम्पी का विट्ठल मंदिर या महानवमी डिबा के पास का हाथी। इन पर चोट करने से…
सरगुजा सम्भाग मुख्यालय से लगभग 80 कि0मी0 दूर बलरामपुर नये जिले के अन्तर्गत चलगली मार्ग में वाड्रफनगर विकास खण्ड के अलका ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम मानपुर में ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा के आराध्य देव ‘‘बाबा बच्छराजकुवंर‘‘ विराजमान हैं। मानपुर से 5 कि0मी0 दूर ‘‘जोबा पहाड़‘‘ अपना सीना ताने खड़ा…
रामायण महाकाव्य केवल भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में पसन्द की जाती है, सूरीनाम, फिजी, गुयाना, मॉरीशस, वेस्टइंडीज आदि देशों के प्रवासियों ने रामायण को अपने हृदय में बसाया है। बहुत से एशियाई देशों में रामायण को अपनी भाषा में अनुवादित कर अपने धार्मिक ग्रन्थ के रूप में…