संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026
लोक परम्पराएं गौरवशाली इतिहास की पावन स्मृतियाँ होती हैं, जो काल सापेक्ष भी हैं। वर्तमान छत्तीसगढ़ विविधताओं से परिपूर्ण भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का संगम क्षेत्र रहा है इसलिए यहाँ की परम्पराओं में चहूँ ओर की छाप दिखाई देती है। वैष्णव परंपरा में वर्षा ऋतु (आषाढ़, सावन, भादो, कुंआर) को…
कहीं भी हो लोक जीवन का आलोक एक विशेष प्रकार की इन्द्रधनुषीय आभा को प्रदर्शित करता है। इस आभा में लोक के रीति-रिवाज और संस्कार की उज्जवलता सर्वाधिक आकृष्ट करती है। क्योंकि इसमें आडम्बर के लिए कोई स्थान नहीं होता। लोक जीवन की सरलता और सहजता ही उसे विशिष्ट बनाती…
प्रत्येक प्रांत के अपने विशिष्ट पर्व होते हैं। जिनसे उसका सांस्कृतिक संबंध होता है । खान- पान, रीति-रिवाज, आचार-व्यवहार का संबंध मानवीय भाव भूमि से होता है। जिसे वह किसी न किसी रूप में व्यक्त करता है। यह व्यक्त करने का संबंध मनुुष्य के चेतन प्राणी होने से है। चेतन…
प्रकृति ने बड़ी उदारता के साथ छत्तीसगढ़ की धरती को अपनी सौंदर्य-आभा से आलोकित किया है। जंगल-पहार अपने स्नेह सिक्त आँचल से जहाँ इस धरती को पुचकारते हैं, वहीं नदी और झरने अपने ममता के स्पर्श से दुलारते हैं। हरे-भरे खेत इसकी गौरव-गरिमा का बखान करते हैं, तो पंछी-पखेरू यहाँ…
लोक संस्कृति का वैभव लोक जीवन के क्रिया-व्यवहार में परिलक्षित होता है। यदि समग्र रूप से समूचे भारतीय लोक जीवन को देखें तो आँचलिकता व स्थानीयता के आधार पर, चाहे वह पंजाब हो, या असम हो, कश्मीर हो या केरल, महाराष्ट्र हो या पश्चिम बंगाल, गुजरात हो या राजस्थान, उत्तर…
हरेली का त्यौहार छत्तीसगढ़ में प्राचीनकाल से धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा के साथ देवताधामी को सुमरता है और बाल गोपाल गेड़ी चढ़कर उत्सव मनाते हैं। गांवों में इस दिन विभिन्न खेलकूदों का आयोजन किया जाता है। रोटी, पीठा, चीला के स्वाद…
भारत भिन्न-भिन्न मान्यताओं एवं परम्पराओं का देश है, इस विशाल देश को संस्कृति ही एक सूत्र में बांधकर रखती है। संस्कृति की अजस्र धारा सभी प्राणियों को अपने पीयूष से सिंचित कर पुष्पित पल्लवित कर पोषण प्रदान करती है। हमारी संस्कृति प्रकृति के साथ एकाकार है। प्रकृति के बिना हम…
वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया, आखा तीज या अक्ति कहलाती है। इस दिन किसी भी कार्य को किया जाय वह अक्षय फ़ल देने वाला होता है। बारह मासों में तृतीया होती है परन्तु वैशाख की यह तिथि अक्षय होने के कारण इसे महत्वपूर्ण माना गया…