संवत् 2083 विक्रमी | भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी | शुक्रवार
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी | योग: ब्रह्मा | करण: शकुनि
पर्व विशेष : | तदनुसार 09 अक्टूबर 2026
गुरु पूर्णिमा अर्थात अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर की और यात्रा और व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक स्वाभिमान जाग्रत कराने वाले परम् प्रेरक के लिये नमन् दिवस। जो हमें अपने आत्मवोध, आत्मज्ञान और आत्म गौरव का भान कराकर हमारी क्षमता के अनुरूप जीवन यात्रा का मार्गदर्शन…
जीवन में योग, ध्यान व धारणा का बहुत महत्व है, क्योंकि इससे सुप्त शक्तियों का नवजागरण एवं अक्षय ऊर्जा का संचय होता है। इसका प्रतिपादन हरिशयनी एकादशी से भली-भांति होता है, जब भगवान विष्णु स्वयं चार महीने के लिए योगनिद्रा का आश्रय ले ध्यान धारण करते हैं। भारतवर्ष में गृहस्थों…
छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ का प्रभाव सदियों से रहा है, यह प्रभाव इतना है कि छत्तीसगढ़ के प्रयाग एवं त्रिवेणी तीर्थ राजिम की दर्शन यात्रा बिना जगन्नाथ पुरी तीर्थ की यात्रा अधूरी मानी जाती है। मान्यतानुसार जगन्नाथ पुरी की यात्रा के पश्चात राजिम तीर्थ की यात्रा करना आवश्यक समझा जाता…
गंगा-दशहरा पुण्य-सलिला गंगा का हिमालय से उत्पत्ति का दिवस है। जेष्ठ शुक्ल दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों का विनाश होता है इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा नाम दिया गया। इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।
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प्रकृति से लेकर चराचर जगत का अभिनव स्वरूप जब नित निखरता सृजन की ओर अग्रसर होता है तो ऐसे समय में ऋतुराज वसंत का पदार्पण होता है। सूर्य देव के उत्तरायण होते ही समूची प्रकृति भी अपना कलेवर बदलती मनमोहक हो उठती है। वसंत के आगमन से पेड़- पौधों के…
छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ का लोक पर्व है । अंग्रेज़ी के जनवरी माह में व हिन्दी के पुष पुन्नी त्यौहार छेरछेरा को मनाया जाता है। त्यौहार के पहले घर की साफ़-सफ़ाई की जाती है। छत्तीसगढ़ में धान कटाई, मिसाई के बाद यह त्यौहार को मनाया जाता है। यह त्यौहार छत्तीसगढ़ का…
छत्तीसगढ़ की संस्कृति अद्भुत है। वन्य प्रांतर, नदियों और पहाड़ियों से आच्छादित छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। मैदानी इलाकों में अनेक परंपराएं देखने को मिलती है। वैसे ही सुदूर वनांचल क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों की भी अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति है। छत्तीसगढ़ में निवासरत कई जनजातियों…
प्रकृति के साथ मानव का जुड़ाव जन्मजात है, वह किसी न किसी रुप में प्रकृति के साथ जुड़ा रहना चाहता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताएँ प्रकृति के साथ जुड़ी हुई हैं। सनातन धर्म प्रकृति के अनुरुप आचरण करना एवं जीना सिखाता है। प्रकृति के अनुरुप जीवन यापन करने के लिए आयुर्वेद…
छत्तीसगढ़ राज्य कृषि प्रधान राज्य है। कार्तिक मास के लगते ही खेतों में लहलहाती और सोने सी दमकती धान की बालियां लोक जनजीवन में असीम ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है। पावन पर्व दीपावली में जैसे दीप घर आंगन में जलाए जाते हैं। वैसे ही खुशियों और समृद्धि के…
महकती बगिया है यहां के प्रत्येक त्योहारों का अपना अलग ही महत्व है। बारहों महीने मनाए जाने वाले स्थानीय लोक पर्व तीज त्योहारों के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश भर में मनाएं जाने वाले प्रमुख त्योहारों जैसे रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दशहरा, होली आदि को भी यहां उत्साह पूर्वक मनाया जाता…
जनजातीय धार्मिक मान्यताओं में महादेव का प्रमुख स्थान है। प्रायः अधिकांश वनवासी जातियों की उत्पत्ति की मूल कथा में माता पार्वती एवं भगवान शंकर का वर्णन मिलता है। वे अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना अपने-अपने ढंग से करते हैं। ‘गौरा उत्सव’ गोंड जाति का एक प्रमुख पर्व है। ‘गौरा’ का…
खेतों में नयी फसल के आगमन पर उत्साह और उत्सवों के साथ देवी अन्नपूर्णा के स्वागत की हमारे देश में एक लम्बी परम्परा है। अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग फसलों के पकने की खुशी में देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग ढंग से और अलग-अलग नामों से त्यौहार मनाए जाते हैं…
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जननी, महारानी कौशिल्या का मायका दक्षिण कोसल जिसे छत्तीसगढ़ के रूप में जाना जाता है, सदैव राष्ट्रीय सांस्कृतिक भावधारा का संवाहक रहा है।
पुण्य सलिला महानदी, शिवनाथ, सोंढुर, अरपा, पैरी, इंद्रावती आदि नदियों से आप्लावित यह उर्वर भूमि अपनी कृषि आधारित ग्रामीण पृष्ठभूमि के लिए…
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। पर स्वतंत्र होने तथा अपनों को दुःख की बेड़ियों से मुक्त करने की चाह देखिए, जन्म लेते ही माता देवकी तथा पिता वसुदेव को बेड़ियों से मुक्त कर दिया। इतना ही नहीं तो नवजात शिशु कृष्ण की इच्छा से कारागार के द्वार स्वतः…
भारत के पर्व प्रकृति को संजोते हैं, जीवों को संरक्षित करते हैं। सदियों से चले आये पर्वों के रीति रिवाज को जब हम तिलांजलि दे रहे हैं तब उनकी महत्ता हमारे सामने आ रही है। हलषष्ठी एक ऐसा ही त्यौहार है जिसमें जैव विविधता, भू-जल को संरक्षित कर व्यवहारिक रूप…
प्राचीनकाल से देवी देवताओं की पूजा के साथ प्रकृति की पूजा किसी न किसी रुप में की जाती है। पेड पौधे, फल फुल आदि के रूप में पूर्ण आस्था के साथ आराधना की जाती है। इसी पर आधारित ग्रामीण आंचल में भोजली बोने की परंपरा का निर्वहन पूर्ण श्रद्धा के…
वैदिक काल में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को श्रावणी पर्व के रुप में मनाया जाता था। इसे श्रावणी उपाकर्म भी कहा जाता है। उस काल में वेद और वैदिक साहित्य का स्वाध्याय होता था। लोग प्रतिदिन वैदिक साहित्य का पठन करते थे, लेकिन वर्षा काल में वेद…
वर्तमान समय आपाधापी का समय है। मनुष्य इस आपाधापी के कारण मानसिक शांति से कोसों दूर हैं। सुख-सुविधा की चाहत में मनुष्य इतना उलझ गया है कि भौतिक संपदाओं की उपलब्धि के बावजूद भी न तो उसकी आंखों में नींद है, और न ही मन में चैन। ऐसी स्थिति में…
लोक संस्कृति का वैभव लोक जीवन के क्रिया-व्यवहार में परिलक्षित होता है। यदि समग्र रूप से समूचे भारतीय लोक जीवन को देखें तो आँचलिकता व स्थानीयता के आधार पर, चाहे व पंजाब हो, या असम हो, कश्मीर हो या केरल, महाराष्ट्र हो या पश्चिम बंगाल, गुजरात हो या राजस्थान, उत्तरप्रदेश…
आषाढ़ मास में माता पहुचनी के बाद श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को किसान अपना द्वितीय पर्व ‘हरियाली’ मनाता है।
किसान अपने खेती में इस प्रकार हल जोतता है मानों अपने कंधा रूपी हल से धरती माँ के केशों को सवांर रहा हो मांग निकालता है, जिसे किसानी भाषा में कुंड़…
छत्तीसगढ़ अंचल में रथदूज या रथयात्रा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जगह-जगह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है तथा इस दिन मांगलिक कार्य करना भी शुभ माना जाता है। वैसे तो मुख्य रथयात्रा का पर्व उड़ीसा के पुरी में मनाया जाता है, परन्तु छत्तीसगढ़ की सीमा साथ…
भारत धार्मिक आस्था वाला देश है। यहां के रहवासी पेड़-पौधों, पत्थरों और धातुओें में ही नहीं बल्कि नदियों में भी देवी देवताओं के दर्शन करते हैं। भारत में गंगा, गोदावरी, यमुना, सरस्वती, कावेरी, ब्रम्हपुत्र आदि महत्वपूर्ण नदियाँ हैं, जिन्हें प्राणदायनी माना जाता है। भारतीय जीवन और संस्कृति में नदियों का…
धार्मिक ग्रंथों के आधार पर भगवान विष्णु के नौवें अवतार बुद्ध का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का यह प्रमुख पर्व है। बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है, इसके संस्थापक शाक्य मुनि महात्मा गौतम…
हमारा भारत का देश गाँवों का देश है। गाँव की गौरव गरिमा लोक परम्पराएं तीज त्यौहार, आचार विचार आज भी लोक जीवन के लिए उर्जा के स्रोत हैं। गाँव की संस्कृति लोक संस्कृति कहलाती है। जनपदों लोकांचलों में विभक्त ये गाँव अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं को सांसों में बसाए हुए हैं…
वनवासी बाहुल जिला सरगुजा की प्राकृतिक सौम्यता हरियाली लोक जीवन की झांकी, सांस्कृतिक परंपराएं, रीति-रिवाज एवं पुरातात्विक स्थल बरबस ही मनमोह लेते हैं। वैसे तो सरगुजा की लोक संस्कृति में अनेकों त्योहार पर्व मनाए जाते हैं उनमें कठोरी पूजा मनाए जाने की परंपरा प्राचीन काल से रही है। हर साल…
सियादेई बालोद जिले का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। नवरात्रि में यहाँ दर्शनार्थी श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, वैसे तो आस पास के क्षेत्र से बारहों महीने यहाँ पर्यटक एवं श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं, परन्तु नवरात्रि पर्व पर बड़ी संख्या में आराधक पहुंचते हैं। यह स्थान बालोद जिला मुख्यालय…
रायपुर से जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 पर विकास खंड मुख्यालय फरसगांव स्थित है। यहां से लगभग 16 कि. मी. दूर पश्चिम दिशा में पहाड़ियों से घिरा बड़ेडोंगर नामक गांव है, जहां पहले बस्तर की राजधानी हुआ करती थी। ग्राम बड़ेडोंगर के भैंसा दोंद डोंगरी ( महिषा द्वंद्व ) नामक…
प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ अपनी शाक्त परम्परा के लिए विख्यात है, यहाँ अधिकांश देवियाँ डोंगरी में विराजित हैं। इस लिए देव स्थलों में मनमोहक नयनाभिराम प्राकृतिक सौंदर्य की भरमार है। यहां का लोक जीवन, गांव, नदी-नाले, जंगल और पहाड़ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
आस्थावान छत्तीसगढ़ के लोकमानस पर…
भारत देश के हृदय स्थल में स्थित प्राचीन दक्षिण कोसल क्षेत्र जिसे अब छत्तीसगढ के नाम से जाना जाता है, इस छत्तीसगढ राज्य के हृदय स्थल में बसे तथा राज्य की राजधानी होने का गौरव प्राप्त रायपुर शहर वर्तमान ही नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही प्राप्त है । लोकमत…
छत्तीसगढ की पावन धरा पर स्थित धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ से लगभग 14 कि0मी0 उत्तर दिशा की ओर जाने वाले सडक मार्ग पर, भण्डारपूर नामक ग्राम के समीप स्थित है ग्राम करेला, जिसे भंडारपुर करेला के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्राम खैरागढ तहसील व पोस्ट ढारा के अंतर्गत…