संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026
भील-भिलाला, कोरकू, गोंड और भारिया जैसे विभिन्न जनजातीय समाजों में दीपावली का उत्सव न केवल प्रकाश और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह उनके जीवन दर्शन, सांस्कृतिक मूल्यों और प्रकृति के साथ आवद्धता की अनूठी झलक भी प्रस्तुत करता है। यह लेख इन विविद जनजातीय परंपराओं के माध्यम से दीपावली के…
नरक चतुर्दशी दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। यह दिन असत्य, अंधकार और नकारात्मकता पर सत्य, प्रकाश और पवित्रता की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है, जो आत्मशुद्धि और प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता…
धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय वैदिक परंपरा में स्वास्थ्य, आयुर्वेद और आत्मचेतना का उत्सव है। इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, जो स्मरण दिलाता है कि सच्चा धन सोना-चाँदी नहीं, बल्कि निरोगी शरीर, संतोषी मन और जागृत चेतना है। यमदीपदान, अमृत-कलश और आरोग्य…
अहोई अष्टमी व्रत मातृत्व और संतान सुख की कामना से किया जाने वाला एक पवित्र पर्व है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और समृद्धि के लिए करती हैं। इसे “कर्काष्टमी” भी कहा गया है। इस दिन…
करवाचौथ केवल व्रत नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन, परिवार और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। इसका इतिहास वेदों, लोककथाओं और लोकगीतों तक फैला हुआ है। मिट्टी के करवे से जुड़े प्रतीक, सप्त मातृकाओं की कथाएँ, बिहारी और स्वामी हरिदास जैसे कवियों की रचनाएँ, और गांव-गांव में गाए जाने वाले लोकगीत इस…
शरद पूर्णिमा भारतीय परंपराओं का ऐसा पर्व है जिसमें धार्मिक आस्था, वैज्ञानिक दृष्टि और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम दिखाई देता है। इसे कौमुदी पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कुमार पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृतवर्षा करता है…
गोलू नवरात्रि का एक विशेष उत्सव है जो मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है। यह महिषासुर वध और माँ दुर्गा की विजय का प्रतीक है। गोलू में मूर्तियों को सीढ़ियों पर सजाया जाता है, जो सृष्टि के संतुलन और शक्ति स्वरूपा देवी की महिमा को दर्शाता है। यह…
बस्तर दशहरा भारत का सबसे लंबा और अनूठा पर्व है, जहाँ शक्ति की उपासना और महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय को अद्वितीय परंपराओं व जनभागीदारी के साथ जीवंत किया जाता है। यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
यह आलेख नवरात्रि के महत्व और उसकी आध्यात्मिक-सांस्कृतिक गहराई पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि नवरात्रि केवल देवी उपासना का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति संचयन का अवसर है। माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के माध्यम से बुद्धि, श्रम, ऊर्जा और श्री जैसी त्रिगुणात्मक शक्तियों का जागरण…
बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और विश्व का सबसे लंबा उत्सव है, जो 75 दिनों तक चलता है। देवी दंतेश्वरी को समर्पित यह पर्व शक्ति-उपासना, रथयात्रा और विविध जनजातीय परंपराओं का संगम है। इसकी शुरुआत काकतीय राजा पुरुषोत्तम देव ने 15वीं शताब्दी में की थी। आज भी यह बस्तर…
यह लेख भारत की उस परंपरा पर प्रकाश डालता है, जिसमें हर भारतीय पितरों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा रखता है। लोक-रीतियों से लेकर शास्त्रीय विधियों तक,यह भाव भारत के विविध समुदायों को एक सूत्र में बाँधता है। पितृ मोक्ष अमावस्या के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण लेख अवश्य पढ़ें।
ईन्द पर्व झारखण्ड का एक प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है जिसकी परंपरा लगभग दो हजार वर्षों से चली आ रही है। नागवंशी शासकों के काल से जुड़ा यह पर्व विभिन्न समुदायों की सहभागिता, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इन्द्रदेव की कृपा और अच्छी वर्षा की कामना…
ओणम केरल का प्रमुख पर्व है, जो राजा महाबली की स्मृति में मनाया जाता है। यह त्यौहार दानशीलता, समानता और सामूहिक आनंद का प्रतीक है, जहाँ पुक्कलम, ओणम साद्या और वल्लमकली जैसी परंपराएँ लोगों को एकता और उदारता का संदेश देती हैं।
यह आलेख गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव की ऐतिहासिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसमें लोकमान्य तिलक द्वारा गणपति महोत्सव को राष्ट्रीय जागरण और सामाजिक समरसता का माध्यम बनाने की भूमिका का उल्लेख है। साथ ही महाराष्ट्र में गणपति उत्सव की पारिवारिक परंपराओं, पूजन-विधि, विसर्जन रीति और भाद्रपद…
“गागरोन स्थित बलिण्डा घाट पर विराजमान अद्भुत गणेशजी अपनी अनोखी छवि और आस्था के कारण विशेष प्रसिद्ध हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ दर्शन करने से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।”
छत्तीसगढ़ का तीजा व्रत महिलाओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे सरगुजा से लेकर बस्तर तक बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इसमें विवाहित, अविवाहित और निसंतान महिलाएं शंकर-पार्वती की पूजा कर सुहाग, संतान और मनोवांछित वर की कामना करती हैं। बस्तर अंचल में तीजा जगार का विशेष आयोजन होता है…
तृश्शूर पूरम केरल का एक भव्य और जीवंत उत्सव है, जो शिवमंदिर के चारों ओर फैले परिक्रमा पथ में हाथियों की शोभायात्रा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की नाद लहरियों, रंग-बिरंगे छातों की छटा और रात की आतिशबाज़ी से सजीव हो उठता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि केरलीय जनजीवन, लोककला और…
खमरछठ (हलषष्ठी) छत्तीसगढ़ का एक अद्वितीय लोकपर्व है, जो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना के लिए व्रत रूप में मनाया जाता है। इसमें हलषष्ठी देवी की पूजा, ‘सगरी’ निर्माण, पसहर चावल, भैस के दूध-दही-घी का उपयोग, और…
यह आलेख छोटानागपुर के ऐतिहासिक भूगोल, जनजातीय और सदान समुदायों की सांझी सांस्कृतिक परंपराओं तथा करम-पर्व की गहराई से विवेचना करता है। करम पर्व आदिवासी और सदान हिन्दुओं की साझी श्रद्धा और सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल है, जिसमें लोककथाएं, झूमर, नृत्य-संगीत और धार्मिक विश्वास गहराई से जुड़े हैं। आलेख में…
छत्तीसगढ़िया लोक समाज में विभिन्न परंपराओं की अद्भुत छटा देखने को मिलती है। यहाँ शैव, वैष्णव और शाक्त मत के अलावा सिद्धों और नाथों का प्रभाव भी दृष्टिगोचर होता है। हरियाली अमावस्या को मनाए जाने वाले पर्व "हरेली" को कृषि यंत्रों की पूजा के साथ गांव देहात में मंत्र दीक्षा
लोक संस्कृति का वैभव लोक जीवन के क्रिया-व्यवहार में परिलक्षित होता है। यदि समग्र रूप से समूचे भारतीय लोक जीवन को देखें तो आँचलिकता व स्थानीयता के आधार पर, चाहे वह पंजाब हो, या असम हो, कश्मीर हो या केरल, महाराष्ट्र हो या पश्चिम बंगाल, गुजरात हो या राजस्थान, उत्तर
भारत के विशिष्ट संस्कृति को सहेज मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के गाँव कस्बों एवम शहरों में हरेली त्योहार को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाते हैं।
भारतीय जीवन व संस्कृति में बड़ी विविधता है। इस विविधता का कारण यहाँ विभिन्न धर्मो और विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय है। कहीं-कहीं इस विविधता का प्रमुख कारण यहाँ की आंचलिक जीवन शैली और उसकी लोक संस्कृति भी है। किसी तीज त्यौहार या पर्वों के पीछे उसकी वैदिक मान्यता के स्थान
गुरु पूर्णिमा: केवल ज्ञान के पूजन का नहीं, आत्मवोध और राष्ट्र स्वाभिमान के जागरण का पर्व। यह दिन उस परम् प्रेरक को समर्पित है जो अज्ञान के बादलों को हटाकर व्यक्ति को उसकी मौलिक प्रतिभा, संस्कृति और कर्तव्य का बोध कराता है। चाहे वह मनुष्य हो, ग्रंथ हो या भगवा…
क्या आप जानते है, बस्तर में रथ यात्रा का नाम गोंचा पर्व कैसे पड़ा? "गुंडीचा" एक शब्द है, जो ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा का अभिन्न हिस्सा है....
ओडिशा राज्य के तटीय क्षेत्र पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीनतम तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर वैष्णव धर्म परंपरा के अंतर्गत भगवान विष्णु के अवतार श्री जगन्नाथ को समर्पित है और इसे हिन्दू धर्म के चार प्रमुख धामों में स्थान प्राप्त है।
छत्तीसगढ़ राज्य नया है, किन्तु इसकी लोक संस्कृति का उद्गम आदिम युग से जुड़ा हुआ है, जो आज भी यहाँ के लोक जीवन में सतत् प्रवाहमान है। यहाँ तीज-त्यौहारों और पर्वों की बहुलता है। ये तीज-त्यौहार और पर्व यहाँ के जनमानस में रची-बसी आस्था को आलोकित करते हैं और लोक…
वसंत ॠतु आई है, वसंत ॠतु के आगमन की प्रतीक्षा हर कोई करता है। नये पल्लव लिए वन, प्रकृति, मानव अपने पलक पांवड़े बिछाए उसका स्वागत करते दिखते हैं। भास्कर की किरणें उत्तरायण हो जाती हैं और दक्षिण दिशा से मलयाचल वायु प्रवाहित हो उठती है।
सूर्य और ग्रह मंडल से मिलकर सौरमण्डल बना है। जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य को ‘सर्वति साक्षी भूतम’ (सब कुछ देखने वाला) कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि सूर्य भगवान हर क्रियाकलाप के साक्षी हैं। भारतीय ज्योतिष में नव ग्रह हैं- सूर्य, चंद्र, बुद्ध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि,…
बैशाखी उत्तर भारत में पंजाब एवं हरियाणा में जोर शोर से मनाई जाती है। इस दिन गंगा जी का धरती पर अवतरण हुआ था तथा गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 ईस्वीं में खालसा पंथ सजाया था। यानि खालसा पंथ की स्थापना इसी दिन हुई थी। इसके साथ ही यह…