आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

जब सैकड़ों क्षत्राणियों ने अपने बच्चों के साथ किया था अग्नि प्रवेश : 6 मई सन् 1532

सल्तनत काल के इतिहास में भारत का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहाँ हमलावरों से अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिये भारतीय नारियों ने अग्नि में प्रवेश न किया हो । फिर कुछ ऐसे जौहर हैं जिनकी गाथा से आज भी रोंगटे खड़े होते हैं। ऐसा ही एक जौहर…

हिन्दू योद्धा जिसका पूरा जीवन युद्ध में बीता

पिछले डेढ़ हजार वर्षों में पूरे संसार का स्वरूप बदल गया है । 132 देश एक राह पर, 57 देश दूसरी राह पर और अन्य देश भी अपनी अलग-अलग राहों पर हैं। इन सभी देशों उनकी मौलिक संस्कृति के कोई चिन्ह शेष नहीं किंतु हजार आक्रमणों के बाद यदि भारत…

आज तीन महान क्राँतिकारियों का बलिदान दिवस

षड्यंत्रकारी कलेक्टर को मारी थी गोली

भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में अनंत वीरों का बलिदान हुआ है। कुछ के तो नाम तक नहीं मिलते और जिनके नाम मिलते हैं उनका विवरण नहीं मिलता। नासिक में ऐसे ही क्राँतिकारियों का एक समूह था जिनमें तीन को फाँसी और दो को आजीवन कारावास…

स्वाधीनता संग्राम के दो ऐसे वीर जिनकी मृत्यु का कारण विश्वासघाती बने

यूँ तो भारत के इतिहास में राष्ट्र, संस्कृति समाज और स्वाभिमान रक्षा के लिये प्रतिदिन किसी न किसी न किसी क्राँतिकारी के बलिदान से जुड़ी है पर 18 अप्रैल की तिथि दो ऐसे महान क्राँतिकारियों के बलिदान की याद दिलाती है जिन्होंने जीवन की अंतिम श्वाँस तक संघर्ष किया और…

भारत के हर कोने में नरसंहार किये थे अंग्रेजों ने

जलियाँवाला बाग नर संहार 13 अप्रैल 1919 : विशेष आलेख

आज जलियाँ वाला बाग नरसंहार को एक सौ तेइस वर्ष हो गये। इस दिन जनरल डायर के आदेश पर स्त्री बच्चों सहित निर्दोष नागरिकों पर गोलियाँ चलीं थी, और लगातार दस मिनट तक चलतीं रहीं थीं। इसमें तीन सौ से…

रंगून की जेल में बलिदान देने वाला क्रांतिकारी

क्रांतिकारी वीर राम सिंह पठानिया जन्म दिवस विशेष आलेख

सामान्यतः लोग जानते हैं कि अंग्रेजों की हड़प नीति 1857 के आसपास शुरु हुई। पर इतिहास गवाह है कि इस हड़प नीति के विरुद्ध अद्भुत साहस के प्रतीक इस 24 वर्षीय नवयुवक ने अपने मुट्ठी भर साथियों के बल पर अंग्रेजी…

स्वाभिमान की चिंगारी क्राँति का दावानल बनी

सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय बलिदान दिवस विशेष

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ। इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया । असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी । इस संघर्ष…

स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज का योगदान

भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि छत्तीसगढ़ अंचल में स्वतंत्रता के लिए  गतिविधियाँ 1857 के पूर्व में ही प्रारंभ हो चुकी थी। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध क्रांति की ज्वालाएं शनै-शनै जागृत होती जा रही थी। स्वतंत्रता के अनेक पक्षधर पूर्ण साहस, वीरता, ज्वलन्त उत्साह…

आजादी के आंदोलन में छत्तीसगढ़ अंचल की भूमिका

गणतंत्र दिवस विशेष आलेख

आजादी के आंदोलन में सक्रीय भागीदारी के साथ भारत को गणतंत्र के रुप में स्थापित करने में छत्तीसगढ़ अंचल की भी महती भूमिका रही है, यहाँ के लोगों के स्वातंत्र्य समर में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। भारतीय दृष्टिकोण से 1857 की घटनाओं को देखने पर ज्ञात होता…

धर्म-संस्कृति रक्षक भगवान बिरसा मुंडा

जनजातीय अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर को को झारखंड के जनजाति दम्पति सुगना और करमी के घर हुआ था। मुंडा समाज को जल, जमीन, जंगल का हक दिलाने के लिए संघर्ष करते-करते मात्र 25 वर्ष की आयु में लोगों ने उनको भगवान…

राष्ट्ररक्षा का भाव ही वनवासी समाज का मूल स्वभाव

"यदि मेरे पास शक्ति है तथा मैं इसका प्रयोग कर सकता हूँ तो मुझे धर्म-परिवर्तन को रोकना चाहिए। हिंदू परिवारों में मिशनरी के आगमन का अर्थ वेशभूषा, तौर-तरीके, भाषा, खान-पान में परिवर्तन के कारण परिवार का विघटन है।" -गांधीजी 'हरिजन', 5 नवम्बर 1935

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव अर्थात 75 वीं…

महिला सशक्तिकरण की मिसाल वीरांगना रानी दुर्गावती

‘‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते, रमंते तत्र देवता,‘‘ अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का वास होता है। भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। देश में माँ दुर्गा को शक्ति की देवी, लक्ष्मी को धन की देवी, सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी…

स्वातंत्र्य समर और गोपाल कृष्ण गोखले : जयंती विशेष

गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 को रत्नागिरी जिले के गुहालक तालुका के कोटलक ग्रामवासी चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी फिर भी इनके लिए अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था की गई ताकि गोपाल कृष्ण गोखले ब्रिटिश शासन में क्लर्क की…

बसंती चोले के दीवाने : भगत-सुखदेव-राजगुरु

(23 मार्च, बलिदान दिवस पर विशेष)

‘एक जीवन और एक ध्येय’ वाले तीन मित्र भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु, इन तीनों की मित्रता क्रांति के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। बसंती चोले के इन दीवानों की ऐसी मित्रता थी जो जीवन के अंतिम क्षण तक साथ थी और बलिदान के बाद…

विजयी भारत के प्रेरणास्रोत : छत्रपति शिवाजी महाराज

पूरे उत्तर भारत में मुगलों का शासन था। औरंगजेब जैसा राजा दिल्ली के तख्त पर था। दक्षिण में निजामशाही थी। हिन्दू धर्म खतरे में था। छोटे-बड़े हिन्दू राजा, सेनापति जो अपना पराक्रम, शौर्य मुगलों के लिए खर्च करते थे। ऐसे समय पर 15 वर्षीय बालक शिवाजी सामान्य परिवारों के अपने…

बस्तर के भूमकाल विद्रोह के कारण एवं गुण्डाधुर की भूमिका

सत्ता की निरंकुशता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने में बस्तर के वनवासी कभी पीछे नहीं रहे। हल्बा (डोंगर) विद्रोह, भोपालपट्ट्नम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, सन् 1910 का विप्लव आदि इसके दस्तावेजी प्रमाण हैं। सन् 1910 का विप्लव ही बस्तर में भूमकाल विद्रोह के नाम से प्रचारित हुआ।

भूमकाल का अर्थ…

स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर की प्रतिनिधि यौद्धा : रानी गाईदिन्ल्यू

पूर्वोत्तर के जनजातीय क्षेत्रों में एक लोकोक्ति बड़ी ही प्रचलित है - “सोत पो, तेरह नाती ; तेहे करीबा कूँहिंयार खेती।” अर्थात स्त्री यथेष्ट संख्या में जब बच्चों को जन्म देगी तब ही समाज में खेती सफल होगी। पूर्वोत्तर के हाड़तोड़ श्रम करने वाले समाज में यह कहावत परिस्थितिवश ही…

नेता जी सुभाष चन्द्र बोस एवं महात्मा गांधी के मतभेद और मतांतर

त्रिपुरी अधिवेशन 1939 में कांग्रेस के वार्षिक अध्यक्ष पद हेतु गांधीयुगीन कांग्रेस में पहली बार चुनाव हुये थे, इस सनसनी खेज तथा आर-पार वाले चुनाव में सुभाष बाबू ने गांधी जी के समर्थित और प्रिय उम्मीदवार को परास्त किया। त्रिपुरी अधिवेशन के पहले कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सभी सदस्यों (जवाहर…

गोवा मुक्ति संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका एवं योगदान

कैसी विडेबना रही कि स्वतंत्र भारत के 14 वर्षों तक एक बड़ा भू-भाग पुर्तगाल के अधीन रहा। 19 दिसंबर 1961 का वह दिन था जब पणजी में तिरंगा लहराया। उससे पहले स्थानीय निवासियों पर अनेक तरह के प्रतिबंध थे, सेंसरशिप का आलम तो यह था कि विवाह के निमंत्रण पत्रों…

ईसाई षड़यंत्रों के लिए बड़ी चुनौती थे भगवान बिरसा मुंडा

जनजातीय गौरव दिवस विशेष आलेख

वन में रहनेवाले जनजातियों (वनवासियों) को एकत्र कर अंग्रेजी शासकों के दमनकारी एवं कठोर कानून के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाने वाले बिरसा मुंडा आज अपने अनुयायियों के बीच ‘भगवान’ के रूप में पूजे जाते हैं और देशभर में उन्हें वनवासियों का प्रेरणाप्रद नेता माना जाता…

जानिए ऑपरेशन पोलो क्या है?

भारत देश पर ब्रिटेन के लंबे शोषण, उत्पीड़नपूर्ण औपनिवेशिक शासन से 1947 मे स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद लौह व्यक्तित्व और अदम्य साहस के धनी तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के अथक प्रयासों से 562 देशी रियासतों मे से अधिकतर का भारत विलय हो गया।

जिन्ना जहां एक ओर द्विराष्ट्र…

आज़ादी के लिए प्राणों की परवाह न करने वाली वनबाला दयावती : स्वतंत्रता दिवस विशेष

"जिस रोज 144 दफा लगाया गया था, उस रोज तमोरा गांव में सभा थी। वहां पर मैं, मेरी माँ और कुछ अन्य स्त्रियां सभा में गई। हम लोगों को सभा में जाने से किसी ने रोका नहीं। कुरुभाठा, ढोंगा, धौराभाठा, डूमरडीह इत्यादि के लोगों को डोर लगा के रोक रहे…

एक ही देश में दो झंडे और दो निशान स्वीकार नहीं : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

भारतीय राजनीति के नक्षत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। महानता के सभी गुण उन्हें विरासत में मिले थे। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने ख्यात शिक्षाविद् थे।

डॉ. मुखर्जी ने 22 वर्ष की आयु में एमए की…

अद्वितीय वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई : पुण्यतिथि विशेष

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम हिन्दुस्तान की अद्वितीय वीरांगना के रूप में लिया जाता है। उनकी महत्ता का प्रमाण यही है कि सन् 1943 में जब नेता जी सुभाषचंद बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद फौज में स्त्रियों की एक रेजीमेंट बनाई तो उसका नाम ‘‘रानी झांसी रेजीमेंट’’ रखा…

मैं धरती-आबा हूं! भगवान बिरसा मुंडा

झारखंड के छोटा नागपुर स्थित उलीहातु गाँव में 15 नवम्‍बर, 1875 को जन्में बिरसा मुंडा को जनजातीय समाज सहित संपूर्ण देश ने अपना भगवान माना है। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के धनी बिरसा ने ईसाई षड्यंत्रों, सामाजिक कुरीतियों आदि को अपने तर्कों से पटखनी दी और जमकर प्रतिकार किया। वहीं…

छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम 1857 से पूर्व प्रारंभ हुआ : विशेष आलेख

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़वासियों की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता। वर्तमान छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम 1857 से पूर्व प्रारम्भ हो चुका था, तत्कालीन समय में यह जमींदारी क्षेत्र था तथा कलचुरियों, मराठों एवं अंग्रेजों के अधीन रहा। कभी मराठों से स्वतंत्रता पाने के लिए यहाँ…

देश भक्तों का राजकुमार पराक्रमी सुभाष चंद्र बोस

23 जनवरी पराक्रम दिवस : यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिवस

केंद्र शासन ने नेताजी के जन्मदिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस एकमात्र नेता हैं जिनके जन्म दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में…

इन पुतरन के सीस पर वार दिए सुत चार : गुरु गोविन्द सिंह जी

गुरु गोविंद सिंह जी के 354 वें प्रकाश पर्व पर विशेष आलेख

हिन्दू जाग्रत है तो भारत सुरक्षित है। भारत का धर्म और संस्कृति सुरक्षित है। किन्तु जब भारत की रक्षा करनेवाले ही हताश, निराश और ध्येय विहीन रहेंगे तो भला राष्ट्र कैसे सुरक्षित रह सकता है। इसलिए प्रत्येक भारतवासी…

झांसी मेरी है, मैं उसे कदापि नहीं दूंगी : वीरांगना लक्ष्मी बाई

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम हिन्दुस्तान की अद्वितीय वीरांगना के रूप में लिया जाता है। उनकी महत्ता का प्रमाण यही है कि सन् 1943 में जब नेता जी सुभाषचंद बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद फौज में स्त्रियों की एक रेजीमेंट बनाई तो उसका नाम ‘‘रानी झांसी रेजीमेंट’’ रखा…

समय की मांग है भगवान बिरसा मुंडा का हूल जोहार : जयंती विशेष

छोटा नागपुर के अधिकतर वनवासी सन 1890-92 के कालखंड में चर्च के पादरियों के बहकावे में आकर ईसाई हो गये थे। बिरसा का परिवार में इसमें शामिल था परंतु शीघ्र ही ईसाई पादरियों की असलियत भांप कर बिरसा न केवल ईसाई मत त्यागकर हिंदू धर्म में लौट आये वरन उन्होंने…