आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

आज का पंचांग

संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार

नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर

पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026

सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज और सरदार पटेल

23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती

दुनिया के दूसरे देशों के इतिहास में भी ऐसा हुआ है कि अंतिम चरण में सत्ता परिवर्तन और आजादी के आगमन में आमने-सामने वाला हिंसक युद्ध घटित हुआ। अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध हुआ और…

स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी : हेमू कालाणी

21 जनवरी 1943 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी हेमू कालाणी बलिदान दिवस

भारतीय सवाधीनता संग्राम असंख्य बलिदानों का इतिहास है। हजारों लाखों जीवन की आहूति के बाद ही भारत में स्वतंत्रता का सूर्य उदित हो सका। ऐसे ही एक अमर बलिदानी हैं हेमू कालाणी। संभवतः उनका जन्म ही स्वाधीनता संग्राम के लिये हुआ…

अंग्रेजों से मुक्ति के लिये छत्तीसगढ़ के परलकोट में सशस्त्र क्राँति

भारत को अंग्रेजों से मुक्ति सरलता से नहीं मिली। पूरा देश मानों भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने उठ खड़ा हुआ था। क्या नगर वासी, क्या ग्राम वासी और क्या वनवासी। सभी क्षेत्रों में क्रान्ति की ज्वाला धधक उठी। ऐसे ही क्राँतिकारी थे वनवासी गेंद सिंह जिन्होने छत्तीसगढ के बस्तर…

फाँसी से पहले हथौड़े से जिनके दाँत तोड़े, नाखून उखाड़े गये

12 जनवरी 1934 : दो क्राँतिकारियों सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त का बलिदान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास साधारण नहीं है। इसमें बलिदान के कुछ ऐसे प्रसंग भी हैं जिन्हें पढ़कर आत्मा काँप उठती है। क्राँतिकारी सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त को फाँसी देने से पहले अमानवीय यातनाएँ दी गई, हथौड़े से…

राष्ट्ररक्षा करते हुये दत्ता जी शिन्दे बलिदान

10 जनवरी 1760 दत्ता जी शिन्दे बलिदान

भारतीय स्वतंत्रता का संघर्ष साधारण नहीं है। इसमें असंख्य बलिदान हुये हैं और सबसे बड़ी त्रासदी यह कि बाह्य आक्रमणकारियों की सहायता अनेक स्वदेशी राजाओं और सेनानायकों ने की है। विदेशी आक्रांता यदि भारत में सफल हुये हैं तो स्थानीय लोगों की सहायता…

भारतीय इतिहास में मुगलों का बड़ा सैन्य समर्पण

7 जनवरी 1738 : भोपाल युद्ध और दोराहा संधि

इतिहास के पन्नों में एक ओर आक्रांताओं के क्रूरतम अत्याचार और विध्वंस का वर्णन है तो दूसरी ओर भारतीयों के शौर्य का विवरण भी। भोपाल के समीप हुआ यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें मुगल, निजाम हैदराबाद, अवध एवं भोपाल नबाब…

युवकों को सशस्त्र क्रान्ति का प्रशिक्षण देने वाले क्रांतिकारी बारीन्द्रनाथ घोष

5 जनवरी 1880 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी बारीन्द्रनाथ घोष का जन्म दिवस

अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिये जिन क्राँतिकारियों ने अपनी स्वर्णिम सुख सुविधा का परित्याग करके बहुआयामी संघर्ष किये और जेल गये उनमें बारीन्द्र घोष भी हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष संघर्ष तो किया ही साथ ही जन जागरण के…

प्राण दे दिये पर धर्म न बदला

1 जनवरी 1670 : वीर गोकुल सिंह जाट बलिदान दिवस

स्वाधीनता और स्वाभिमान के संघर्ष में असंख्य बलिदान हुये हैं। इतिहास की पुस्तकों में उनका विवरण नगण्य मिलता है। ऐसा ही बलिदान तिलपत में वीर गोकुल सिंह जाट का हुआ। यह बलिदान साधारण नहीं था। बंदी बनाकर ऐसी क्रूरतम मौत…

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह

मणिपुर राज्य की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराएँ और प्राकृतिक सौन्दर्य भारतवासियों के लिए गौरव के विषय हैं, तो उसका शौर्य, साहस एवं त्याग-बलिदान से परिपूर्ण इतिहास भारतवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

सन् १८९१ के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में मणिपुर के बहादुर लोगों ने औपनिवेशिक शक्तियों का प्रतिरोध जिस वीरता और…

धर्म पर प्राण वार दिये पर इस्लाम न कबूला साहबजादों ने

दिसम्बर माह की 21 से लेकर 27 के बीच गुरु गोविन्द सिंह के चारों पुत्रों को दी गई क्रूरतम यातनाओं और बलिदान की स्मृतियाँ तिथियाँ हैं। ऐसा उदाहरण विश्व के किसी इतिहास में नहीं मिलता। इनमें 26 दिसम्बर के दिन दो अबोध साहबजादों का बलिदान हुआ। ये बलिदान राष्ट्र और…

स्वतंत्रता के लिए बलिदान होने वाले चार क्रांतिकारी

19 दिसम्बर 1927 क्रांतिकारी बलिदान विशेष

भारत की स्वतंत्रता के लिये कितने बलिदान हुये, कितने क्राँतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी इसका समूचा विवरण इतिहास की पुस्तकों से भी नहीं मिलता। अंग्रेजों के सामूहिक अत्याचार से बलिदान हुये निर्दोष नागरिकों के आकड़े निकाल दें तब भी अंग्रेजों ने जिन्हें…

गोवा मुक्ति संग्राम में स्वयंसेवकों की भूमिका

गोवा मुक्ति दिवस 19 दिसंबर 1961

भारत को जिस स्वरुप और जिन भौगोलिक सीमाओं को वर्तमान में हम देख पा रहे है वह स्वतन्त्रता प्राप्ति के बहुत बहुत बाद तक चले संघर्ष और एकीकरण के अनथक चले अभियान का परिणाम है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भी बहुत से क्षेत्र ऐसे…

बंगाल के अंग्रेज कलेक्टर को गोली मारने वाली बहादूर बालिकाएं

14 दिसम्बर विशेष आलेख

कोई कल्पना कर सकता है केवल चौदह वर्ष की दो बालिकाओं की वीरता की जिन्होंने अंग्रेजी राज में अंग्रेज कलेक्टर के कार्यालय में घुसकर गोली मारी और ढेर कर दिया। सुनीति चौधरी और शांति घोष दो ऐसी वीर बालिकाएँ थीं। जिन्हे कालापानी भेजा गया।

आजकल…

क्राँतिकारियों का मिलन केन्द्र था यह आश्रम

12 दिसंबर 1896 : सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबा राघवदास का जन्म

संत राघवदास स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक और एक ऐसे आध्यात्मिक कार्यकर्ता थे। जिनका पूरा जीवन समाज की सेवा और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा। उनका आश्रम क्राँतिकारियो और अहिसंक आँदोलनकारी दोनों की गतिविधि स्थल था। वे…

अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति करने वाले : वीर नारायण सिंह

स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भारत में सुलग रही थी और राजे-रजवाड़े अंग्रेजी दमन के कारण अंग्रेजों के खिलाफ़ लामबंद हो रहे थे। उस समय यह स्वतंत्रता आन्दोलन पूरे भारत में फ़ैल रहा था। छत्तीसगढ़ अंचल भी इससे अछूता नहीं था।

यहाँ भी 1857 के आन्दोलन में स्वतंत्रता की चाह लिए…

बलिदानी सैनिकों की सहायता के लिए मनाया जाता है सशस्त्र सेना झंडा दिवस

भारत में प्रति वर्ष सशस्त्र सेना झंडा दिवस 7 दिसंबर 1949 से हर साल मनाया जाता है। यह भारतीय सशस्त्र सेना बलों के कर्मियों के कल्याण के लिए भारत की जनता से धन जमा करने के प्रति समर्पित एक दिन हैं। इस दिन शहीदों और वीर सेनानियों को सम्मानित किया…

मुगलों को धूल चटाने वाले वीर योद्धा - लचित बोरफ़ुकन

लचित बोरफुकन, जिन्हें 'चाउ लासित फुकनलुंग' नाम से भी जाना जाता है, 17वीं शताब्दी के एक महान और वीर योद्धा थे। उनकी वीरता के कारण ही उन्हें पूर्वोत्तर भारत का वीर 'शिवाजी' कहा जाता है। उन्होंने मुगलों के खिलाफ जो निर्णायक लड़ाई लड़ी थी, उसके लिए उन्हें आज भी याद…

अपनी धरती अपना राज का नारा देने वाले महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा

भारत के महान क्रांतिकारी हिंदू संस्कृति धर्म रक्षक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को खूंटी जिले के अडकी प्रखंड के उलिहातु गाँव में हुआ था। उस समय ईसाई स्कूल में प्रवेश लेने के लिए इसाई धर्म अपनाना जरुरी हुआ करता था। तो बिरसा का धर्म परिवर्तन कर उनका…

स्वदेशी और स्वाधीनता आँदोलन को गति देने वालों में अग्रणी विपिन चंद्र पाल

स्वतंत्रता आँदोलन के अग्रणी नेताओं में "लाल, बाल, पाल" के रूप "त्रिदेव" के नाम आते हैं जिन्होंने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण स्वदेशी का नारा लगाया था। विपिनचंद्र पाल इन "त्रिदेव" में से एक थे और अन्य दो लाला लाजपतराय एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे।

इन्हीं त्रिदेव ने…

काले पानी की सजा काट भगतसिंह राजगुरु जैसे क्राँतिकारी तैयार करने वाले भाई परमानंद

4 नवम्बर 1870 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भाई परमानन्द का जन्म दिवस विशेष

सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भाई परमानन्द का जन्म 4 नवम्बर 1870 को झेलम जिले के करियाला गाँव में हुआ। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान मे है। भाई जी के परिवार की पृष्ठभूमि राष्ट्र और संस्कृति के लिये बलिदान की रही है…

तेरह वर्ष की आयु से चला गिरफ्तारी और रिहाई का सिलसिला : क्राँतिकारी मन्मन्थनाथ गुप्त

26 अक्टूबर 2000 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी और लेखक मन्मन्थनाथ गुप्त पुण्यतिथि विशेष

सुप्रसिद्ध साहित्यकार और क्राँतिकारी मन्मन्थनाथ गुप्त ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिनकी गिरफ्तारियाँ तीनों कार्यों में हुई। क्राँति के प्रचार में, क्राँति में सहभागिता में और साहित्य रचना में भी। उनकी पहली गिरफ्तारी तेरह वर्ष की आयु में हुई…

गौरक्षा के लिये 166 दिन अनशन कर देश में जाग्रति उत्पन्न की : संत रामचंद्र वीर

12 अक्टूबर 1909 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और संत रामचंद्र वीर का जन्म दिवस

स्वामी रामचंद्र वीर एक ऐसे संत और राष्ट्रीय संस्कृति के लिये समर्पित विभूति थे जिन्होंने दासत्व काल में जहाँ स्वतंत्रता के लिये संघर्ष किया तो स्वतंत्रता के बाद स्वत्व, स्वाभिमान और सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना के…

राष्ट्र जागरण और गौरक्षा के लिये समर्पित जीवन : संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी

9 अक्टूबर 1885 सुप्रसिद्ध संत और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी का जन्म दिवस

भारतीय स्वतंत्रता के लिये जितना संघर्ष प्रत्यक्ष आँदोलन के लिये हुआ उससे कहीं अधिक उस अप्रत्यक्ष संघर्ष में जीवन समर्पित हुये जिन्होंने स्वाधीनता आँदोलन में तो भाग लिया ही साथ ही भारतीय संस्कृति के मानविन्दुओं और…

मुगल सेना के छक्के छुड़ाने वाली वीरांगना रानी दुर्गावती

5 अक्टुबर रानी दुर्गावती जन्म दिवस विशेष

रानी दुर्गावती हमारे देश की वो वीरांगना है, जो अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगलों से युद्ध कर वीरगति को प्राप्त हो गई। वे बहुत ही बहादुर और साहसी महिला थीं, जिन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद न केवल उनका राज्य…

रानी दुर्गावती से युद्घ में मारा गया था शेरशाह सूरी

सामान्यतः हम रानी दुर्गावती को गोंडवाना की महारानी के रूप में जानते हैं और यह भी जानते हैं कि उन्होंने अकबर के आक्रमण का पुरजोर उत्तर दिया था। वे आसफ खाँ की उस कुटिल रणनीति का शिकार बनीं थीं जो उसने जबलपुर के नरई नाले पर धोखे की जमावट की…

रानी हंसादेवे सहित नौ सौ क्षत्राणियों का जौहर

27 सितम्बर 1310 सिवाणा में पहला जौहर

मध्यकाल में हुये भीषण विध्वंस और नरसंहार के बीच रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐसी अगणित वीरगाथाएँ हैं जिनमें अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा केलिये क्षत्रियों ने केशरिया बाना धारण कर बलिदान दिया और क्षत्राणियों ने अपनी सखी सहेलियों सहित अग्नि में…

अंग्रेजों के मनोरंजन क्लब को बम से उड़ाने वाली महिला क्रांतिकारी

24 सितम्बर बलिदान दिवस विशेष आलेख

भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में ऐसे असंख्य बलिदान हुये जिनका इतिहास की पुस्तकों में वर्णन शून्य जैसा है। जबकि उनक कार्य स्वर्णाक्षरों में उल्लेख करने लायक हैं। इनमें से एक हैं महिला क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार जिन्होंने 24 सितम्बर 1932 में अंग्रेजों की पुलिस से…

डिप्टी कलेक्टर पद त्यागकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले सेनानी

18 सितम्बर 1958 : डा.भगवान दास का निधन, स्वतंत्रता के बाद पहला "भारत रत्न" सम्मान

भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास ऐसे विविध सेनानियों से भरा है जो अपने स्वर्णिम जीवन स्तर का परित्याग करके आँदोलनकारी बने और जेल गये। डॉ भगवान दास ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्होंने डिप्टी कलेक्टर…

ऐसे क्रांतिकारी जिनका निर्जीव शरीर समुद्र में फेक दिया गया

क्राँतिकारी महावीर सिंह राठौर का जन्म दिवस 16 सितम्बर विशेष

जेल की प्रताड़ना से हुआ था बलिदान कोई कल्पना कर सकता है ऐसे मानसिक दृढ़ संकल्प की कि पुलिस की हजार प्रताड़नाओं के बाद भले प्राण चले जायें पर संकल्प टस से मस न हो। ऐसे ही संकल्पवान क्राँतिकारी थे…

हर जेल यात्रा में ग्रंथ तैयार करने वाले सेनानी साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी

9 सितम्बर 1968 : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी पुण्यतिथि

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम विविधता से भरा है। क्राँतिकारी और अहिसंक आँदोलन के साथ अन्य धाराओं में एक ऐसी धारा भी रही जिसने प्रत्यक्ष आँदोलनों में सहभागिता के साथ ऐसी साहित्य रचना भी की जिसने जन सामान्य को झकझोर और…