संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल सप्तमी | शनिवार
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा | योग: अतिगंड | करण: गर
पर्व विशेष : | तदनुसार 17 अक्टूबर 2026
जब हम किसी समाज को समझना चाहते हैं, तो हम सर्वप्रथम उस समाज के इतिहास को देखते हैं। जैसे राजपूतों को समझने के लिए हम इतिहास में उन्हें देखते हैं। हम इतिहास में पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप जैसे शूरवीरों की ओर देखते हैं। मराठों को समझने के लिए वीर शिवाजी…
जब हम भारत के स्वाधीनता संग्राम की चर्चा करते हैं, तो अंग्रेजों के शासन के विरुद्ध अपने संघर्ष का ही ब्यौरा देते हैं। इस दौरान हम अपने उस संघर्ष को विस्मृत कर देते हैं, जो हमने 9वीं सदी से 18वीं सदी तक इस्लामी आक्रमणकारियों के विरुद्ध किया था। और अंग्रेजों…
इतिहास को ठीक-ठीक न जानने के कारण जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं, तो केवल अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष को ही देखते हैं, और उसमें भी 1857 से 1947 तक का ही। 1857 के संग्राम को ही हम अज्ञानवश भारतीयों द्वारा अंग्रेजों के प्रतिकार का पहला प्रयास…
यह आलेख 16 वर्षीय वनबाला वीरांगना दयावती कंवर के अद्भुत साहस की कहानी है, जिन्होंने 1930 में तमोरा गांव के जंगल सत्याग्रह के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और संगीनों के सामने डटे रहकर सत्याग्रहियों की रक्षा की। दयावती का यह बलिदान और निर्भीकता छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में…
18 जून सन्, 1576 हल्दीघाटी के महान् युद्ध और हिंदुत्व की विजय स्मृति में सादर समर्पित -प्रामाणिक शोध
अमर क्रान्तिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 छोटा नागपुर कहे जाने वाले क्षेत्र में हुआ था । यह क्षेत्र अब झारखंड में है । उनकी माता सुगना देवी और पिता करमी मुंडा का गाँव झारखंड प्रांत के रांची जिले में पड़ता है । उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम साल्वा…
26 अप्रैल 1858 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी बाबू कुँअर सिंह का बलिदान
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में ऐसे असंख्य बलिदानी हुये जिन्होंने न अपने परिवार की चिंता की न आयु बाधा बनी। वे भारत की स्वाधीनता के लिये न्यौछावर हो गये। ऐसे ही बलिदानी थे बाबू कुँअर सिंह, जिन्होंने हाथ में बंदूक…
23 अप्रैल 1880 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी तेलंगा खड़िया का बलिदान
भारत पर आक्रमण चाहे सल्तनतकाल काल का रहा हो अथवा अंग्रेजीकाल का। वन्य अंचलों ने कभी दासत्व को स्वीकार नहीं किया और स्वाधीनता केलिए सदैव संघर्ष किया और बलिदान हुये। ऐसे ही संघर्ष के नायक हैं तेलंगा खड़िया जिन्होंने वनवासी…
19 अप्रैल 1910 : तीन महान क्राँतिकारियों अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, विनायक नारायण देशपाँडे और कृष्ण गोपाल कर्वे का बलिदान
भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में अनंत वीरों का बलिदान हुआ है। कुछ के तो नाम तक नहीं मिलते और जिनके नाम मिलते हैं उनका विवरण नहीं मिलता। नासिक में ऐसे ही क्राँतिकारियों…
परम वैभवशाली भारत माता का पाथेय है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
आ सिंधु-सिंधु पर्यन्ता, यस्य भारत भूमिका। पितृभू- पुण्यभूभुश्चेव सा वै हिंदू रीति स्मृता॥ इस श्लोक के अनुसार "भारत के वह सभी लोग हिंदू हैं जो इस देश को पितृभूमि-पुण्यभूमि मानते हैं" वीर दामोदर सावरकर के इस दर्शन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक…
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ। इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया। असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी। इस संघर्ष का सूत्रपात करने वाले स्वाभिमानी सिपाही मंगल पाण्डेय थे…
6 अप्रैल 1929 : महाशय राजपाल का बलिदान
दासता के दिनों में भारतीय अस्मिता पर चौतरफा हमला हुआ है। आक्रांताओं ने केवल सत्ताओं को ही ध्वस्त नहीं किया अपितु भारतीय संस्कृति और साहित्य को भी विकृत करने का प्रयास किया है। एक ओर यदि भारतीय जन स्वाधीनता संघर्ष के लिये…
सार्वजनिक जीवन या पत्रकारिता में ऐसे नाम विरले हैं जिनका व्यक्तित्व व्यापक है और जो विभिन्न विचारों में समन्वय बिठा कर राष्ट्र और संस्कृति की सेवा में समर्पित रहे हों। ऐसे ही क्राँतिकारी पत्रकार थे गणेश शंकर विद्यार्थी। उन्हे उनके जीवन में और जीवन के बाद भी सब अपना मानते…
“जो आँखें देशहित जागी, वो हरगिज़ सो नहीं सकती।
जिस्म के ख़ाक होने पर भी, शोहरत खो नहीं सकती।
भले दौलत की ताक़त से खरीदो, सारी दुनिया को,
शहादत की मगर कोई भी क़ीमत हो नहीं सकती।। ”
भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के दो मुखर स्वर…
(23 मार्च, बलिदान दिवस पर विशेष)
‘एक जीवन और एक ध्येय’ वाले तीन मित्र भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु, इन तीनों की मित्रता क्रांति के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। बसंती चोला के इन दीवानों की ऐसी मित्रता थी जो जीवन के अंतिम क्षण तक साथ थी और बलिदान के बाद…
17 मार्च 1527 : खानवा के युद्ध में अज्जा झाला का बलिदान
पिछले डेढ़ हजार वर्षों दुनियाँ के दो सौ देशों के स्वरूप और संस्कृति बदल गई। लेकिन विध्वंस की आँधी और विभाजन की त्रासदी के बीच भी भारत की संस्कृति अक्षुण्ण है। यह उन बलिदानियों के कारण संभव हो…
4 मार्च 1939 सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी लाला हरदयाल का बलिदान
सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी और विचारक लाला हरदयाल की गणना उन विरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में होती है जिन्होंने केवल भारत ही नहीं अपितु अमेरिका और लंदन में भी अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध जनमत जगाया था।
लालाजी को अपने पक्ष में करने…
1 मार्च 1924 : चार्ल्स ट्रेगार्ट को मौत के घाट उतारने का प्रयास
पराधीनता के दिनों में कुछ अंग्रेज अधिकारी ऐसे थे जो अपने क्रूरतम मानसिकता के चलते भारतीय स्वाधीनता सेनानियों से अमानवीयता की सीमा भी पार जाते थे। बंगाल में पदस्थ ऐसा ही अधिकारी चार्ल्स ट्रेगार्ट था। जिसे मौत…
26 फरवरी 1966 : स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा है। एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया। दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से…
अंग्रेजों के विरुद्ध 1857 की सशस्त्र क्रान्ति के बारे सब जानते हैं। निसंदेह वह एक संगठित अभियान था पर इससे पहले भी स्थानीय स्तर पर अनेक सशस्त्र संघर्ष हुये हैं। इससे पहले ऐसा ही एक सशस्त्र आन्ध्र प्रदेश में हुआ था जिसके नायक थे नरसिंह रेड्डी। क्रांति से अंग्रेजी सेना…
20 फरवरी 1986 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुण्यतिथि
भाई उद्धवदास जी मेहता देश के उन विरले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में एक हैं जो दस वर्ष की बालवय में स्वाधीनता संघर्ष केलिये सामने आये और पन्द्रह वर्ष की आयु में बंदी बनाये गये। उनका सारा जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र…
18 फरवरी 1931 : लेखन के साथ सक्रिय आँदोलन में भागीदारी
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनेक बलिदानी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने लेखन से जनमत जगाया, युवकों को क्राँति के लिये संगठित किया और स्वयं विभिन्न आँदोलनों में सीधी सहभागिता की और बलिदान हुये । सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित…
15 फरवरी 1882 को जन्मे बद्रीदत्त पांडेय का पूरा जीवन राष्ट्र और संस्कृति रक्षा को समर्पित
जिस प्रकार प्रातःकालीन सूर्योदय के लिये करोड़ो पलों की उत्सर्ग होता है उसी प्रकार भारत राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिये भी करोड़ो जीवन के बलिदान हुये हैं । कुछ नाम सामने आ रहे हैं…
भारतीय स्वाधीनता के संघर्ष में कितने बलिदान हुये इसका विस्तृत वर्णन कहीं एक स्थान पर नहीं मिलता। जिस क्षेत्र के इतिहास पर नजर डालों वहाँ संघर्ष और बलिदान की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ मिलती हैं। ऐसी ही कहानी क्राँतिकारी बुधु भगत की है जिन्होंने जीवन की अंतिम श्वाँस…
11 फरवरी 1750 क्रांतिकारी तिलका मांझी जन्म दिवस विशेष
भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में वीरता और बलिदान की अद्भुत घटनायें दर्ज हैं। ऐसे ही एक बड़े संघर्ष का विवरण संथाल परगने में मिलता है। जिसके नायक वनवासी तिलका मांझी थे। जिन्हें अंग्रेजों ने चार घोड़ो से बाँध कर जमीन…
10 फरवरी 1993 : का निधन, स्वतंत्रता के बाद जन आंदोलन में दो वर्ष जेल में रहे
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में कुछ ऐसे सेनानी हुये जिनका पूरा जीवन संघर्ष में बीता। पहले स्वतंत्रता के लिये अंग्रेजों से संघर्ष किया और स्वतंत्रता के बाद जन समस्याओं के निवारण के लिये…
6 फरवरी 1915 : कवि प्रदीप का जन्म दिवस मध्यप्रदेश के बड़नगर में
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में करोड़ो प्राणों के बलिदान हुये । ये बलिदान साधारण नहीं थे । पर इन बलिदानों केलिये आव्हान करने वाले शब्द साधकों की भी एक धारा रही है जिन्होंने अपने शब्दों की शैली और…
उन्होंने कहा था -ग़ुलामी के बन्धनों में जीना याने स्वयं की ज़िन्दगी को तबाह करना है। लेकिन यह भी सच है कि आज़ादी भले ही हमें प्यारी हो, पर उसे पाने का रास्ता हमेशा कठिन चुनौतियों से भरा होता है। – अपने इन्हीं विचारों पर अडिग रहते हुए लाला लाजपतराय…
गणतंत्र दिवस विशेष आलेख
26 जनवरी भारत के लिये अति पवित्र दिन है। यह भारत के गणतंत्र का उत्सव दिवस है। दासत्व के एक लंबे अंधकार के बाद भारतीय जीवन में अपना संविधान आया था। भारतीय गणतंत्र की वर्षगाँठ के साथ इस दिन एक और गौरव मयी स्मृति जुड़ी…
आज का भारतीय गणतंत्र स्वतंत्रता के बाद पहली बार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पुनर्स्थापना के परिप्रेक्ष्य में मनाया जा रहा है। भारतीय संविधान के निर्माता भली-भांति जानते थे कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श विवादों को समाधान की ओर ले जाते हैं। इसीलिए संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति में राम-दरबार…